वीडी सतीशन ने ली केरल के मुख्यमंत्री पद की शपथ, 15 साल बाद यूडीएफ की सत्ता में वापसी
सारांश
मुख्य बातें
केरल के नवनियुक्त मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने 18 मई 2025 को तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में पद की शपथ ली। राज्यपाल ने उन्हें शपथ दिलाई, जिसके साथ ही केरल में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के वरिष्ठ नेता पिनाराई विजयन के एक दशक लंबे शासन का औपचारिक अंत हो गया। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) की यह वापसी 15 वर्षों के अंतराल के बाद हुई है।
शपथ ग्रहण समारोह का माहौल
तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में आयोजित इस समारोह में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बने। समारोह में उत्साह और उम्मीद का वातावरण था।
चुनावी जनादेश: यूडीएफ की ऐतिहासिक जीत
हाल ही में संपन्न केरल विधानसभा चुनाव में यूडीएफ ने 140 सदस्यीय विधानसभा में 102 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया। अकेले कांग्रेस ने 63 सीटें जीतीं, जो केरल में पार्टी का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण भारत में कांग्रेस की स्थिति को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी थी। वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (एलडीएफ) के 10 वर्षों के शासन को मतदाताओं ने नकार दिया।
नेताओं की प्रतिक्रिया
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस अवसर पर कहा, 'यह केरल की ऐतिहासिक जीत है और हम सभी को इसकी बहुत खुशी है।' उन्होंने आगे कहा, 'केरल के लोगों के लिए यह बहुत खास दिन है क्योंकि 10 साल के बाद यूडीएफ सत्ता में आ रही है। एलडीएफ का 10 साल का शासन जनता ने अस्वीकार कर दिया है। अब यह हमारी जिम्मेदारी है कि केरल के लोगों को अच्छी सरकार दें।' कांग्रेस नेताओं ने इस शपथ ग्रहण को केरल में एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत के रूप में वर्णित किया।
ऐतिहासिक संदर्भ: 15 साल का इंतज़ार
गौरतलब है कि दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी के नेतृत्व में कांग्रेस ने आखिरी बार 2011 में केरल में सत्ता संभाली थी। तब से एलडीएफ और पिनाराई विजयन ने लगातार दो कार्यकाल राज्य पर शासन किया। यह पहली बार है जब केरल में किसी गठबंधन ने लगातार तीन बार सत्ता हासिल की हो — इस बार यूडीएफ ने वह इतिहास रचा जो अब तक एलडीएफ के नाम था। केरल की राजनीति में आमतौर पर सत्ता का दल-बदल होता रहा है, और इस बार मतदाताओं ने उसी परंपरा को बनाए रखा।
आगे की राह
वी.डी. सतीशन के सामने अब केरल के विकास, रोज़गार और सामाजिक कल्याण से जुड़ी चुनौतियों को संबोधित करने की जिम्मेदारी है। नई सरकार से यूडीएफ के घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरा करने की उम्मीद है। राज्य की जनता और विपक्ष दोनों की निगाहें नई सरकार के पहले सौ दिनों पर टिकी होंगी।