बराकाह परमाणु संयंत्र पर ड्रोन हमला: यूएई में आग लगी, कोई हताहत नहीं
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त अरब अमीरात के अल धफरा क्षेत्र में स्थित बराकाह न्यूक्लियर पावर प्लांट के परिसर में 17 मई को एक ड्रोन हमले के बाद आग लग गई। अबू धाबी मीडिया कार्यालय के अनुसार, यह आग संयंत्र की भीतरी परिधि के बाहर स्थित एक इलेक्ट्रिकल जनरेटर में लगी और किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं है।
हमले का विवरण और तत्काल प्रतिक्रिया
अबू धाबी मीडिया कार्यालय ने पुष्टि की कि बराकाह संयंत्र के बाहरी क्षेत्र में स्थित एक इलेक्ट्रिकल जनरेटर में आग लगी, जो एक ड्रोन हमले के कारण हुई। संघीय परमाणु नियामक प्राधिकरण (एफएएनआर) ने भी पुष्टि की कि इस घटना से संयंत्र की सुरक्षा या उसके आवश्यक प्रणालियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। एफएएनआर के अनुसार, संयंत्र की सभी यूनिट सामान्य रूप से काम कर रही हैं।
अधिकारियों ने सभी जरूरी एहतियाती कदम उठाने की जानकारी दी और नागरिकों से अपील की कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी लें तथा अफवाहों से बचें। बयान में ड्रोन हमले के स्रोत के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई।
पृष्ठभूमि: यूएई पर बढ़ते हवाई हमले
यह घटना ऐसे समय में आई है जब यूएई पर हवाई हमलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। 5 मई को यूएई ने कहा था कि उसके कुछ क्षेत्रों पर ईरान से दागी गई मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया गया, हालांकि ईरान की सैन्य कमान ने इस आरोप से इनकार किया था।
इससे पहले 3 अप्रैल को यूएई के रक्षा मंत्रालय ने बताया था कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने 18 बैलिस्टिक मिसाइल, 4 क्रूज मिसाइल और 47 ड्रोन को इंटरसेप्ट किया था, जो कथित तौर पर ईरान की तरफ से दागे गए थे।
एयर डिफेंस: अब तक के आंकड़े
यूएई के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, अब तक कुल 475 बैलिस्टिक मिसाइल, 23 क्रूज मिसाइल और 2,085 ड्रोन को एयर डिफेंस प्रणाली से रोका जा चुका है। ये आंकड़े क्षेत्र में बढ़ते तनाव और यूएई की वायु सुरक्षा पर पड़ रहे निरंतर दबाव को दर्शाते हैं।
ईरान का रुख
ईरानी अधिकारियों ने यूएई के उन आरोपों को खारिज किया है जिनमें ईरान पर हमले करने का दावा किया गया था। ईरान की तरफ से यह भी कहा गया कि यूएई को अमेरिका और इज़रायल की किसी रणनीति के जाल में नहीं फंसना चाहिए। गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह सिलसिला पिछले कुछ हफ्तों से जारी है।
आगे क्या
बराकाह संयंत्र पर इस हमले के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ परमाणु प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त कर रहे हैं। हमले के स्रोत की पहचान और जिम्मेदारी तय करना अभी बाकी है, जो आने वाले दिनों में क्षेत्रीय कूटनीति की दिशा तय कर सकता है।