नीट-यूजी 2026 पेपर लीक: शरद पवार बोले — 'पूरी परीक्षा व्यवस्था ध्वस्त', सीबीआई ने 7 गिरफ्तार किए
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार ने गुरुवार, 14 मई 2026 को कहा कि नीट-यूजी 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक की घटना यह उजागर करती है कि देश की पूरी परीक्षा प्रणाली बुरी तरह चरमरा चुकी है। उनका यह बयान उस दिन आया जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इस मामले में दो और आरोपियों को गिरफ्तार कर कुल गिरफ्तारियों की संख्या सात तक पहुँचा दी।
पवार का आरोप: सरकार ने नहीं उठाए एहतियाती कदम
मीडिया को संबोधित करते हुए पवार ने कहा कि हाल के वर्षों में पेपर लीक के कई मामले सामने आने के बावजूद केंद्र सरकार ने कोई ठोस एहतियाती उपाय नहीं किए। उन्होंने रेखांकित किया कि महाराष्ट्र, केरल, हरियाणा और कई अन्य राज्यों में इस राष्ट्रीय स्तर की मेडिकल प्रवेश परीक्षा में अनियमितताओं के मामले उजागर हुए हैं।
पवार ने कहा, 'इससे पता चलता है कि पूरी व्यवस्था कितनी बुरी तरह बिगड़ चुकी है, और अंततः इसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।' उन्होंने यह भी कहा कि देशभर से लाखों छात्र इस परीक्षा में बैठते हैं और उनका भविष्य इस पर निर्भर करता है।
छात्रों की अनिश्चितता सबसे बड़ी चिंता
पवार ने इस बात पर विशेष ज़ोर दिया कि छात्रों को सबसे ज़्यादा परेशान करने वाला पहलू अनिश्चितता है — उन्हें अभी तक नहीं पता कि रद्द की गई परीक्षा दोबारा कब आयोजित होगी। उन्होंने कहा कि इस स्थिति को लेकर छात्रों और उनके परिवारों में गहरी चिंता का माहौल है।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद नीट-यूजी 2026 परीक्षा को रद्द कर दिया था। यह ऐसे समय में आया है जब 2024 में भी नीट विवाद ने देशव्यापी बहस छेड़ी थी और सर्वोच्च न्यायालय तक मामला पहुँचा था।
सीबीआई की कार्रवाई: 14 स्थानों पर छापे, 7 गिरफ्तार
सीबीआई ने पिछले 24 घंटों में देशभर के 14 स्थानों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया, जिसके दौरान दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। नए गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अहिल्यानगर निवासी धनंजय लोखंडा और पुणे निवासी मनीषा वाघमारे के रूप में हुई है।
इससे पहले गिरफ्तार किए गए पाँच आरोपियों को दिल्ली की एक अदालत ने आगे की पूछताछ के लिए सात दिनों की सीबीआई हिरासत में भेज दिया है।
आगे क्या होगा
सीबीआई की जांच अभी जारी है और आरोपियों के नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है। लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों की नज़रें अब NTA की उस घोषणा पर टिकी हैं जिसमें पुनः परीक्षा की तारीख स्पष्ट की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक सुधार के बिना इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना मुश्किल होगा।