डॉलर इंडेक्स 99.29 पर चढ़ा, MCX पर सोना ₹1,58,344 और चांदी ₹2,67,225 पर फिसली
सारांश
मुख्य बातें
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर बुधवार, 20 मई 2026 को सोने और चांदी दोनों कीमती धातुओं में एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। डॉलर इंडेक्स के 99.29 के स्तर पर पहुँचने से निवेशकों की धारणा कमज़ोर पड़ी और घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय — दोनों बाज़ारों में बिकवाली का दबाव बना।
MCX पर सोने का हाल
5 जून 2026 के सोने के वायदा अनुबंध ने पिछली क्लोजिंग ₹1,59,080 के मुकाबले ₹106 की मामूली गिरावट के साथ ₹1,58,974 पर कारोबार शुरू किया। शुरुआती घंटों में ही दबाव बढ़ा और सुबह 10 बजे IST तक सोना ₹736 (0.46%) की कमज़ोरी के साथ ₹1,58,344 पर आ गया।
दिन के कारोबार में सोने ने ₹1,57,959 का न्यूनतम और ₹1,60,378 का उच्चतम स्तर छुआ — यानी इंट्राडे रेंज करीब ₹2,419 रही, जो बाज़ार की अनिश्चितता को दर्शाती है।
चांदी में भी तीखी गिरावट
3 जुलाई 2026 के चांदी के वायदा अनुबंध ने पिछली क्लोजिंग ₹2,70,119 के मुकाबले ₹2,889 (1.06%) की कमज़ोरी के साथ ₹2,67,230 पर खुला। रिपोर्ट लिखे जाने तक चांदी ₹2,894 (1.07%) गिरकर ₹2,67,225 पर थी।
चांदी ने दिन में ₹2,66,850 का निचला और ₹2,68,464 का ऊपरी स्तर दर्ज किया।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भी दबाव
वैश्विक स्तर पर भी धातुएँ दबाव में रहीं। अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में सोना 0.49% की गिरावट के साथ $4,462 प्रति औंस और चांदी 0.17% की कमज़ोरी के साथ $73.868 प्रति औंस पर थी। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक निवेशक अमेरिकी आर्थिक संकेतों पर नज़र बनाए हुए हैं।
गिरावट की वजह: डॉलर इंडेक्स में उछाल
डॉलर इंडेक्स अमेरिकी डॉलर की छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं — यूरो, जापानी येन, पाउंड स्टर्लिंग, कैनेडियन डॉलर, स्वीडिश क्रोना और स्विस फ्रैंक — के मुकाबले स्थिति मापता है। इसके 99.29 पर पहुँचने से डॉलर-आधारित कमोडिटी महँगी हो जाती हैं, जिससे माँग घटती है और कीमतें गिरती हैं। गौरतलब है कि डॉलर और सोने के बीच ऐतिहासिक रूप से विपरीत संबंध रहा है।
शेयर बाज़ार पर भी असर
घरेलू इक्विटी बाज़ार भी इस दिन दबाव में रहा। BSE सेंसेक्स और NSE निफ्टी दोनों में आधा प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ कारोबार हुआ। गिरावट का नेतृत्व रियल्टी और बैंकिंग शेयरों ने किया। बाज़ार विश्लेषकों के अनुसार, डॉलर की मज़बूती और वैश्विक अनिश्चितता ने एक साथ कई परिसंपत्ति वर्गों पर असर डाला।
आगे की दिशा काफी हद तक अमेरिकी आर्थिक आँकड़ों और डॉलर इंडेक्स की चाल पर निर्भर करेगी।