जेपी मॉर्गन रिपोर्ट: हॉर्मुज स्ट्रेट खुलने के बाद भी कच्चा तेल $100 प्रति बैरल की रेंज में रहेगा

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जेपी मॉर्गन रिपोर्ट: हॉर्मुज स्ट्रेट खुलने के बाद भी कच्चा तेल $100 प्रति बैरल की रेंज में रहेगा

सारांश

जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट ने साफ़ कर दिया है कि हॉर्मुज स्ट्रेट खुलना कोई जादुई हल नहीं — शिपिंग, रिफाइनरी और टैंकर बाधाएँ महीनों तक बनी रहेंगी। ब्रेंट क्रूड $105 के पार और WTI $100 के ऊपर है, जबकि अमेरिका-ईरान तनाव और ओपेक की कटौती आपूर्ति को और सीमित कर रही है।

मुख्य बातें

जेपी मॉर्गन के अनुसार 2026 में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत लगभग $97 प्रति बैरल रहने का अनुमान है।
हॉर्मुज स्ट्रेट खुलने के बाद भी लॉजिस्टिक्स बाधाएँ कई महीनों तक बनी रहने की आशंका।
मंगलवार को ब्रेंट क्रूड $105 प्रति बैरल से ऊपर और WTI $100 प्रति बैरल के पार पहुँचा।
अप्रैल में ओपेक उत्पादन 8,30,000 बैरल प्रति दिन घटकर 2,00,40,000 बैरल प्रति दिन हुआ।
अमेरिका-ईरान तनाव और ट्रंप की आलोचना से वैश्विक तेल बाज़ार में नई अनिश्चितता।

जेपी मॉर्गन की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, हॉर्मुज स्ट्रेट के दोबारा खुलने के बावजूद कच्चे तेल की कीमतें 2026 के शेष महीनों में $100 प्रति बैरल की निचली रेंज में बनी रह सकती हैं। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बना हुआ है, जिससे कीमतों में तत्काल राहत मिलने की संभावना कम है। मंगलवार, 12 मई को अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब एक प्रतिशत की बढ़त के साथ $105 प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा था।

रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष

जेपी मॉर्गन ने अनुमान लगाया है कि 2026 में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत लगभग $97 प्रति बैरल रह सकती है। निवेश बैंक ने स्पष्ट किया कि केवल हॉर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने से बाज़ार में तुरंत स्थिरता नहीं आएगी। रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल के परिवहन नेटवर्क में लॉजिस्टिक्स संबंधी चुनौतियाँ कई महीनों तक बनी रहने की संभावना है।

आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव

रिपोर्ट में कहा गया है कि शिपिंग, रिफाइनरी संचालन और टैंकरों की उपलब्धता में व्यवधान से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव बना रहने की संभावना है। इससे कीमतों में तीव्र सुधार नहीं हो पाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पहले से ही भू-राजनीतिक तनावों से जूझ रहे हैं।

अमेरिका-ईरान तनाव का असर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा वाशिंगटन के शांति प्रस्ताव पर ईरान की प्रतिक्रिया की आलोचना किए जाने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में नई तेज़ी आई। इससे क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक तेल प्रवाह को लेकर नई चिंताएँ उभरी हैं। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी एक प्रतिशत की मज़बूती के साथ $100 प्रति बैरल के ऊपर पहुँच गया।

ओपेक उत्पादन में कटौती

रिपोर्टों के मुताबिक, अप्रैल में ओपेक द्वारा कच्चे तेल का उत्पादन 8,30,000 बैरल प्रति दिन घटकर 2,00,40,000 बैरल प्रति दिन हो गया। यह उत्पादन कटौती आपूर्ति पक्ष पर पहले से मौजूद दबाव को और बढ़ा रही है। गौरतलब है कि ओपेक के इस कदम से वैश्विक बाज़ार में कच्चे तेल की उपलब्धता और सीमित हो सकती है।

आगे क्या होगा

विशेषज्ञों के अनुसार, मध्यम अवधि में ऊर्जा बाज़ारों को आपूर्ति की कमी का सामना करना पड़ सकता है। जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट संकेत देती है कि जब तक पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक स्थिति नहीं सुधरती और लॉजिस्टिक्स बाधाएँ दूर नहीं होतीं, तब तक कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट की उम्मीद कम है। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति चालू खाता घाटे और मुद्रास्फीति के मोर्चे पर चुनौतियाँ बढ़ा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि टूटी हुई लॉजिस्टिक्स श्रृंखला है। भारत के लिए यह विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि देश अपनी कुल तेल ज़रूरत का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है और $100 से ऊपर का तेल सीधे चालू खाता घाटे, रुपये पर दबाव और ईंधन सब्सिडी बिल को बढ़ाता है। ओपेक की कटौती और अमेरिका-ईरान तनाव एक साथ आने से यह एक दुर्लभ दोहरा झटका है जिसे केवल कूटनीतिक सफलता या माँग में तीव्र गिरावट ही पलट सकती है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेपी मॉर्गन ने कच्चे तेल की कीमत को लेकर क्या अनुमान लगाया है?
जेपी मॉर्गन के अनुसार 2026 में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत लगभग $97 प्रति बैरल रह सकती है और शेष वर्ष में कीमतें $100 प्रति बैरल की निचली रेंज में बनी रह सकती हैं। बैंक का कहना है कि हॉर्मुज स्ट्रेट खुलने के बाद भी लॉजिस्टिक्स बाधाएँ कई महीनों तक बनी रहेंगी।
हॉर्मुज स्ट्रेट खुलने के बाद भी तेल की कीमतें क्यों ऊँची रहेंगी?
रिपोर्ट के अनुसार शिपिंग, रिफाइनरी संचालन और टैंकरों की उपलब्धता में व्यवधान से आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बना रहेगा। केवल जलमार्ग खुलने से कच्चे तेल के परिवहन नेटवर्क की लॉजिस्टिक्स चुनौतियाँ तुरंत हल नहीं होंगी।
अमेरिका-ईरान तनाव का तेल बाज़ार पर क्या असर पड़ रहा है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान की शांति प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया की आलोचना के बाद ब्रेंट क्रूड $105 प्रति बैरल से ऊपर और WTI $100 प्रति बैरल के पार पहुँच गया। इस तनाव से क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक तेल प्रवाह को लेकर नई चिंताएँ उभरी हैं।
ओपेक ने अप्रैल में उत्पादन में कितनी कटौती की?
रिपोर्टों के अनुसार अप्रैल में ओपेक का उत्पादन 8,30,000 बैरल प्रति दिन घटकर 2,00,40,000 बैरल प्रति दिन रह गया। यह कटौती पहले से तनावपूर्ण वैश्विक आपूर्ति को और सीमित कर रही है।
भारत पर कच्चे तेल की ऊँची कीमतों का क्या प्रभाव पड़ेगा?
भारत अपनी कुल तेल ज़रूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए $100 से ऊपर की कीमतें चालू खाता घाटे और मुद्रास्फीति के मोर्चे पर दबाव बढ़ा सकती हैं। मध्यम अवधि में आपूर्ति की कमी बने रहने से ईंधन लागत और आयात बिल पर असर पड़ने की आशंका है।
राष्ट्र प्रेस