यूएई ने ओमान तट पर भारतीय जहाज पर हमले की निंदा की, मोदी के अबू धाबी दौरे से पहले बड़ा बयान
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने शुक्रवार, 15 मई 2026 को ओमान के तटीय समुद्री क्षेत्र में भारतीय झंडे वाले एक व्यापारिक जहाज पर हुए हमले की कड़ी निंदा की। यह बयान ऐसे समय आया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पाँच देशों के दौरे के तहत अबू धाबी पहुँचने वाले थे। यूएई की इस त्वरित प्रतिक्रिया को कूटनीतिक विश्लेषक दोनों देशों के बीच गहरे होते समुद्री सुरक्षा सहयोग का संकेत मान रहे हैं।
यूएई का आधिकारिक बयान
यूएई के विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर जारी बयान में इस हमले को 'अंतरराष्ट्रीय नौवहन सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा' बताया। मंत्रालय ने इसे एक 'खतरनाक उकसावे की कार्रवाई' करार दिया, जिसका मकसद महत्वपूर्ण जलमार्गों की स्थिरता को कमज़ोर करना था।
बयान में यूएई ने भारत के साथ 'पूर्ण एकजुटता' जताई और भारतीय जहाजों तथा समुद्री हितों की रक्षा के लिए उठाए गए हर कदम का समर्थन करने की प्रतिबद्धता दोहराई। मंत्रालय ने यह भी कहा कि यह हमला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का खुला उल्लंघन है, जो नौवहन की स्वतंत्रता की गारंटी देता है और व्यापारिक जहाजों पर हमलों को स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित करता है।
किसी देश या संगठन का नाम लिए बिना यूएई ने कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य का उपयोग आर्थिक दबाव या ब्लैकमेल के हथियार के रूप में करना अनधिकृत है और यह क्षेत्रीय स्थिरता, स्थानीय आबादी तथा वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए सीधा खतरा है।
भारत की प्रतिक्रिया और क्रू की स्थिति
भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने जहाज की पहचान या हताहतों की संख्या का अभी तक आधिकारिक खुलासा नहीं किया है। हालाँकि, मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि 'जहाज पर सवार सभी भारतीय क्रू सदस्य सुरक्षित हैं' और इस बचाव अभियान के लिए ओमानी अधिकारियों का आभार जताया।
MEA ने कहा कि ओमान तट पर भारतीय पोत पर यह हमला स्वीकार्य नहीं है और भारत व्यापारिक जहाजों तथा निर्दोष नाविकों को बार-बार निशाना बनाए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त करता है। मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से नौवहन और वाणिज्य की स्वतंत्रता में किसी भी प्रकार की बाधा से बचने की अपील की। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, नई दिल्ली स्थिति पर निरंतर नज़र बनाए हुए है।
मोदी के दौरे पर असर और कूटनीतिक संदर्भ
यह घटना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पाँच देशों के दौरे की शुरुआत से कुछ घंटे पहले सामने आई, जिसमें यूएई पहला पड़ाव है। कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि इस हमले का मुद्दा द्विपक्षीय वार्ता में उठने की प्रबल संभावना है और खाड़ी तथा अरब सागर में समुद्री सुरक्षा सहयोग को और मज़बूत करने पर चर्चा होने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि यह क्षेत्र वैश्विक तेल व्यापार की जीवनरेखा है और पिछले कुछ महीनों में इस मार्ग पर तनाव लगातार बढ़ा है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-यूएई के बीच आर्थिक और रक्षा सहयोग नई ऊँचाइयों पर है।
आगे क्या होगा
भारतीय विदेश मंत्रालय से जहाज की पहचान और घटना के विस्तृत ब्यौरे पर आधिकारिक बयान की प्रतीक्षा है। प्रधानमंत्री मोदी की अबू धाबी यात्रा के दौरान समुद्री सुरक्षा के मुद्दे को द्विपक्षीय एजेंडे में प्राथमिकता मिलने के संकेत मिल रहे हैं, जो इस क्षेत्र में भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका को रेखांकित करेगा।