आंध्र प्रदेश का ₹1.27 लाख करोड़ स्व-राजस्व लक्ष्य, चंद्रबाबू नायडू ने विभागों को दिए सख्त निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 14 मई 2026 को अमरावती स्थित सचिवालय में राजस्व विभागों की समीक्षा बैठक में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹1,27,506 करोड़ का महत्वाकांक्षी स्व-राजस्व लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने सभी राजस्व अर्जित करने वाले विभागों को निर्देश दिया कि वे पूरी क्षमता से कार्य करें और राजस्व रिसाव को हर हाल में रोकें।
राजस्व वृद्धि का ताज़ा आँकड़ा
अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि राज्य का स्व-राजस्व 2024-25 में ₹1,04,345 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹1,10,643 करोड़ हो गया — यह 6 प्रतिशत की वृद्धि है। इससे भी उत्साहजनक यह है कि चालू वित्त वर्ष के पहले 42 दिनों में ही राज्य ने लगभग 38 प्रतिशत राजस्व वृद्धि दर्ज की है।
प्रमुख स्रोतों में वस्तु एवं सेवा कर (GST) से ₹33,679 करोड़, स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग से ₹11,047 करोड़ और खान विभाग से ₹10,300 करोड़ का योगदान रहा।
मुख्यमंत्री के प्रमुख निर्देश
एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, नायडू ने वाणिज्यिक कर, उत्पाद शुल्क, खान, परिवहन और पंजीकरण सहित सभी विभागों को राजस्व रिसाव बंद करने और लंबित केंद्रीय निधियों को सक्रियता से प्राप्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि बढ़ते निवेश के साथ कर राजस्व में आनुपातिक वृद्धि होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने भूमि विवादों — विशेष रूप से धारा 22ए से संबंधित संपत्तियों — के समाधान पर बल दिया, जिससे पंजीकरण राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की संभावना है।
प्रौद्योगिकी और AI का उपयोग
नायडू ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित GST जाँच प्रणाली लागू करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि विभागों को ऐसी तकनीक अपनानी चाहिए जो करदाताओं को परेशान किए बिना कर रिसाव की पहचान कर सके और अनुपालन में सुधार ला सके। नवोन्मेषी प्रणालियाँ अपनाने और कामकाज की गति बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए।
जिले बनेंगे 'विकास केंद्र'
मुख्यमंत्री ने जिलों को 'विकास केंद्र' बताते हुए कहा कि जिला स्तर पर आर्थिक विस्तार से राज्यव्यापी राजस्व लक्ष्यों को तेजी से हासिल करने में मदद मिलेगी। उनके अनुसार, आंध्र प्रदेश को बढ़ते निवेश को उच्च कर राजस्व और सतत आर्थिक विकास में परिवर्तित करना होगा।
आगे की राह
₹1,27,506 करोड़ का यह लक्ष्य पिछले वर्ष की तुलना में करीब 15 प्रतिशत की छलाँग है, जो राज्य के लिए एक कड़ी परीक्षा होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि AI-आधारित कर अनुपालन और भूमि विवादों के समाधान से राजस्व में वास्तविक सुधार आ सकता है, बशर्ते क्रियान्वयन समयबद्ध हो।