झारखंड में 15 दिनों में तीन बार मोबाइल टावर पर चढ़े प्रेमी, धनबाद में युवती ने प्रेमी की रिहाई के लिए लगाई जान की बाज़ी
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के धनबाद जिले के गोमो स्थित सिकलाइन इलाके में रविवार, 18 मई 2025 को एक युवती अपने गिरफ्तार प्रेमी की रिहाई और उससे शादी की माँग को लेकर मोबाइल टावर पर चढ़ गई। यह झारखंड में महज 15 दिनों के भीतर प्रेम-विवाद से जुड़ी मोबाइल टावर पर चढ़ने की तीसरी घटना है, जो राज्य में एक असामान्य प्रवृत्ति की ओर संकेत करती है।
धनबाद में क्या हुआ
सहरिया निवासी देवंती कुमारी एक विवाहित युवक से प्रेम करती है। उस युवक को निमियाघाट थाना पुलिस ने किसी मामले में गिरफ्तार किया था। प्रेमी की गिरफ्तारी से आहत देवंती रविवार को मोबाइल टावर पर जा चढ़ी, जिससे इलाके में अफरातफरी मच गई और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए।
करीब डेढ़ घंटे तक चले इस घटनाक्रम में युवती लगातार प्रेमी की रिहाई और शादी की माँग करती रही। सूचना मिलने पर हरिहरपुर थाना पुलिस मौके पर पहुँची। पुलिस और स्थानीय लोगों की मशक्कत के बाद देवंती को सुरक्षित नीचे उतारा गया, उसे थाने ले जाया गया और परिजनों को सूचित किया गया। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।
गिरिडीह में एक दिन पहले की घटना
धनबाद की घटना से ठीक एक दिन पहले गिरिडीह जिले के निमियाघाट में धनबाद के गोविंदपुर निवासी सुनील कुमार महतो अपनी प्रेमिका से शादी कराने की माँग को लेकर मोबाइल टावर पर चढ़ गया था। युवक करीब सात घंटे तक टावर पर डटा रहा। बताया गया कि उसका प्रेम संबंध अपने ही भाई की साली से था। पुलिस और स्थानीय लोगों के प्रयास के बाद उसे सुरक्षित नीचे उतारा गया।
गढ़वा में मई के पहले हफ्ते की घटना
इसी श्रृंखला की पहली घटना गढ़वा जिले के रंका थाना क्षेत्र में मई के पहले सप्ताह में सामने आई थी। असद्दुल्लाह अंसारी नामक युवक अपनी प्रेमिका की दूसरी जगह शादी तय होने से नाराज होकर 145 फीट ऊँचे मोबाइल टावर पर चढ़ गया था। उसने कथित तौर पर धमकी दी थी कि यदि उसकी शादी प्रेमिका से नहीं कराई गई तो वह कूदकर जान दे देगा। करीब नौ घंटे की मशक्कत के बाद पुलिस और परिजनों ने उसे सुरक्षित नीचे उतारा।
आम जनता और पुलिस पर असर
इन घटनाओं ने झारखंड पुलिस के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। प्रत्येक घटना में घंटों तक पुलिस बल, स्थानीय प्रशासन और परिजनों को मौके पर तैनात रहना पड़ा। इलाके में भीड़ जमा होने से कानून-व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ा। गौरतलब है कि ये घटनाएँ अलग-अलग जिलों — धनबाद, गिरिडीह और गढ़वा — में हुई हैं, जो इसे किसी एक स्थानीय परिस्थिति तक सीमित नहीं रहने देतीं।
आगे क्या
पुलिस सभी तीनों मामलों की अलग-अलग जाँच कर रही है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी घटनाएँ सामाजिक दबाव, परिवार की असहमति और कानूनी उलझनों के बीच फँसे युवाओं की बेबसी को दर्शाती हैं। यदि यह प्रवृत्ति जारी रही, तो राज्य प्रशासन को इस तरह की स्थितियों से निपटने के लिए विशेष प्रोटोकॉल बनाने की आवश्यकता पड़ सकती है।