18 जुलाई 2026
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सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी पर शरद पवार का कड़ा बयान: 'आंदोलन नहीं रुकेगा, संसद सत्र में गूंजेगा मुद्दा'

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सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी पर शरद पवार का कड़ा बयान: 'आंदोलन नहीं रुकेगा, संसद सत्र में गूंजेगा मुद्दा'

सारांश

सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल भेजे जाने पर विपक्ष एकजुट हो गया है। शरद पवार ने साफ कहा — आंदोलन नहीं रुकेगा और संसद सत्र इसी मुद्दे से शुरू होगा। नाना पटोले ने NEET गड़बड़ी को नए घोटाले की संज्ञा दी, जबकि रोहित पवार ने सरकार के रवैये को 'लोकतंत्र के लिए खतरनाक' बताया।

मुख्य बातें

शरद पवार ने 18 जुलाई 2026 को बारामती में सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल भेजे जाने पर पुलिस कार्रवाई की निंदा की।
पवार ने कहा — 'यह आंदोलन नहीं रुकेगा; संसद का आगामी सत्र इसी मुद्दे के साथ शुरू होगा।' प्रदर्शनकारियों की मुख्य माँग केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा है, जिसे पवार ने 'पूरी तरह जायज' बताया।
नाना पटोले ने दावा किया कि 20 जुलाई के संसद मार्च को रोकने के लिए वांगचुक को हिरासत में लिया गया।
रोहित पवार ने सरकार को 'घबराई हुई' बताते हुए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग दोहराई।
NEET मार्कशीट में गड़बड़ियों को लेकर पटोले ने इसे 'नया घोटाला' करार दिया।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के अध्यक्ष शरद पवार ने 18 जुलाई 2026 को बारामती में मीडिया से बातचीत करते हुए एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल में भर्ती कराए जाने पर पुलिस की कार्रवाई की कड़ी निंदा की और स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी भी हाल में नहीं रुकेगा। पवार ने कहा कि संसद का आगामी सत्र इसी मुद्दे के साथ शुरू होगा।

पवार का बयान: 'गिरफ्तारी पहले से तय थी'

पवार ने कहा, 'हमें उम्मीद थी कि वांगचुक को पाँच या छह दिनों के भीतर गिरफ्तार कर लिया जाएगा और ठीक वैसा ही हुआ है।' उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने जब महसूस किया कि मामला उसके नियंत्रण से बाहर जा रहा है, तब गिरफ्तारी का रास्ता अपनाया। पवार ने कहा, 'आप 20 दिनों से दिल्ली में थे, लेकिन उनसे मिलने का समय नहीं निकाल सके।'

प्रदर्शनकारियों की मुख्य माँग: शिक्षा मंत्री का इस्तीफा

पवार के अनुसार, आंदोलन की केंद्रीय माँग केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा है। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी मंत्री की थी, किंतु वे इसे उचित सावधानी से नहीं संभाल पाए, जिससे हजारों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ। उन्होंने यह भी बताया कि कांग्रेस नेता, सांसद सुप्रिया सुले और अन्य दलों के प्रतिनिधि दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के समर्थन में पहुँचे थे।

नाना पटोले का आरोप: 20 तारीख के मार्च से डरी सरकार

महाराष्ट्र कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नाना पटोले ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों को 20 जुलाई को संसद तक मार्च करना था, इसीलिए सरकार ने पहले ही उन्हें हिरासत में ले लिया। पटोले ने आरोप लगाया कि हाल ही में जारी NEET के नतीजों की मार्कशीट में भारी गड़बड़ियाँ सामने आई हैं और यह 'एक नया घोटाला' है। उन्होंने कहा, 'यह सरकार साधारण परीक्षाएँ भी पारदर्शी तरीके से नहीं करवा सकती।'

रोहित पवार: 'घबराई सरकार ने की जबरदस्ती'

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने दावा किया कि जब यह स्पष्ट हो गया कि वांगचुक अपनी भूख हड़ताल नहीं छोड़ेंगे, तो 'घबराई हुई' केंद्र सरकार ने उन्हें जबरदस्ती विरोध स्थल से हटाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया। रोहित पवार ने सवाल उठाया, 'जबरदस्ती करने के बजाय सरकार निष्क्रिय शिक्षा मंत्री से इस्तीफा क्यों नहीं माँगती? लोकतंत्र के नजरिए से सरकार का यह अहंकार बेहद खतरनाक है।'

आगे क्या: संसद सत्र में गूंजेगा मुद्दा

शरद पवार ने साफ कहा कि वांगचुक की माँग 'पूरी तरह जायज' है और यह छात्रों के हित में उठाई जा रही है। विपक्ष के अनुसार, संसद का आगामी सत्र इसी मुद्दे पर केंद्रित रहेगा। यह आंदोलन अब केवल एक व्यक्ति की लड़ाई नहीं रहा — कई विपक्षी दलों के एकजुट होने से यह एक व्यापक राजनीतिक मोर्चे का रूप ले चुका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह एकजुटता संसद सत्र के बाद भी बनी रहेगी या महज़ बयानबाजी तक सिमट जाएगी। NEET विवाद को इस आंदोलन से जोड़ना विपक्ष की रणनीतिक चाल है — दोनों मुद्दे शिक्षा व्यवस्था की विफलता की ओर इशारा करते हैं, किंतु उनकी प्रकृति अलग है। केंद्र सरकार का 20 दिन तक प्रदर्शनकारियों से न मिलना और फिर अचानक हिरासत की कार्रवाई — यह संवाद की जगह दमन को प्राथमिकता देने का संकेत देता है, जो लोकतांत्रिक परंपराओं के लिहाज से चिंताजनक है।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनम वांगचुक को अस्पताल में क्यों भर्ती कराया गया?
विपक्षी नेताओं के अनुसार, वांगचुक की भूख हड़ताल जारी रहने पर केंद्र सरकार ने उन्हें जबरदस्ती विरोध स्थल से हटाकर अस्पताल में भर्ती कराया। रोहित पवार ने इसे 'घबराई हुई' सरकार की कार्रवाई बताया।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य माँग क्या है?
प्रदर्शनकारियों की मुख्य माँग केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा है। शरद पवार के अनुसार, शिक्षा व्यवस्था की विफलता के कारण हजारों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है और इसकी जवाबदेही मंत्री पर है।
शरद पवार ने इस आंदोलन पर क्या कहा?
शरद पवार ने स्पष्ट कहा कि वांगचुक की गिरफ्तारी के बावजूद यह आंदोलन नहीं रुकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि संसद का आगामी सत्र इसी मुद्दे के साथ शुरू होगा और विपक्ष एकजुट होकर इसे उठाएगा।
NEET विवाद का इस आंदोलन से क्या संबंध है?
नाना पटोले ने NEET मार्कशीट में गड़बड़ियों को इस आंदोलन से जोड़ते हुए इसे 'नया घोटाला' करार दिया। उनका कहना है कि युवाओं का गुस्सा वांगचुक के आंदोलन के जरिए सामने आ रहा था और सरकार पारदर्शी परीक्षाएँ भी नहीं करवा पा रही।
विपक्ष के कौन-से नेता इस आंदोलन के समर्थन में आए?
कांग्रेस नेता, सांसद सुप्रिया सुले और अन्य दलों के प्रतिनिधि दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के समर्थन में पहुँचे। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार और महाराष्ट्र कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नाना पटोले ने भी केंद्र सरकार पर तीखे हमले किए।
राष्ट्र प्रेस
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