18 जुलाई 2026
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सोनम वांगचुक को अस्पताल भेजे जाने पर AAP का हमला, केजरीवाल बोले — संवाद छोड़ दमन चुना

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सोनम वांगचुक को अस्पताल भेजे जाने पर AAP का हमला, केजरीवाल बोले — संवाद छोड़ दमन चुना

सारांश

21 दिनों के आमरण अनशन के बाद सोनम वांगचुक को पुलिस जंतर-मंतर से अस्पताल ले गई — और AAP ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया। केजरीवाल का सवाल: क्या आज़ादी इसलिए मिली थी? 20 जुलाई का संसद मार्च अब इस आंदोलन की अगली बड़ी परीक्षा बनने वाला है।

मुख्य बातें

शिक्षाविद सोनम वांगचुक को 21 दिनों के आमरण अनशन के बाद 18 जुलाई को पुलिस द्वारा जंतर-मंतर से अस्पताल ले जाया गया।
AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि संवाद की जगह दमन चुना गया।
सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि 20 जुलाई के प्रस्तावित संसद मार्च को रोकने के लिए यह कार्रवाई की गई।
वांगचुक की माँगें थीं — शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक पर रोक और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता।
सौरभ भारद्वाज , आतिशी , मनीष सिसोदिया , गोपाल राय समेत AAP के कई नेताओं ने पुलिस कार्रवाई की निंदा की।

शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को 18 जुलाई को पुलिस द्वारा जंतर-मंतर से अस्पताल ले जाए जाने के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। वांगचुक पिछले 21 दिनों से शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक पर रोक और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की माँग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे थे। AAP नेताओं ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक विरोध को बलपूर्वक दबाने की कोशिश करार दिया।

केजरीवाल की तीखी प्रतिक्रिया

AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि सरकार को वांगचुक से बातचीत करनी चाहिए थी, लेकिन संवाद की जगह जबरदस्ती का रास्ता चुना गया। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में सुधार करने के बजाय सरकार युवाओं के आंदोलन को कुचलने में लगी है।

केजरीवाल ने कहा कि महात्मा गांधी ने भी लंबे समय तक उपवास किए थे, लेकिन उनके साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आज़ादी इसलिए मिली थी कि अपनी ही सरकार नागरिकों के साथ इस तरह का व्यवहार करे। उन्होंने यह भी कहा कि वांगचुक और उनके साथी अपने लिए नहीं, बल्कि देश के लाखों विद्यार्थियों के भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

संजय सिंह और सिसोदिया के आरोप

AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने दावा किया कि 21 दिनों के अनशन के दौरान सरकार ने वांगचुक से बातचीत की कोई पहल नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च से पहले आंदोलन को रोकने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की गई।

पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि देश के युवा केवल निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था और पेपर लीक पर रोक की माँग कर रहे हैं। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति की आवाज़ को सम्मान दिया जाना चाहिए, न कि पुलिस बल से दबाया जाना चाहिए।

दिल्ली नेताओं की अपील

दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ दिनों में आंदोलन को देशभर के युवाओं का समर्थन मिलने लगा था, जिससे सरकार घबरा गई और यह कदम उठाया। उन्होंने युवाओं से 20 जुलाई को प्रस्तावित शांतिपूर्ण संसद मार्च में शामिल होने की अपील की।

नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने इस कार्रवाई को 'शर्मनाक' बताया। गोपाल राय ने कहा कि देश अब जाग रहा है और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए लोग आगे आ रहे हैं। एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग और विधायक कुलदीप कुमार ने भी पुलिस कार्रवाई की निंदा की।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि वांगचुक जंतर-मंतर, नई दिल्ली में 21 दिनों से अनशन पर बैठे थे। उनकी प्रमुख माँगें थीं — शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक पर प्रभावी रोक और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता। यह ऐसे समय में आया है जब देश में पेपर लीक के कई मामले सामने आ चुके हैं और युवाओं में परीक्षा प्रणाली को लेकर गहरा असंतोष है।

आगे क्या होगा

AAP ने केंद्र सरकार से शिक्षा, परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर तत्काल संवाद शुरू करने की माँग की है। 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च पर अब सबकी नज़रें टिकी हैं — यह देखना बाकी है कि सरकार इस आंदोलन पर क्या रुख अपनाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह खुद एक बयान है। AAP की प्रतिक्रिया राजनीतिक रूप से स्वाभाविक है, लेकिन असली सवाल यह है कि पेपर लीक और परीक्षा सुधार पर ठोस नीतिगत जवाब कब आएगा — आरोप-प्रत्यारोप से युवाओं का भविष्य नहीं बदलेगा।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनम वांगचुक को अस्पताल क्यों ले जाया गया?
सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर 21 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे थे, जिसके बाद 18 जुलाई को पुलिस उन्हें अस्पताल ले गई। उनकी माँगें थीं — शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक पर रोक और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता।
अरविंद केजरीवाल ने इस कार्रवाई पर क्या कहा?
केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर कहा कि सरकार को वांगचुक से बातचीत करनी चाहिए थी, लेकिन संवाद की जगह जबरदस्ती का रास्ता चुना गया। उन्होंने महात्मा गांधी के उपवासों का हवाला देते हुए सरकार के रवैये पर सवाल उठाए।
AAP ने 20 जुलाई के संसद मार्च के बारे में क्या कहा?
AAP सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च से पहले आंदोलन को रोकने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की गई। दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने युवाओं से इस शांतिपूर्ण मार्च में शामिल होने की अपील की।
सोनम वांगचुक के अनशन की मुख्य माँगें क्या थीं?
वांगचुक की तीन प्रमुख माँगें थीं — शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक पर प्रभावी रोक, और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता। उनके समर्थन में देशभर के युवाओं ने आंदोलन में हिस्सा लिया।
AAP के किन-किन नेताओं ने इस कार्रवाई की निंदा की?
अरविंद केजरीवाल, संजय सिंह, मनीष सिसोदिया, सौरभ भारद्वाज, आतिशी, गोपाल राय, अंकुश नारंग और विधायक कुलदीप कुमार समेत AAP के कई नेताओं ने पुलिस कार्रवाई की निंदा की। सभी ने केंद्र सरकार से संवाद शुरू करने की माँग की।
राष्ट्र प्रेस
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