झारखंड कोषागार फर्जी निकासी: ईडी ने दर्ज की ECIR, रांची-हजारीबाग-बोकारो ट्रेजरी पर मनी लॉन्ड्रिंग जांच शुरू
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने झारखंड के सरकारी कोषागारों से वेतन मद में करोड़ों रुपये की फर्जी निकासी के मामले में एनफोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (ECIR) दर्ज कर मनी लॉन्ड्रिंग के कोण से जांच शुरू कर दी है। 14 मई 2025 को सामने आई इस जानकारी के अनुसार, यह मामला रांची, हजारीबाग और बोकारो ट्रेजरी से हुई संदिग्ध निकासी से जुड़ा है। इससे पहले इस घोटाले की जांच झारखंड सीआईडी और राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रही थी।
मामले की पृष्ठभूमि
यह पूरा प्रकरण तब उजागर हुआ जब प्रधान महालेखाकार चंद्रमौली सिंह ने ट्रेजरी ऑडिट के दौरान पुलिस विभाग के वेतन मद में गंभीर अनियमितताएँ पकड़ीं। शुरुआती जांच में बोकारो और हजारीबाग ट्रेजरी से संदिग्ध निकासी का खुलासा हुआ, जिसके बाद राज्य सरकार ने सभी जिलों में जांच के आदेश दिए।
इसके अतिरिक्त, उत्पाद विभाग के प्रधान सचिव अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया, जो फिलहाल बोकारो ट्रेजरी से संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा कर रही है। बाद में प्रधान महालेखाकार ने एक और रिपोर्ट भेजी, जिसमें झारखंड की 12 ट्रेजरी में गड़बड़ी की आशंका जताई गई — स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग भी इसकी जद में बताए गए हैं।
अब तक की गिरफ्तारियाँ
जांच एजेंसियों के अनुसार अब तक इस मामले में 12 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। रांची मामले में पशुपालन विभाग के अकाउंटेंट मुनींद्र कुमार और उसके सहयोगी संजीव कुमार को हिरासत में लिया गया है। जांच में सामने आया कि मुनींद्र कुमार ने अपना मूल वेतन ₹20 लाख दर्शाकर फर्जी निकासी की।
हजारीबाग मामले में सौरभ सिंह, रजनीश कुमार सिंह, शंभू कुमार, काजल कुमारी, खुशबू सिंह और धीरेंद्र सिंह गिरफ्तार किए गए हैं। बोकारो ट्रेजरी मामले में कौशल पांडेय, सतीश कुमार सिंह और काजल मंडल को जेल भेजा जा चुका है। देवघर ट्रेजरी से स्वास्थ्यकर्मियों के नाम पर हुई संदिग्ध निकासी के मामले में सबिता कुमारी की भी गिरफ्तारी हुई है।
ईडी की जांच का दायरा
जांच एजेंसियों को संदेह है कि सरकारी खजाने से फर्जी तरीके से निकाली गई रकम में से कुछ हिस्सा बाद में वापस भी किया गया — जो मनी लॉन्ड्रिंग के स्पष्ट संकेत हैं। सूत्रों के अनुसार, इस नेटवर्क में डीएसपी रैंक तक के अधिकारियों के नाम सामने आने की चर्चा है, हालाँकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
ईडी की ECIR उन्हीं एफआईआर के आधार पर दर्ज की गई है, जो पहले से दर्ज हैं। अब जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि निकाली गई रकम कहाँ-कहाँ गई, किन लोगों को इसका फायदा पहुँचा और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था।
आगे क्या होगा
ईडी की एंट्री के बाद कई अफसरों और कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ने की संभावना है, क्योंकि मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में संपत्ति कुर्की और कठोर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। वित्त विभाग ने सभी जिलों को विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। यह मामला झारखंड के सरकारी तंत्र में वित्तीय अनुशासन की गंभीर खामियों को उजागर करता है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।