झारखंड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने 14 नए अभियुक्तों को किया शामिल

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झारखंड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने 14 नए अभियुक्तों को किया शामिल

सारांश

झारखंड के ग्रामीण कार्य विभाग से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने 14 नए अभियुक्तों का नाम जोड़ा। यह मामला भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कार्रवाई है। जानिए पूरी जानकारी।

Key Takeaways

  • झारखंड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 14 नए अभियुक्त शामिल हुए।
  • ईडी ने 5वीं पूरक अभियोजन शिकायत दायर की।
  • भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से जुड़ा मामला है।
  • लगभग 90 करोड़ रुपए की अवैध कमाई का पता चला।
  • 52 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाए गए हैं।

रांची, 18 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड के ग्रामीण कार्य विभाग से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम, 2002 की धाराओं 44 और 45 के तहत विशेष पीएमएलए न्यायालय, रांची के समक्ष अपनी 5वीं पूरक अभियोजन शिकायत पेश की है। इस शिकायत में ग्रामीण कार्य विभाग (आरडब्‍ल्‍यूडी), ग्रामीण विकास विशेष क्षेत्र (आरडीएसजेड) और झारखंड राज्य ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण से संबंधित 14 इंजीनियरों और अधिकारियों को नए आरोपी के रूप में शामिल किया गया है।

इस मामले में कुल आरोपियों की संख्या अब बढ़कर 36 हो गई है। यह मामला भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से जुड़ा हुआ है, जो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 2018 के तहत दर्ज किया गया था।

ईडी की जांच से यह स्पष्ट हुआ है कि विभाग के भीतर एक सुनियोजित कमीशन रैकेट संचालित हो रहा था, जिसमें ठेकेदारों से टेंडर आवंटन के बदले कुल मूल्य का लगभग 3 प्रतिशत कमीशन वसूला जाता था, जो पदानुक्रम के अनुसार वितरित किया जाता था। इसमें से 1.35 प्रतिशत तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम को उनके निजी सचिव संजीव कुमार लाल के माध्यम से, 0.65 से 1 प्रतिशत विभागीय सचिव को और बाकी राशि मुख्य एवं अधीनस्थ इंजीनियरों को दी जाती थी। लगभग 3,048 करोड़ रुपए के टेंडर आवंटन के मुकाबले 90 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध कमाई (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) का पता चला है।

नए आरोपियों में मुख्य इंजीनियर (सेवानिवृत्त) सिंगराई टूटी, राजीव लोचन, सुरेंद्र कुमार, प्रमोद कुमार, कार्यपालक इंजीनियर संतोष कुमार, अजय कुमार, अजय तिर्की, राज कुमार टोप्पो, अशोक कुमार गुप्ता, सिद्धांत कुमार और अनिल कुमार (सेवानिवृत्त), सहायक इंजीनियर राम पुकार राम और रमेश ओझा (दोनों सेवानिवृत्त) तथा पूर्व अधीक्षण इंजीनियर/इंजीनियर-इन-चीफ उमेश कुमार (सेवानिवृत्त) शामिल हैं। इनकी जांच में अवैध कमीशन के संग्रह, एकत्रीकरण और वितरण में संलिप्तता पाई गई है।

जांच एजेंसी ने अब तक झारखंड, दिल्ली और बिहार में 52 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाए हैं, 9 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें आलमगीर आलम, संजीव कुमार लाल और जहांगीर आलम शामिल हैं। इस प्रक्रिया में तीन अस्थायी कुर्की आदेश जारी कर लगभग 44 करोड़ रुपए की संपत्तियां कुर्क की गई हैं, करीब 38 करोड़ रुपए नकद बरामद किए गए हैं और 8 लग्जरी वाहन जब्त किए गए हैं। इससे पहले, ईडी इस मामले में एक मुख्य अभियोजन शिकायत और चार पूरक शिकायतें भी दाखिल कर चुका है, जिन पर अदालत ने संज्ञान लिया है।

Point of View

NationPress
19/03/2026

Frequently Asked Questions

यह मनी लॉन्ड्रिंग मामला कब शुरू हुआ?
यह मामला 2018 में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा दर्ज किया गया था।
ईडी ने कितने अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है?
ईडी ने अब तक 9 लोगों को गिरफ्तार किया है।
क्या इस मामले में कोई संपत्ति कुर्क की गई है?
हाँ, लगभग 44 करोड़ रुपए की संपत्तियाँ कुर्क की गई हैं।
इस मामले में कितने अभियुक्त हैं?
इस मामले में कुल 36 अभियुक्त हैं।
ईडी की जांच से क्या जानकारी मिली है?
जांच में अवैध कमीशन रैकेट और 90 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध कमाई का पता चला है।
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