भारत के 14 लाख STEM ग्रेजुएट सबसे बड़ी ताकत: पीयूष गोयल ने NID गांधीनगर में किया इनोवेशन सेंटर का उद्घाटन

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भारत के 14 लाख STEM ग्रेजुएट सबसे बड़ी ताकत: पीयूष गोयल ने NID गांधीनगर में किया इनोवेशन सेंटर का उद्घाटन

सारांश

गांधीनगर के NID में इनोवेशन सेंटर के उद्घाटन पर पीयूष गोयल का संदेश साफ था — भारत की असली ताकत उसके 14 लाख सालाना STEM स्नातक हैं। 1,700 से अधिक वैश्विक कंपनियों का GCC नेटवर्क और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम इसी प्रतिभा पर टिका है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने NID गांधीनगर में इनोवेशन और इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन किया।
भारत प्रतिवर्ष लगभग 14 लाख STEM ग्रेजुएट तैयार करता है, जो वैश्विक निवेशकों के लिए प्रमुख आकर्षण है।
भारत में 1,700 से 1,800 वैश्विक कंपनियाँ ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) के ज़रिए इनोवेशन कार्य कर रही हैं।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है।
गोयल ने छात्रों से AI, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग और स्पेस टेक पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह , CM भूपेंद्र पटेल और डिप्टी CM हर्ष संघवी भी उपस्थित रहे।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 18 मई 2025 को गांधीनगर स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिज़ाइन (NID) में इनोवेशन और इनक्यूबेशन सेंटर के उद्घाटन अवसर पर कहा कि भारत में प्रतिवर्ष तैयार होने वाले लगभग 14 लाख STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स) स्नातक देश की तकनीकी, विनिर्माण और नवाचार क्षमता की सबसे बड़ी शक्ति बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह युवा प्रतिभा-पूल वैश्विक निवेशकों को भारत की ओर खींचने में निर्णायक भूमिका निभा रहा है।

मुख्य घोषणा और संदर्भ

गोयल ने कार्यक्रम में उपस्थित छात्रों और उद्योग प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा, 'जब मैं विदेशी मंत्रियों को बताता हूं कि भारत हर साल करीब 14 लाख STEM ग्रेजुएट तैयार करता है, तो वे हैरान रह जाते हैं। युवाओं की यही विशाल शक्ति भारत की सबसे बड़ी ताकत है।' उनके अनुसार, भारत के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की बढ़ती संख्या उभरते वैश्विक उद्योगों में देश की स्थिति को और सुदृढ़ कर रही है।

यह कार्यक्रम ऐसे समय में आयोजित हुआ जब भारत सरकार 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उच्च-कौशल रोज़गार और गहन प्रौद्योगिकी पर विशेष बल दे रही है। गौरतलब है कि भारत पहले ही दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है।

NID इनोवेशन सेंटर की भूमिका

गोयल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर भी लिखा कि NID जैसे संस्थान देश के युवाओं को 'जॉब सीकर्स' नहीं बल्कि 'जॉब क्रिएटर' बनाने में अहम योगदान दे रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यह नया इनक्यूबेशन सेंटर भारत की रचनात्मक प्रतिभाओं को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाएगा और 'भारत में डिज़ाइन किया गया' टैगलाइन को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। उनके अनुसार डिजाइन, इनोवेशन और उद्यमिता विकसित भारत की नई पहचान बनने जा रहे हैं।

इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी भी उपस्थित रहे।

डिजिटल अवसर और स्टार्टअप विस्तार

मंत्री ने रेखांकित किया कि 5G नेटवर्क के तेज विस्तार और सस्ती इंटरनेट सेवाओं के चलते डिजिटल अवसर अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहे — छोटे शहरों और कस्बों के युवा भी स्टार्टअप खड़े कर वैश्विक कारोबार चला रहे हैं। उन्होंने कहा, 'आज कई युवा इनोवेटर्स को अपने आइडिया को आगे बढ़ाने के लिए केवल लैपटॉप, डिजिटल कनेक्टिविटी और सही मार्गदर्शन की ज़रूरत होती है।'

उन्होंने यह भी बताया कि भारत में लगभग 1,700 से 1,800 वैश्विक कंपनियां अपने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) के ज़रिए इनोवेशन और डिजाइन कार्य संचालित कर रही हैं — जिसके पीछे भारत की कुशल कार्यशक्ति, सस्ती डिजिटल कनेक्टिविटी और मज़बूत बुनियादी ढाँचा प्रमुख कारण हैं।

भविष्य की अर्थव्यवस्था और छात्रों से आह्वान

गोयल ने स्पष्ट किया कि भविष्य की अर्थव्यवस्था सस्ते श्रम पर नहीं, बल्कि ऑटोमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्किल्ड मैनपावर, क्रिएटिव डिजाइन और इनोवेशन पर टिकी होगी। उन्होंने छात्रों से सेमीकंडक्टर, AI, मशीन लर्निंग, क्वांटम कंप्यूटिंग, डीप टेक और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया।

साथ ही उन्होंने शिक्षा संस्थानों और उद्योग जगत के बीच गहरे सहयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि संस्थानों को छात्रों के रचनात्मक विचारों को व्यावसायिक उत्पाद और उद्यमिता में बदलने में सक्रिय भूमिका निभानी होगी। NID गांधीनगर का यह नया इनक्यूबेशन सेंटर उसी दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इनमें से कितने 'डीप टेक' में वास्तविक शोध कर रहे हैं और कितने महज़ आउटसोर्सिंग की सेवा-अर्थव्यवस्था को पोषित कर रहे हैं। GCC की संख्या बढ़ना भारत की कौशल-क्षमता का प्रमाण है, पर यह मॉडल मूल्य-सृजन की बजाय मूल्य-वितरण पर अधिक टिका है। जब तक भारतीय संस्थान वैश्विक पेटेंट और मौलिक अनुसंधान में उल्लेखनीय हिस्सेदारी नहीं बनाते, 'जॉब क्रिएटर' का नारा केवल आकांक्षा बना रहेगा। NID जैसे संस्थानों में इनक्यूबेशन सेंटर सही दिशा में कदम हैं — पर इनकी सफलता का मापदंड उद्घाटन समारोह नहीं, बल्कि अगले पाँच वर्षों में बाज़ार में उतरे उत्पाद और दर्ज पेटेंट होंगे।
RashtraPress
17 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीयूष गोयल ने 14 लाख STEM ग्रेजुएट के बारे में क्या कहा?
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत हर साल लगभग 14 लाख STEM स्नातक तैयार करता है, जो देश की तकनीकी और विनिर्माण क्षमता की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने बताया कि यह आँकड़ा विदेशी मंत्रियों को भी चौंका देता है और वैश्विक निवेश आकर्षित करने में अहम भूमिका निभाता है।
NID गांधीनगर इनोवेशन और इनक्यूबेशन सेंटर क्या है?
यह गांधीनगर स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिज़ाइन (NID) में स्थापित नया केंद्र है, जिसका उद्घाटन 17 मई 2025 को हुआ। इसका उद्देश्य छात्रों के रचनात्मक विचारों को व्यावसायिक उत्पादों और स्टार्टअप में बदलने में मदद करना है।
भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) की क्या स्थिति है?
पीयूष गोयल के अनुसार, भारत में अभी लगभग 1,700 से 1,800 वैश्विक कंपनियाँ अपने GCC के ज़रिए इनोवेशन और डिजाइन कार्य संचालित कर रही हैं। इसके पीछे भारत की कुशल कार्यशक्ति, सस्ती डिजिटल कनेक्टिविटी और मज़बूत बुनियादी ढाँचा प्रमुख कारण हैं।
गोयल ने भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए छात्रों को क्या सलाह दी?
उन्होंने छात्रों से सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, क्वांटम कंप्यूटिंग, डीप टेक और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। उनका कहना था कि भविष्य की अर्थव्यवस्था सस्ते श्रम पर नहीं, बल्कि ऑटोमेशन, AI और क्रिएटिव इनोवेशन पर आधारित होगी।
इस कार्यक्रम में कौन-कौन से वरिष्ठ नेता उपस्थित थे?
NID गांधीनगर के इनोवेशन सेंटर उद्घाटन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी भी मौजूद रहे।
राष्ट्र प्रेस
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