मध्य प्रदेश में 15% कम बारिश से किसान संकट में, जीतू पटवारी ने CM यादव से माँगी राहत
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के 55 में से 28 जिलों में सामान्य से 16% से 78% तक कम वर्षा दर्ज होने से खरीफ फसलों पर गंभीर संकट मँडरा रहा है। 18 जुलाई को कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर प्रभावित किसानों के लिए तत्काल राहत पैकेज की माँग की। राज्य में अब तक औसत से लगभग 15 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जिससे बुवाई रुक गई है और पहले से बोई गई फसलें सूखने लगी हैं।
मुख्य घटनाक्रम
अलीराजपुर, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मंडला, शहडोल, सागर, रायसेन, शिवपुरी और जबलपुर सहित दर्जनों जिलों में स्थिति लगातार बिगड़ रही है। रीवा संभाग में धान की केवल 41 प्रतिशत बुवाई हो सकी है, जबकि नर्मदापुरम में लगभग 38 प्रतिशत खेत अभी भी खाली हैं और वहाँ धान की मात्र 62 प्रतिशत बोवनी हुई है।
रायसेन में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है — 2.80 लाख हेक्टेयर के धान रोपाई के लक्ष्य के मुकाबले केवल 65 हजार हेक्टेयर में ही रोपाई हो सकी है। जबलपुर, सतना, मैहर और अलीराजपुर में धान के साथ-साथ मक्का, कपास और सोयाबीन की फसलें भी संकट में बताई जा रही हैं।
पटवारी की माँगें
पटवारी ने मुख्यमंत्री से माँग की है कि सभी प्रभावित जिलों में विशेष गिरदावरी सर्वे कराकर वास्तविक फसल क्षति का आकलन किया जाए। जिन क्षेत्रों में बुवाई प्रभावित हुई है, वहाँ किसानों को दोबारा बोवनी के लिए विशेष आर्थिक सहायता और निःशुल्क बीज उपलब्ध कराए जाएँ।
उन्होंने डीजल, बिजली और सिंचाई के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा करने की भी अपील की, ताकि किसान वैकल्पिक सिंचाई की व्यवस्था कर सकें। इसके अलावा, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत त्वरित सर्वे कराकर किसानों को शीघ्र मुआवजा दिलाने की माँग भी की गई है।
आम जनता और किसानों पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब खरीफ सीजन की बुवाई की समय-सीमा तेज़ी से बीत रही है। देरी से बुवाई का सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है, जिससे किसानों की आमदनी घटती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश देश के प्रमुख सोयाबीन और गेहूँ उत्पादक राज्यों में से एक है, और खरीफ सीजन में व्यवधान का असर राज्य की कृषि GDP पर भी पड़ सकता है।
सरकार की प्रतिक्रिया और आगे क्या
अभी तक मुख्यमंत्री मोहन यादव की ओर से पटवारी के पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और राहत उपायों की घोषणा पर सभी की निगाहें टिकी हैं। मानसून की प्रगति और आगामी हफ्तों में वर्षा की स्थिति यह तय करेगी कि कितने और जिले संकट की जद में आते हैं।