बराकाह परमाणु संयंत्र पर ड्रोन हमला, यूएई बोला — विकिरण सामान्य; आईएईए ने जताई गहरी चिंता
सारांश
मुख्य बातें
बराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर 17 मई 2026 को ड्रोन हमला हुआ, जिसमें संयंत्र की आंतरिक सुरक्षा सीमा के बाहर स्थित एक इलेक्ट्रिकल जनरेटर को निशाना बनाया गया और आग लग गई। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) को सूचित किया कि विकिरण स्तर सामान्य बने हुए हैं और आम जनता को कोई खतरा नहीं है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब परमाणु प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर वैश्विक चिंताएँ पहले से ही बढ़ी हुई हैं।
घटनाक्रम: क्या हुआ बराकाह में
अबू धाबी मीडिया कार्यालय के अनुसार, हमला अल धफरा क्षेत्र में स्थित बराकाह संयंत्र की सुरक्षा परिधि के बाहर हुआ। ड्रोन ने एक इलेक्ट्रिकल जनरेटर को क्षतिग्रस्त किया, जिससे आग भड़क उठी। संयंत्र अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस हादसे में कोई भी व्यक्ति घायल नहीं हुआ।
फिलहाल संयंत्र की यूनिट-3 को आपातकालीन डीजल जनरेटरों के ज़रिए बिजली आपूर्ति दी जा रही है। शेष इकाइयाँ सामान्य रूप से परिचालन में हैं।
नियामक की पुष्टि: सुरक्षा प्रणालियाँ अप्रभावित
फेडेरल अथॉरिटी फॉर न्यूक्लियर रेगुलेशन (एफएएनआर) ने पुष्टि की है कि आग का प्रभाव परमाणु संयंत्र की मूल सुरक्षा प्रणालियों या उनकी कार्यक्षमता पर नहीं पड़ा है। रेडियोलॉजिकल सेफ्टी स्तर सामान्य दर्ज किए गए और किसी प्रकार का विकिरण रिसाव नहीं हुआ।
आईएईए की प्रतिक्रिया और महानिदेशक की चेतावनी
आईएईए ने कहा कि वह स्थिति पर लगातार नज़र बनाए हुए है और यूएई अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क में है। एजेंसी ने आवश्यकता पड़ने पर सहायता उपलब्ध कराने की तैयारी भी जताई।
आईएईए के महानिदेशक राफेल मारियानो ग्रॉसी ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि परमाणु सुरक्षा को खतरे में डालने वाली सैन्य गतिविधियाँ 'अस्वीकार्य' हैं। उन्होंने परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के आसपास अधिकतम सैन्य संयम बरतने की अपील दोहराई, ताकि किसी संभावित परमाणु दुर्घटना के जोखिम से बचा जा सके।
बराकाह संयंत्र का महत्व
बराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र अरब जगत का पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र है और यूएई की बिजली आवश्यकताओं का एक बड़ा हिस्सा पूरा करता है। गौरतलब है कि यह संयंत्र देश की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का केंद्रबिंदु है।
जिम्मेदारी और आगे की जाँच
अभी तक किसी संगठन या देश ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। अधिकारियों के अनुसार जाँच जारी है। यह घटना परमाणु प्रतिष्ठानों की भौतिक सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में नई बहस छेड़ सकती है।