भारत-न्यूजीलैंड एफटीए: शून्य शुल्क से निर्यात को बढ़ावा, 15 वर्षों में ₹2 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य
सारांश
Key Takeaways
- पीयूष गोयल ने 28 अप्रैल 2026 को भारत-न्यूजीलैंड एफटीए को ऐतिहासिक बताया।
- भारत से न्यूजीलैंड जाने वाले अधिकांश उत्पादों पर अब शून्य (जीरो) शुल्क लागू होगा।
- न्यूजीलैंड का बाज़ार भारत के लिए 140 सेवा क्षेत्रों में खोला गया।
- अगले 15 वर्षों में न्यूजीलैंड द्वारा भारत में ₹2 लाख करोड़ (20 बिलियन डॉलर) निवेश की योजना।
- भारतीय दवाओं को न्यूजीलैंड में फास्ट ट्रैक मंजूरी का प्रावधान।
- न्यूजीलैंड संसद की मंजूरी के बाद 2026 के अंत तक समझौता लागू होने की संभावना।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 28 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को ऐतिहासिक करार दिया। उन्होंने कहा कि इस समझौते के तहत भारत से न्यूजीलैंड जाने वाले अधिकांश उत्पादों पर अब शून्य (जीरो) शुल्क लागू होगा, जिससे भारतीय निर्यात को व्यापक बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
समझौते का दायरा और मुख्य प्रावधान
गोयल ने स्पष्ट किया कि यह एफटीए केवल वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार तक सीमित नहीं है। इस समझौते के ज़रिए न्यूजीलैंड का बाज़ार भारत के लिए लगभग 140 सेवा क्षेत्रों में खोल दिया गया है। शिक्षा, खेल, संस्कृति, कृषि उत्पादकता और तकनीकी सहयोग जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी को बढ़ावा मिलेगा।
इसके अतिरिक्त, बौद्धिक संपदा और पारंपरिक चिकित्सा — विशेष रूप से आयुष से जुड़े क्षेत्रों — में भी सहयोग के लिए अहम करार किए गए हैं। गोयल के अनुसार, यह समझौता भारत के लिए एक बहुआयामी आर्थिक अवसर है।
फार्मास्यूटिकल क्षेत्र को विशेष लाभ
मंत्री ने फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में हुए प्रावधान को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यदि भारत की कोई दवा अमेरिका या यूरोप जैसे विकसित देशों में स्वीकृत हो जाती है, तो न्यूजीलैंड में उसे फास्ट ट्रैक प्रक्रिया के ज़रिए मंजूरी मिल सकेगी। इससे भारतीय दवा कंपनियों की वैश्विक बाज़ार में पहुँच और अधिक मज़बूत होगी।
निवेश और रोज़गार की संभावनाएँ
गोयल ने बताया कि पिछले 25 वर्षों में न्यूजीलैंड ने भारत में करीब 7 करोड़ डॉलर (70 मिलियन डॉलर) का निवेश किया है। अब अगले 15 वर्षों में लगभग 2,000 करोड़ डॉलर (20 बिलियन डॉलर अर्थात करीब ₹2 लाख करोड़) का निवेश करने की योजना है। उन्होंने कहा कि इससे देश में बड़े पैमाने पर रोज़गार के अवसर पैदा होंगे और व्यापार-उद्योग को नई मज़बूती मिलेगी।
संसदीय मंजूरी और लागू होने की समयसीमा
मंत्री ने बताया कि इस समझौते को न्यूजीलैंड की संसद में पेश किया जाएगा, जहाँ सत्तारूढ़ और विपक्षी दोनों दल इसका समर्थन कर रहे हैं। ऐसे में जल्द मंजूरी मिलने के बाद यह समझौता इसी वर्ष के अंत तक लागू हो सकता है। गोयल ने यह भी रेखांकित किया कि यह एफटीए 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को हासिल करने और अमृत काल में देश की आर्थिक प्रगति को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।