भोपाल जलापूर्ति में फीकल कॉलीफॉर्म बैक्टीरिया: जीतू पटवारी ने माँगी उच्चस्तरीय जाँच, FIR की माँग
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 1 अगस्त 2026 को राजधानी भोपाल की पेयजल व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और पूरे मामले की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जाँच की माँग की। पटवारी के अनुसार, बड़े तालाब और कोलार जलापूर्ति के पानी के नमूनों में सीवेज जनित फीकल कॉलीफॉर्म बैक्टीरिया की मौजूदगी लाखों नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ है।
क्या है पूरा मामला
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पटवारी ने दावा किया कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार बड़े तालाब से सप्लाई होने वाले लगभग 90 प्रतिशत पानी के नमूनों में सीवेज जनित फीकल कॉलीफॉर्म बैक्टीरिया पाया गया है। इसके अलावा कोलार जलापूर्ति के 25 प्रतिशत नमूने भी निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। यह ऐसे समय में सामने आया है जब मानसून के कारण जलजनित बीमारियों का खतरा पहले से बढ़ा हुआ है।
सरकार पर आरोप
पटवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार विज्ञापनों में सुशासन का दावा करती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि प्रदेश की राजधानी के नागरिक दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इस गंभीर लापरवाही को नहीं रोका गया, तो जलजनित बीमारियों का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। गौरतलब है कि भोपाल जैसी राजधानी में पेयजल की ऐसी स्थिति शासन-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
कांग्रेस की माँगें
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार के समक्ष निम्नलिखित माँगें रखी हैं: पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जाँच कराई जाए; जल गुणवत्ता निगरानी में लापरवाही बरतने वाले सभी जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध तत्काल FIR दर्ज की जाए और दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल स्वच्छ पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था, स्वास्थ्य शिविर और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ।
आम जनता पर असर
भोपाल के लाखों नागरिक प्रतिदिन बड़े तालाब और कोलार स्रोत से आपूर्ति होने वाले पानी पर निर्भर हैं। फीकल कॉलीफॉर्म बैक्टीरिया की उपस्थिति हैजा, टाइफाइड और पेचिश जैसी जलजनित बीमारियों का कारण बन सकती है, जो विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरनाक है। आलोचकों का कहना है कि जल परीक्षण और निगरानी की नियमित व्यवस्था न होना इस संकट की जड़ है।
आगे क्या होगा
अभी तक मध्य प्रदेश सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कांग्रेस के इस आक्रामक रुख के बाद राज्य की जल आपूर्ति एजेंसियों पर जवाब देने का दबाव बढ़ने की संभावना है। नागरिक अधिकार संगठन भी इस मुद्दे पर स्वतंत्र जाँच की माँग कर सकते हैं।