झारखंड में ईडी ने मनरेगा घोटाले में पांच आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की

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झारखंड में ईडी ने मनरेगा घोटाले में पांच आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की

सारांश

रांची में ईडी ने मनरेगा घोटाले से जुड़ी चौथी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की है। इसमें पांच आरोपी शामिल हैं, जो सरकारी फंड के गबन में शामिल थे। जानें पूरी कहानी।

मुख्य बातें

ईडी ने 5 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की।
लगभग 24 करोड़ रुपये का सरकारी धन गबन हुआ।
अवैध धन को बेनामी कंपनियों के माध्यम से निवेश किया गया।
पूजा सिंघल और अन्य अधिकारियों की संलिप्तता की पुष्टि हुई।
संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया गया।

रांची, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। ईडी ने झारखंड के खूंटी जिले में मनरेगा और अन्य विकास योजनाओं से सरकारी धन की हेरा-फेरी के मामले में पांच आरोपियों के खिलाफ रांची की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) में चौथी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की है। एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।

ईडी रांची जोनल ऑफिस ने अमिता झा, सिद्धार्थ सिंघल, राधेश्याम फायरवर्क्स एलएलपी, पवन कुमार सिंह और कमलेश सिंघल के खिलाफ पीएमएलए, 2002 के तहत चार्जशीट प्रस्तुत की है। ईडी ने बताया कि जांच में यह खुलासा हुआ है कि ये पांच आरोपी अवैध तरीके से धन अर्जित कर रहे थे।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि चार्जशीट दायर करते समय, ईडी ने रांची के मौजा बोरिया में स्थित 17 डेसिमल जमीन को जब्त करने की अनुमति देने की भी याचना की, जिसे 1.33 करोड़ रुपये की गलत तरीके से प्राप्त कमाई से खरीदा गया था।

झारखंड पुलिस और विजिलेंस ब्यूरो द्वारा सरकारी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज 16 एफआईआर के आधार पर ईडी ने जांच आरंभ की, जिसमें जूनियर इंजीनियर राम बिनोद प्रसाद सिन्हा भी शामिल थे।

जांच में यह पाया गया कि खूंटी जिले में विभिन्न विकास कार्यों के लिए लगभग 24 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई थी। ईडी ने कहा कि 2009-2011 के दौरान, इनमें से 18.06 करोड़ रुपये का फर्जी गबन और गलत कार्यों के माध्यम से किया गया।

ईडी ने बताया कि जांच में यह भी सामने आया कि खूंटी की पूर्व डिप्टी कमिश्नर पूजा सिंघल प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देने के बदले बाँटे गए प्रोजेक्ट फंड का पांच प्रतिशत कैश कमीशन लेती थीं और आरोपी अधिकारियों को विभागीय कार्रवाई से बचाती थीं।

ईडी ने कहा कि अपराध से अर्जित धन को बाद में बेनामी कंपनियों, पारिवारिक प्रॉक्सी और कॉर्पोरेट संरचना के एक बड़े नेटवर्क के माध्यम से पुनः निवेश किया गया। जांच के प्रारंभिक चरणों में, पूजा सिंघल, उनके पति अभिषेक झा, चार्टर्ड अकाउंटेंट और फाइनेंशियल मैनेजर सुमन कुमार और मेसर्स पल्स संजीवनी हेल्थकेयर समेत आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी।

जांच के दौरान, पूजा सिंघल और उनके सहयोगियों के 24 ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाए गए। 6 मई, 2022 को रांची में सह-आरोपी सीए सुमन कुमार के घर से 17.49 करोड़ रुपये का बिना हिसाब का कैश बरामद किया गया। एक सहयोगी के घर से कुल 1.82 करोड़ रुपये बरामद हुए, जिससे इस मामले में कुल जब्त किए गए कैश की राशि 19.31 करोड़ रुपये हो गई।

बयान में कहा गया है कि इसके अलावा, अपराध साबित करने वाले दस्तावेज़, वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक स्टेटमेंट, शेयर सर्टिफिकेट, कॉर्पोरेट रिकॉर्ड और आवश्यक सबूत वाले डिजिटल उपकरण जब्त किए गए।

ईडी ने कहा है कि उसने चार प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के माध्यम से आरोपियों की संपत्तियों को अस्थायी तौर पर अटैच किया है, जिसकी पुष्टि एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी (पीएमएलए) ने की है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह यह भी दर्शाता है कि सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग कितना गंभीर है। ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई आवश्यक है ताकि दोषियों को सजा मिले और जनता का विश्वास बहाल हो सके।
RashtraPress
17 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने क्यों चार्जशीट दायर की?
ईडी ने मनरेगा और विकास योजनाओं के तहत सरकारी फंड के गबन के मामले में चार्जशीट दायर की है।
कौन से आरोपी शामिल हैं?
इस मामले में अमिता झा, सिद्धार्थ सिंघल, राधेश्याम फायरवर्क्स एलएलपी, पवन कुमार सिंह और कमलेश सिंघल शामिल हैं।
क्या संपत्तियों को जब्त किया गया है?
हां, ईडी ने आरोपियों की संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया है।
जांच में क्या पाया गया है?
जांच में सामने आया है कि 2009-2011 के बीच 24 करोड़ रुपये का गबन हुआ था।
यह घोटाला किससे संबंधित है?
यह घोटाला मनरेगा और अन्य विकास योजनाओं के तहत सरकारी धन के दुरुपयोग से संबंधित है।
राष्ट्र प्रेस
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