सोनम वांगचुक को धरनास्थल से हटाने पर कांग्रेस का हमला, वेणुगोपाल बोले — 'जनता सही समय पर सजा देगी'
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 18 जुलाई — जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल स्थानांतरित किए जाने पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाने के बजाय वांगचुक को उनके प्रदर्शन स्थल से हटाना चुना — जिसे उन्होंने 'निंदनीय' करार दिया।
वेणुगोपाल का आरोप
केसी वेणुगोपाल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किया: 'धर्मेंद्र प्रधान को उनके पद से हटाने के बजाय उन्होंने (केंद्र) सोनम वांगचुक को उनके प्रोटेस्ट की जगह से हटा दिया। सरकार को दया और इंसानियत दिखानी चाहिए थी, लेकिन असली फासीवादी तरीके से उन्होंने एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन को तोड़ना चुना, क्योंकि उन पर जनता का दबाव बढ़ रहा था। यह बहुत निंदनीय काम है, जिसकी जनता सही समय पर सजा देगी।' उन्होंने यह भी माँग की कि संसद का मानसून सत्र शुरू होने से पहले धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री पद से हटाया जाए।
पवन खेड़ा का संवैधानिक सवाल
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने एक्स पर लिखा कि संविधान हर नागरिक को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार देता है, लेकिन गृह मंत्रालय का रवैया इसी संवैधानिक अधिकार को निशाना बना रहा है। खेड़ा ने दिल्ली पुलिस के नए कमिश्नर पर भी सवाल उठाए, कहा कि दिल्ली पुलिस सीधे गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है और कल ही मंत्रालय ने नया पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया है। उन्होंने कहा, 'अगर आज की बर्बर कार्रवाई कमिश्नर साहब का पहला संदेश है, तो इससे साफ पता चलता है कि उनकी वफादारी संवैधानिक कर्तव्य से अधिक सत्ता के प्रति है।'
पूर्व की घटनाओं का हवाला
खेड़ा ने महिला पहलवानों के प्रदर्शन और पूर्व सैनिकों के साथ कथित बदसलूकी का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सरकार बार-बार दिखा चुकी है कि उसे न संविधान की इज्जत है और न लोकतांत्रिक मर्यादा की। उन्होंने कहा, 'इस सरकार के लिए शांतिपूर्ण विरोध किसी नागरिक का बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार नहीं, बल्कि एक 'कानून व्यवस्था' की समस्या है।'
कांग्रेस का आगे का रुख
केसी वेणुगोपाल ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस और पूरा विपक्ष अपना प्रदर्शन पूरे जोर-शोर से जारी रखेगा। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब संसद का मानसून सत्र निकट है और विपक्ष पहले से ही शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग को लेकर आक्रामक मुद्रा में है।