डीडब्ल्यूएसडी घोटाला: 22.86 करोड़ का गबन, ईडी ने विशेष अदालत में चार्जशीट दायर की
सारांश
Key Takeaways
- डीडब्ल्यूएसडी घोटाला: 22.86 करोड़ का गबन।
- ईडी की कार्रवाई: चार्जशीट दायर की गई।
- संपत्ति जब्ती: 6.26 करोड़ की संपत्तियाँ जब्त करने की मांग।
- भ्रष्टाचार की जांच: सरकारी धन का दुरुपयोग।
- गबन के तरीके: फर्जी आईडी और कोड का उपयोग।
रांची, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रांची क्षेत्रीय कार्यालय ने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (डीडब्ल्यूएसडी), स्वर्णरेखा हेड वर्क्स डिवीजन, रांची से सरकारी धन के कथित दुरुपयोग से संबंधित मामले में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए विशेष न्यायालय (पीएमएलए), रांची के समक्ष अभियोजन शिकायत प्रस्तुत की है।
यह शिकायत संतोष कुमार, उनकी पत्नी ललिता सिन्हा और उनकी शेल कंपनी रॉकड्रिल कंस्ट्रक्शंस (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ दायर की गई है। ईडी ने इस मामले में लगभग 6.26 करोड़ रुपए की संपत्तियों को जब्त करने की मांग भी की है।
ईडी की जांच झारखंड पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर और इसके बाद दाखिल चार्जशीट पर आधारित है। जांच में पता चला कि संतोष कुमार, जो कैशियर-सह-उच्च श्रेणी लिपिक के पद पर कार्यरत थे, ने अपनी आधिकारिक स्थिति का गलत इस्तेमाल करते हुए सरकारी खजाने से लगभग 22.86 करोड़ रुपए की हेराफेरी की।
एजेंसी का कहना है कि प्रारंभिक पुलिस जांच में गबन की राशि कम आंकी गई थी, लेकिन ईडी की गहन जांच में इस धोखाधड़ी का असली पैमाना सामने आया। आरोप है कि उन्होंने नकली भुगतानकर्ता आईडी और निष्क्रिय डीडीओ कोड में छेड़छाड़ कर सरकारी धन को अन्य खातों में स्थानांतरित किया।
जांच में यह भी सामने आया कि गबन की गई राशि को वैध दिखाने के लिए विभिन्न महंगी संपत्तियों और निवेश के माध्यम से ‘लॉन्ड्रिंग’ किया गया। इसमें रांची के रातू क्षेत्र में 6.81 डेसिमल जमीन की खरीद शामिल है, जिसे उनकी बहन ममता सिन्हा के नाम पर रजिस्टर्ड कराया गया। इसके अतिरिक्त, उनकी पत्नी के नाम पर टोयोटा इनोवा क्रिस्टा कार की बुकिंग भी की गई।
ईडी के अनुसार, आरोपी ने 1.78 करोड़ रुपए से अधिक के आभूषण खरीदे, 25 से अधिक म्यूचुअल फंड योजनाओं में निवेश किया और कई फिक्स्ड डिपॉजिट भी किए।
छापेमारी के दौरान, ईडी ने 26 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया, जिसमें 55.08 लाख रुपए की बेहिसाब नकदी बरामद की गई। इसके साथ ही, विभाग के भीतर कथित भ्रष्टाचार से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज, लेखा-बही (लेजर) और अन्य साक्ष्य भी जब्त किए गए। ईडी इससे पहले ही लगभग 2.18 करोड़ रुपए की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर चुकी है, जिसकी पुष्टि निर्णायक प्राधिकरण (पीएमएलए) द्वारा की जा चुकी है।