मूडीज का अनुमान: 2026 में ब्रेंट क्रूड 90–110 डॉलर प्रति बैरल, भारत में महंगाई 4.5% तक पहुँचने की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में अनुमान जताया है कि 2026 में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 90 से 110 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में बनी रहेंगी। रिपोर्ट के अनुसार इसकी मुख्य वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पूरी तरह खुलने और अमेरिका–ईरान के बीच जल्द किसी समझौते की कम संभावना है। यह रिपोर्ट 17 मई 2026 को जारी की गई।
होर्मुज व्यवधान: अस्थायी संकट नहीं, संरचनात्मक बाधा
मूडीज ने स्पष्ट किया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाज़ों के आवागमन में आई रुकावट अब एक अस्थायी आपूर्ति संकट नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा प्रवाह के लिए एक संरचनात्मक आपूर्ति बाधा बन चुकी है। एजेंसी का कहना है कि यह रुकावट शरद ऋतु 2026 तक जारी रहने की आशंका है।
रिपोर्ट में कहा गया, 'हमारा अनुमान है कि ब्रेंट क्रूड की कीमत इस साल के अधिकांश समय तक 90–110 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहेगी, जिसमें काफी उतार-चढ़ाव होगा, और किसी नई घटना पर कभी-कभी इस सीमा से बाहर भी जा सकती है।'
आपूर्ति सुधार धीमा और अपारदर्शी रहेगा
मूडीज के अनुसार, यदि अगले छह महीनों में होर्मुज स्ट्रेट में आंशिक आवागमन फिर से शुरू भी होता है, तो भी तेल बाज़ार में आपूर्ति सीमित रहेगी। एजेंसी ने कहा कि ट्रांजिट फ्लो में सुधार पूर्ण पुनर्बहाली के बजाय द्विपक्षीय चैनलों के ज़रिये होगा — एक प्रक्रिया जो धीमी, अपारदर्शी और व्यवधानों से भरी होगी।
रिपोर्ट में कहा गया, 'हम उम्मीद करते हैं कि तेल आयातक देश — विशेष रूप से चीन, भारत, जापान और कोरिया — ईरान के साथ द्विपक्षीय रूप से ट्रांजिट के लिए बातचीत करेंगे।' हालाँकि, एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि 2026 में संघर्ष-पूर्व स्तर के यातायात की वापसी संभव नहीं है।
भारत पर असर: महंगाई अनुमान संशोधित
मूडीज ने चेतावनी दी है कि लगातार ऊँची ऊर्जा कीमतें और ऊर्जा उत्पादों की कमी से मुद्रास्फीति में वृद्धि होगी। एजेंसी ने भारत के लिए अपना महंगाई अनुमान संशोधित करते हुए 2026 का औसत 4.5% आँका है, जो उसके पहले के अनुमान 3.5% से एक पूरा प्रतिशत अंक अधिक है।
वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पर व्यापक प्रभाव
गौरतलब है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनिया के तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता है, और इस मार्ग की अनिश्चितता वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में अस्थिरता का प्रमुख कारण बनी हुई है। आने वाले महीनों में अमेरिका–ईरान वार्ता की दिशा और होर्मुज में आवागमन की स्थिति ही यह तय करेगी कि वैश्विक तेल कीमतें इस अनुमानित दायरे में रहती हैं या उससे बाहर निकलती हैं।