पीएम मोदी का यूएई-यूरोप दौरा: FIEO बोला — व्यापार और निवेश को मिलेगी नई रफ्तार

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पीएम मोदी का यूएई-यूरोप दौरा: FIEO बोला — व्यापार और निवेश को मिलेगी नई रफ्तार

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी का यूएई और यूरोप दौरा महज़ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं — FIEO इसे भारत के $70 अरब से अधिक के द्विपक्षीय व्यापार को नई रफ्तार देने और FTA व TEPA जैसे हालिया समझौतों को ज़मीन पर उतारने के अहम अवसर के रूप में देख रहा है।

मुख्य बातें

FIEO ने PM मोदी के यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली दौरे का स्वागत किया।
इन देशों के साथ भारत का कुल द्विपक्षीय व्यापार 70 अरब डॉलर से अधिक है।
दौरा भारत-ईयू FTA और भारत- EFTA TEPA के हाल ही में संपन्न होने के बाद हो रहा है।
रल्हन ने इंजीनियरिंग, स्वच्छ ऊर्जा, AI, सेमीकंडक्टर और रक्षा निर्माण में बड़े अवसरों की बात कही।
नॉर्वे में भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन और यूरोपीय राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री में PM की भागीदारी अपेक्षित।
यूएई भारत का प्रमुख व्यापार साझेदार और मध्य पूर्व-अफ्रीका में निर्यात का अहम प्रवेश द्वार बना हुआ है।

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन्स (FIEO) ने 14 मई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी विदेश दौरे का खुलकर स्वागत किया। यह दौरा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली को कवर करेगा और भारत के व्यापार, निवेश तथा तकनीकी सहयोग को वैश्विक स्तर पर नई दिशा देने का अवसर माना जा रहा है।

दौरे का महत्व और आर्थिक संदर्भ

FIEO के अध्यक्ष एस.सी. रल्हन ने कहा कि यह दौरा ऐसे नाज़ुक समय में हो रहा है जब भारत यूरोप और खाड़ी क्षेत्र के साथ अपनी आर्थिक साझेदारी को नई ऊँचाई देने में जुटा है। उन्होंने कहा, 'यूएई और प्रमुख यूरोपीय देशों के नेतृत्व के साथ प्रधानमंत्री की उच्च स्तरीय बातचीत यह दिखाती है कि भारत एक भरोसेमंद आर्थिक साझेदार और वैश्विक विकास का अहम हिस्सा बनता जा रहा है।' रल्हन के अनुसार, इस दौरे से इंजीनियरिंग, स्वच्छ ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, दवाइयों, फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल ट्रेड जैसे क्षेत्रों में भारतीय निर्यातकों के लिए बड़े अवसर उभरेंगे।

भारत-यूएई संबंध: रणनीतिक साझेदारी की नई परत

FIEO अध्यक्ष ने रेखांकित किया कि भारत और यूएई के संबंध अब एक सुदृढ़ 'कम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' का रूप ले चुके हैं, जिसमें व्यापार और निवेश तेज़ी से बढ़ रहे हैं। यूएई न केवल भारत का सबसे अहम व्यापारिक और निवेश साझेदार है, बल्कि मध्य पूर्व और अफ्रीका में भारतीय निर्यात का एक प्रमुख प्रवेश द्वार भी है। रल्हन ने कहा, 'यह दौरा भारत-यूएई आर्थिक संबंधों को और मजबूत करेगा — खासकर ऊर्जा सहयोग, इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश और सेवाओं के व्यापार के क्षेत्र में। यूएई में बड़ी भारतीय प्रवासी आबादी भी दोनों देशों के बीच व्यापार और लोगों के संबंधों को मजबूत बनाने का काम करती है।'

यूरोप दौरे की अहमियत: FTA और EFTA के बाद नई शुरुआत

यूरोपीय देशों की यात्राओं पर बात करते हुए FIEO अध्यक्ष ने बताया कि यूरोप भारत के लिए निर्यात और निवेश के सबसे बड़े क्षेत्रों में से एक है। उन्होंने यह भी कहा कि यह दौरा भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA) और भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के साथ व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (TEPA) के हाल ही में संपन्न होने के बाद और भी प्रासंगिक हो गया है। रल्हन ने कहा, 'प्रधानमंत्री की यूरोपीय नेताओं के साथ बातचीत से ग्रीन हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), नवाचार, स्वच्छ तकनीक, रक्षा निर्माण, ब्लू इकोनॉमी, मजबूत सप्लाई चेन और स्थिरता जैसे भविष्य के क्षेत्रों में सहयोग और गहरा होगा।'

नॉर्डिक शिखर सम्मेलन और प्रमुख व्यापार आयोजन

FIEO ने नॉर्वे में होने वाले भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन को विशेष महत्व दिया। रल्हन के अनुसार, नॉर्डिक क्षेत्र नवीकरणीय ऊर्जा, जलवायु तकनीक, समुद्री क्षेत्र, डिजिटल नवाचार और उन्नत निर्माण में सहयोग के बड़े अवसर प्रदान करता है। संगठन ने यूरोपीय राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री और भारत-नॉर्वे बिजनेस एंड रिसर्च समिट जैसे बड़े व्यापारिक आयोजनों में प्रधानमंत्री की भागीदारी का भी स्वागत किया।

व्यापार के आँकड़े और आगे की राह

FIEO के अनुसार, इन सभी देशों के साथ भारत का कुल द्विपक्षीय व्यापार 70 अरब डॉलर से अधिक है और इन क्षेत्रों से भारत में निवेश भी लगातार बढ़ रहा है। रल्हन ने कहा कि यह दौरा व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को नई ऊर्जा देगा और निवेशकों का भरोसा मज़बूत करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि FTA और TEPA जैसे समझौतों के ज़मीन पर उतरने की रफ्तार ही इस दौरे की असली कसौटी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि भारत-ईयू FTA और EFTA-TEPA जैसे समझौते, जो वर्षों की बातचीत के बाद कागज़ पर आए हैं, ज़मीन पर कब और कैसे उतरेंगे। उच्च स्तरीय दौरे निवेशकों का भरोसा बढ़ाते हैं, लेकिन भारत का निर्यात-से-GDP अनुपात अभी भी प्रतिस्पर्धियों से पीछे है। ग्रीन हाइड्रोजन और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में सहयोग की घोषणाएँ पहले भी हुई हैं — इस बार कसौटी होगी कि इनके लिए ठोस वित्तपोषण और नियामक ढाँचा कितनी तेज़ी से तैयार होता है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी का यूएई और यूरोप दौरा किन देशों को कवर करेगा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली को कवर करेगा। यह दौरा व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
FIEO ने इस दौरे का स्वागत क्यों किया?
FIEO के अनुसार, यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत-ईयू FTA और EFTA-TEPA जैसे महत्वपूर्ण व्यापार समझौते हाल ही में संपन्न हुए हैं। FIEO अध्यक्ष एस.सी. रल्हन का मानना है कि इससे इंजीनियरिंग, स्वच्छ ऊर्जा, AI और रक्षा निर्माण जैसे क्षेत्रों में भारतीय निर्यातकों के लिए बड़े अवसर खुलेंगे।
इन देशों के साथ भारत का कुल व्यापार कितना है?
FIEO के अनुसार, यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली के साथ भारत का कुल द्विपक्षीय व्यापार 70 अरब डॉलर से अधिक है। इन क्षेत्रों से भारत में निवेश भी लगातार बढ़ रहा है।
भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन का क्या महत्व है?
भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन नॉर्वे में आयोजित होने वाला एक उच्च स्तरीय राजनयिक और व्यापारिक आयोजन है। FIEO के अनुसार, नॉर्डिक क्षेत्र नवीकरणीय ऊर्जा, जलवायु तकनीक, समुद्री क्षेत्र और डिजिटल नवाचार में सहयोग के बड़े अवसर प्रदान करता है।
यूएई भारत के लिए क्यों खास व्यापारिक साझेदार है?
यूएई भारत का सबसे अहम व्यापार और निवेश साझेदार है तथा मध्य पूर्व और अफ्रीका में भारतीय निर्यात का एक प्रमुख प्रवेश द्वार भी है। दोनों देशों के बीच 'कम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' है और यूएई में बड़ी भारतीय प्रवासी आबादी दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को और मजबूत बनाती है।
राष्ट्र प्रेस
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