बराकाह परमाणु संयंत्र पर ड्रोन हमले पर भारत की कड़ी चिंता, संयम और कूटनीति की अपील
सारांश
मुख्य बातें
भारत के विदेश मंत्रालय ने 18 मई 2026 को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर कथित ड्रोन हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे 'खतरनाक तनाव वृद्धि' करार दिया। मंत्रालय ने सभी पक्षों से तत्काल संयम बरतने और कूटनीतिक संवाद की राह पर लौटने की अपील की।
भारत का आधिकारिक बयान
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में स्पष्ट कहा, 'भारत यूएई के बराकाह परमाणु संयंत्र को निशाना बनाकर किए गए हमले को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करता है। इस तरह की कार्रवाइयां अस्वीकार्य हैं और यह खतरनाक तनाव वृद्धि को दर्शाती हैं। हम सभी पक्षों से तत्काल संयम बरतने तथा संवाद और कूटनीति की राह पर लौटने की अपील करते हैं।' यह बयान ऐसे समय आया है जब खाड़ी क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है।
हमले का घटनाक्रम
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, रविवार को यूएई के अल धफरा क्षेत्र में स्थित बराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र परिसर में ड्रोन हमले के बाद आग लग गई। अबू धाबी मीडिया कार्यालय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पुष्टि की कि 'संयंत्र की आंतरिक सीमा के बाहर एक विद्युत जनरेटर में लगी आग ड्रोन हमले के कारण हुई थी।' बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ और रेडियोलॉजिकल सुरक्षा स्तरों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।
परमाणु सुरक्षा की स्थिति
फेडरल अथॉरिटी फॉर न्यूक्लियर रेगुलेशन (FANR) ने पुष्टि की कि आग से संयंत्र की सुरक्षा या उसके आवश्यक सिस्टम पर कोई असर नहीं पड़ा और सभी इकाइयां सामान्य रूप से काम कर रही हैं। अधिकारियों ने नागरिकों से केवल आधिकारिक स्रोतों से जानकारी प्राप्त करने और अफवाहों से बचने की अपील की। हमले की उत्पत्ति के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
बराकाह संयंत्र का महत्व
बराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र अरब दुनिया का पहला परिचालन परमाणु ऊर्जा संयंत्र है और यूएई की ऊर्जा अवसंरचना की रीढ़ माना जाता है। गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में यूएई ने देश के कई क्षेत्रों की ओर 'ईरान से दागी गई' कई मिसाइलों और ड्रोन की जानकारी दी थी, हालांकि ताज़ा हमले की उत्पत्ति के बारे में बयान में कोई संकेत नहीं दिया गया। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के तहत परमाणु सुविधाओं को अत्यंत संवेदनशील माना जाता है और इन पर किसी भी खतरे से वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
क्षेत्रीय और वैश्विक संदर्भ
यह घटना ऐसे समय हुई है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है और महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं पर हमलों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय गहरी चिंता में है। भारत की प्रतिक्रिया उसकी उस परंपरागत कूटनीतिक नीति के अनुरूप है जिसमें वह संघर्ष के बजाय संवाद को प्राथमिकता देता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) और अन्य वैश्विक निकाय इस घटना पर क्या रुख अपनाते हैं।