नीट-यूजी 2026 पेपर लीक: सीबीआई ने 24 घंटे में दो और गिरफ्तार, कुल आरोपी हुए 7

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नीट-यूजी 2026 पेपर लीक: सीबीआई ने 24 घंटे में दो और गिरफ्तार, कुल आरोपी हुए 7

सारांश

नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामला तेज़ी से फैलता दिख रहा है — सीबीआई ने महज़ तीन दिनों में 7 आरोपी गिरफ्तार किए, 14 स्थानों पर छापे मारे और तीन बड़े कानूनों के तहत मामला दर्ज किया। 2024 के नीट विवाद के बाद यह लगातार दूसरा झटका है देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा के लिए।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 14 मई 2026 को नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में दो और आरोपी — धनंजय लोखंडा (अहिल्यानगर) और मनीषा वाघमारे (पुणे) — को गिरफ्तार किया।
इस मामले में अब तक कुल 7 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं; 13 मई को जयपुर, गुरुग्राम और नासिक से 5 आरोपी पकड़े गए थे।
सीबीआई ने 12 मई 2026 को शिक्षा मंत्रालय की शिकायत पर मामला दर्ज किया; एफआईआर में BNS , भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम 2024 की धाराएँ शामिल।
पिछले 24 घंटों में देश भर के 14 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया; दस्तावेज़ और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ज़ब्त।
कई अन्य संदिग्धों से पूछताछ जारी; और गिरफ्तारियाँ संभव।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में 14 मई 2026 को दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिससे इस मामले में अब तक गिरफ्तार आरोपियों की कुल संख्या 7 हो गई है। पिछले 24 घंटों में देश भर के 14 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाने के बाद ये गिरफ्तारियाँ की गईं।

नवीनतम गिरफ्तारियाँ

ताज़ा गिरफ्तार दोनों आरोपी महाराष्ट्र से हैं। इनमें अहिल्यानगर निवासी धनंजय लोखंडा और पुणे निवासी मनीषा वाघमारे शामिल हैं। सीबीआई की विशेष टीमें 12 मई 2026 से लगातार अभियान चला रही हैं और कई अन्य संदिग्धों से पूछताछ जारी है।

पहले भी हो चुकी हैं 5 गिरफ्तारियाँ

13 मई 2026 को सीबीआई ने इस मामले में पाँच आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनमें नासिक (महाराष्ट्र) का शुभम खैरनार, जयपुर (राजस्थान) के मांगीलाल बिवाल, विकास बिवाल और दिनेश बिवाल, तथा गुरुग्राम (हरियाणा) का यश यादव शामिल हैं। छापेमारी के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज़ और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी ज़ब्त किए गए।

मामले की पृष्ठभूमि

सीबीआई ने यह मामला 12 मई 2026 को भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की लिखित शिकायत के आधार पर दर्ज किया था। प्राथमिकी (एफआईआर) में भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात के आरोप दर्ज किए गए हैं।

आम जनता और परीक्षार्थियों पर असर

नीट-यूजी देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा है, जिसमें लाखों छात्र हर वर्ष भाग लेते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब 2024 में हुए नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं। गौरतलब है कि यह लगातार दूसरे वर्ष है जब नीट-यूजी परीक्षा कथित अनियमितताओं के घेरे में आई है।

आगे की जांच

सीबीआई के अनुसार, मामले से जुड़े सभी सुरागों की गहन जांच जारी है और एजेंसी व्यापक, निष्पक्ष एवं पेशेवर तरीके से इस मामले की तह तक जाने के लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
14 मई 2026 तक इस मामले में कुल 7 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। 13 मई को 5 और 14 मई को 2 और गिरफ्तारियाँ हुईं।
सीबीआई ने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक का मामला कब और किसकी शिकायत पर दर्ज किया?
सीबीआई ने यह मामला 12 मई 2026 को भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की लिखित शिकायत के आधार पर दर्ज किया। एफआईआर में BNS, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 की धाराएँ शामिल हैं।
14 मई को गिरफ्तार दोनों नए आरोपी कौन हैं?
नवीनतम गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अहिल्यानगर (महाराष्ट्र) निवासी धनंजय लोखंडा और पुणे (महाराष्ट्र) निवासी मनीषा वाघमारे के रूप में हुई है। दोनों को देश भर में 14 स्थानों पर चले तलाशी अभियान के दौरान पकड़ा गया।
नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में किन राज्यों से आरोपी पकड़े गए हैं?
अब तक राजस्थान (जयपुर से 3), हरियाणा (गुरुग्राम से 1), महाराष्ट्र (नासिक से 1, पुणे से 1 और अहिल्यानगर से 1) — कुल तीन राज्यों से आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं।
क्या नीट-यूजी 2026 परीक्षा पहले भी विवादों में रही है?
हाँ, 2024 में भी नीट-यूजी परीक्षा बड़े पेपर लीक विवाद में घिरी थी, जिसके बाद परीक्षा प्रणाली में सुधार के वादे किए गए थे। 2026 में फिर से इस तरह का मामला सामने आना परीक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
राष्ट्र प्रेस
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