PM मोदी यूएई रवाना: राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से होगी मुलाकात, ऊर्जा और व्यापार पर अहम MOU संभव
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार, 15 मई को नई दिल्ली से अबू धाबी के लिए रवाना हो गए। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के इस आधिकारिक दौरे का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ करना है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब खाड़ी क्षेत्र में भारत की कूटनीतिक और आर्थिक सक्रियता लगातार बढ़ रही है।
मुख्य घटनाक्रम
अबू धाबी में पीएम मोदी यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ व्यापार, निवेश, ऊर्जा सुरक्षा और लोगों के आपसी संबंधों जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर विस्तृत वार्ता करेंगे। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस दौरे में एलपीजी और रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व के क्षेत्र में दो अहम समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर होने की संभावना है।
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह दौरा दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश जुड़ाव को और मज़बूती देगा। गौरतलब है कि यूएई पिछले 25 वर्षों में भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापार साझेदार और कुल निवेश का सातवाँ सबसे बड़ा स्रोत रहा है।
भारतीय समुदाय का मुद्दा
यूएई में 45 लाख से अधिक भारतीय निवासी हैं, जो इसे दुनिया में सबसे बड़े भारतीय प्रवासी समुदायों में से एक बनाता है। इस दृष्टि से यह दौरा प्रवासी भारतीयों के कल्याण, उनके अधिकारों और रोज़गार संबंधी मुद्दों पर चर्चा का भी एक महत्वपूर्ण अवसर होगा।
यूरोप दौरे के अगले पड़ाव
विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने जानकारी दी कि यूएई के बाद पीएम मोदी नीदरलैंड जाएंगे — 2017 के बाद उनका यह दूसरा नीदरलैंड दौरा होगा। वहाँ वे किंग विलेम-अलेक्जेंडर, क्वीन मैक्सिमा और प्रधानमंत्री रॉब जेटन से मुलाकात करेंगे।
तीसरे चरण में पीएम मोदी स्वीडन के गोथेनबर्ग पहुँचेंगे, जहाँ वे अपने स्वीडिश समकक्ष उल्फ क्रिस्टरसन के साथ द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करेंगे और व्यापार विस्तार के नए रास्ते तलाशेंगे। दोनों नेता यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ इंडस्ट्री के लिए यूरोपीय राउंड टेबल को भी संबोधित करेंगे, जो पैन-यूरोपियन बिज़नेस लीडर्स का एक प्रमुख मंच है।
चौथे पड़ाव पर सोमवार को पीएम मोदी नॉर्वे में तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे और द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। दौरे के अंतिम चरण में मंगलवार को वे इटली पहुँचेंगे, जहाँ राष्ट्रपति सर्जियो मटेरेला और प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ बैठक होगी।
रणनीतिक महत्व
यह बहु-देशीय दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी भूमिका मज़बूत करने और यूरोपीय व खाड़ी देशों के साथ आर्थिक साझेदारी गहरी करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर यूएई के साथ संभावित MOU भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं।
आने वाले दिनों में इन बैठकों के परिणाम और संयुक्त वक्तव्य भारत की विदेश नीति की दिशा को और स्पष्ट करेंगे।