MCX पर चांदी ₹2,72,650 पर, सोना ₹1,58,680 पर; वैश्विक गिरावट के बावजूद घरेलू बाज़ार में तेजी
सारांश
मुख्य बातें
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोमवार, 18 मई 2026 को सोने और चांदी दोनों ने शुरुआती गिरावट को पलटते हुए हरे निशान में कारोबार किया। सोने का 5 जून 2026 का वायदा अनुबंध ₹1,58,680 पर पहुँचा, जबकि चांदी का 3 जुलाई 2026 का अनुबंध ₹2,72,650 पर कारोबार कर रहा था — यह वैश्विक दबाव के बावजूद घरेलू बाज़ार की मज़बूत माँग का संकेत है।
सोने का कारोबार: गिरावट से उबरकर तेजी
सोने का 5 जून 2026 का वायदा अनुबंध पिछली क्लोजिंग ₹1,58,547 के मुकाबले ₹471 (0.29%) की कमज़ोरी के साथ ₹1,58,076 पर खुला। हालाँकि, शुरुआती कारोबार में ही खरीदारी लौटी और सुबह 9:15 बजे तक यह ₹133 (0.08%) की बढ़त के साथ ₹1,58,680 पर पहुँच गया।
दिन के कारोबार में सोने ने ₹1,57,547 का निम्नतम और ₹1,58,547 का उच्चतम स्तर दर्ज किया। यह उतार-चढ़ाव वैश्विक संकेतों और घरेलू माँग के बीच की खींचतान को दर्शाता है।
चांदी का कारोबार: ₹2.73 लाख के पार
चांदी का 3 जुलाई 2026 का वायदा अनुबंध पिछली क्लोजिंग ₹2,71,886 के मुकाबले ₹4,486 (1.64%) की भारी कमज़ोरी के साथ ₹2,67,400 पर खुला था। लेकिन शुरुआती सत्र में ही इसमें पलटाव देखा गया और खबर लिखे जाने तक यह ₹764 (0.28%) की तेजी के साथ ₹2,72,650 पर था।
दिन के कारोबार में चांदी ने ₹2,64,949 का निम्नतम और ₹2,74,145 का उच्चतम स्तर छुआ। उच्चतम स्तर ₹2.74 लाख के पार जाना दर्शाता है कि निवेशकों की रुचि बनी हुई है।
वैश्विक बाज़ार में दबाव
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तस्वीर अलग रही। कॉमेक्स पर सोना 0.39% की कमज़ोरी के साथ $4,543 प्रति औंस और चांदी 2.28% की गिरावट के साथ $75.778 प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी।
जानकारों के अनुसार, इस वैश्विक गिरावट की प्रमुख वजह अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड का 4.65% तक पहुँचना है। ऊँची यील्ड से डॉलर मज़बूत होता है, जिसका सीधा दबाव सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं की कीमतों पर पड़ता है।
एक साल में शानदार रिटर्न
यह ऐसे समय में आया है जब बीते एक वर्ष में दोनों धातुओं ने निवेशकों को उल्लेखनीय रिटर्न दिया है। आँकड़ों के अनुसार, डॉलर में सोने ने 40% से अधिक और चांदी ने 131% से ज़्यादा का रिटर्न दिया है — जो इन्हें पिछले एक साल के बेहतरीन परिसंपत्ति वर्गों में शुमार करता है।
गौरतलब है कि घरेलू बाज़ार में वैश्विक गिरावट का पूरा असर नहीं दिखना, रुपये की चाल और स्थानीय माँग दोनों पर निर्भर करता है। आगे के सत्रों में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स की दिशा कीमती धातुओं की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।