भारत के एफटीए से 38 देशों तक पहुंच, वैश्विक जीडीपी के 70% बाज़ार में भारतीय निर्यातकों की एंट्री: पीयूष गोयल

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भारत के एफटीए से 38 देशों तक पहुंच, वैश्विक जीडीपी के 70% बाज़ार में भारतीय निर्यातकों की एंट्री: पीयूष गोयल

सारांश

भारत के एफटीए अब महज़ व्यापार समझौते नहीं — वे वैश्विक जीडीपी के 70% तक भारतीय निर्यातकों का सीधा रास्ता हैं। पीयूष गोयल ने गांधीनगर में स्पष्ट किया कि 38 देशों के साथ ये समझौते 'मजबूत अर्थव्यवस्थाओं' को लक्ष्य करते हैं, न प्रतिस्पर्धियों को — और यही भारत की असली रणनीतिक चाल है।

मुख्य बातें

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 17 मई 2026 को NID गांधीनगर में कहा कि भारत के एफटीए वैश्विक जीडीपी के 70 प्रतिशत को कवर करते हैं।
भारत ने 38 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं, जिनमें वैश्विक व्यापार का करीब दो-तिहाई हिस्सा शामिल है।
भारत में 1,700 से 1,800 वैश्विक कंपनियां पहले से नवाचार और डिजाइन केंद्र संचालित कर रही हैं।
भारत ने दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित किया है।
गोयल ने छात्रों से सेमीकंडक्टर, AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और डीप टेक पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया।

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने रविवार, 17 मई 2026 को गांधीनगर में कहा कि भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) ने देश के निर्यातकों को उन बाज़ारों तक प्राथमिकता के आधार पर पहुंच दिला दी है, जो वैश्विक जीडीपी के करीब 70 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (NID), गांधीनगर में इनोवेशन एवं इन्क्यूबेशन सेंटर के उद्घाटन अवसर पर बोलते हुए उन्होंने इन समझौतों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति का अहम हिस्सा बताया।

एफटीए का दायरा और रणनीतिक महत्व

गोयल ने कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने 38 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं, जो वैश्विक जीडीपी के लगभग 70 प्रतिशत को कवर करते हैं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि ये समझौते उन देशों के साथ किए गए हैं जो 'मज़बूत और विकसित अर्थव्यवस्थाएं' हैं — न कि उन देशों के साथ जो सीधे भारत से प्रतिस्पर्धा करते हैं। गोयल के अनुसार, इन समझौतों में वैश्विक व्यापार का करीब दो-तिहाई हिस्सा शामिल है, जिससे भारतीय कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय विस्तार के रास्ते खुलेंगे।

डिजाइन, इनोवेशन और वैश्विक बाज़ार

मंत्री ने छात्रों और स्टार्टअप्स को संबोधित करते हुए कहा कि यदि भारत उत्पाद डिजाइन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और इनोवेटिव उत्पादों में सुधार करे, तो यह देश की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि लक्ष्य केवल घरेलू बाज़ार नहीं, बल्कि वैश्विक बाज़ारों पर कब्जा करना होना चाहिए। इन्क्यूबेशन केंद्रों की भूमिका पर बोलते हुए गोयल ने कहा कि इन्हें विचारों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों के लिए व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य उत्पादों में बदलने में मदद करनी चाहिए।

डिजिटल बुनियादी ढांचा और वैश्विक निवेश

गोयल ने बताया कि भारत में किफायती इंटरनेट और तेज़ी से विस्तार हो रहे 5जी नेटवर्क ने देश को नवाचार और प्रौद्योगिकी निवेश के लिए एक प्रमुख वैश्विक गंतव्य बना दिया है। उनके अनुसार, पहले से ही 1,700 से 1,800 विश्व-प्रसिद्ध कंपनियां भारत में नवाचार और डिजाइन केंद्र संचालित कर रही हैं। कुशल कार्यबल, डिजिटल बुनियादी ढांचे और निवेशकों के भरोसे के चलते वैश्विक कंपनियां तेज़ी से भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) स्थापित कर रही हैं।

भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता और स्टार्टअप इकोसिस्टम

मंत्री ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बन चुका है और उसने वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित किया है। उन्होंने यह भी कहा, 'दुनिया भारत पर भरोसा करती है क्योंकि भारत का मूल स्वभाव ईमानदारी है।' आगे की प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए उन्होंने उत्पादकता, टिकाऊ विनिर्माण, उच्च गुणवत्ता और नवाचार की गति को निर्णायक बताया।

उभरते क्षेत्रों पर फोकस

गोयल ने छात्रों से सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग, मशीन लर्निंग और डीप टेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। यह आह्वान ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इन समझौतों का भारतीय एमएसएमई और छोटे निर्यातकों को व्यावहारिक लाभ कितना मिल रहा है। ऐतिहासिक रूप से देखें तो भारत के एफटीए — विशेषकर आसियान के साथ — घरेलू उद्योग के लिए उतने फायदेमंद साबित नहीं हुए जितने दावे किए गए थे, और आयात-निर्यात असंतुलन कई क्षेत्रों में बना रहा। नए समझौतों की रणनीति 'विकसित अर्थव्यवस्थाओं' को प्राथमिकता देने की है — यह दिशा सही लगती है, पर बिना कठोर मूल्यांकन तंत्र के ये भी कागज़ी उपलब्धि बनने का जोखिम उठाते हैं।
RashtraPress
17 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत के एफटीए वैश्विक जीडीपी के 70 प्रतिशत को कैसे कवर करते हैं?
भारत ने 38 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं, जो मिलकर वैश्विक जीडीपी के करीब 70 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के लगभग दो-तिहाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन समझौतों के तहत भारतीय निर्यातकों को इन बाज़ारों में प्राथमिकता के आधार पर पहुंच मिलती है।
पीयूष गोयल ने गांधीनगर में किस कार्यक्रम में यह बात कही?
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 17 मई 2026 को गांधीनगर स्थित राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (NID) में इनोवेशन एवं इन्क्यूबेशन सेंटर के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए यह बयान दिया।
भारत में कितनी वैश्विक कंपनियां नवाचार केंद्र चला रही हैं?
गोयल के अनुसार, लगभग 1,700 से 1,800 विश्व-प्रसिद्ध कंपनियां पहले से ही भारत में नवाचार और डिजाइन केंद्र संचालित कर रही हैं। कुशल कार्यबल और डिजिटल बुनियादी ढांचे के कारण ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है।
भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम वैश्विक स्तर पर कहां खड़ा है?
गोयल ने कहा कि भारत ने वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित किया है और यह दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बन चुका है।
भारत की भविष्य की प्रतिस्पर्धात्मकता किन क्षेत्रों पर निर्भर करेगी?
गोयल के अनुसार, भारत की आगामी प्रतिस्पर्धात्मकता उत्पादकता, टिकाऊ विनिर्माण, उच्च गुणवत्ता और नवाचार की गति पर निर्भर करेगी। उन्होंने सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग और डीप टेक्नोलॉजी को प्राथमिकता वाले उभरते क्षेत्र बताया।
राष्ट्र प्रेस
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