भोपाल गैस बस्तियों में 70% पानी के नमूने दूषित, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के 8 साल बाद भी सीवेज मिला पानी
सारांश
मुख्य बातें
भोपाल की यूनियन कार्बाइड प्रभावित बस्तियों में रहने वाले हज़ारों गैस पीड़ितों को आज भी मल-दूषित पानी पीने पर मजबूर होना पड़ रहा है। 31 जुलाई 2026 को आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में गैस पीड़ित संगठनों ने दावा किया कि 63 पानी के नमूनों में से 43 नमूनों — यानी करीब 70 प्रतिशत — में फीकल कोलीफॉर्म (मल के बैक्टीरिया) की पुष्टि हुई है। यह स्थिति तब है जब सर्वोच्च न्यायालय 2018 में ही भोपाल नगर निगम (BMC) को सीवेज लाइनें बिछाने का आदेश दे चुका है।
नमूनों में क्या मिला
भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष नवाब खान ने बताया कि इस महीने 30 समुदायों के नलों से लिए गए 63 नमूनों में से 43 में फीकल कोलीफॉर्म पाया गया। उनके अनुसार, 30 में से 19 समुदायों को मिलने वाला पेयजल मल से दूषित है।
स्रोत के आधार पर दूषण की दर अलग-अलग है। अपर लेक (बड़ा तालाब) से आपूर्ति किए गए पानी के 90 प्रतिशत नमूने दूषित पाए गए, जबकि कोलार डैम से आपूर्ति किए गए पानी के 25 प्रतिशत नमूने दूषित थे।
ज़मीनी हालात: बीमारियों का बोझ
भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की अध्यक्ष रशीदा बी ने बताया कि परित्यक्त यूनियन कार्बाइड कारखाने से सटे समुदायों में पूरे-पूरे परिवार दस्त और उल्टी की चपेट में हैं। उन्होंने कहा कि निजी क्लीनिकों में टाइफाइड के मामले असामान्य रूप से अधिक सामने आ रहे हैं। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि मल-दूषित पेयजल सीधे तौर पर जलजनित बीमारियों को बढ़ावा दे रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश और उनकी अनदेखी
रशीदा बी ने याद दिलाया कि 2004 में सर्वोच्च न्यायालय ने माना था कि यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे की वजह से इस क्षेत्र का पानी जहरीले रसायनों और भारी धातुओं से प्रदूषित है। अदालत ने पाइपलाइन बिछाने और साफ पेयजल उपलब्ध कराने का आदेश दिया था।
भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष बालकृष्ण नामदेव के अनुसार, अगस्त 2018 में एक बार फिर सर्वोच्च न्यायालय ने BMC को सीवेज लाइनें बिछाने और उचित जल-निकासी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। BMC ने तीन महीने में काम पूरा करने का वादा किया था, लेकिन संगठनों का दावा है कि पिछले आठ वर्षों में एक भी कदम नहीं उठाया गया।
जवाबदेही की माँग
भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना धींगरा ने मल-दूषित पेयजल आपूर्ति के लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की। उन्होंने कहा, 'सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन कर निवासियों के स्वास्थ्य को खतरे में डालने वाले अधिकारियों को दंडित किया जाए।'
गौरतलब है कि यह मामला केवल पानी की गुणवत्ता का नहीं, बल्कि न्यायिक आदेशों की अवमानना और दशकों से उपेक्षित एक समुदाय के संवैधानिक अधिकारों का है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि क्या प्रशासन इस रिपोर्ट के बाद कोई ठोस कदम उठाता है।