मेट्टूर डैम में जलस्तर 79 फीट, कावेरी डेल्टा में 'कुरुवाई' खेती पर संकट के बादल

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मेट्टूर डैम में जलस्तर 79 फीट, कावेरी डेल्टा में 'कुरुवाई' खेती पर संकट के बादल

सारांश

मेट्टूर डैम का जलस्तर 79 फीट — पिछले साल से 29 फीट नीचे। कुरुवाई खेती के लिए ज़रूरी 100 फीट की सीमा अभी बहुत दूर है। 12 जून की परंपरागत पानी-छोड़ाई अधर में, और लक्ष्य पहले ही आधा काटा जा चुका है। कावेरी डेल्टा के किसान बोरवेल और मानसून की दुआ पर टिके हैं।

मुख्य बातें

मेट्टूर डैम का जलस्तर 18 मई 2026 को 79 फीट — पिछले वर्ष की इसी अवधि में 108 फीट था।
जलभंडारण घटकर 41.035 टीएमसी रह गया, जो 2025 के 76.031 टीएमसी से लगभग आधा है।
कुरुवाई खेती के लिए न्यूनतम 100 फीट जलस्तर ज़रूरी; 12 जून की परंपरागत पानी-छोड़ाई अनिश्चित।
सरकार ने कुरुवाई लक्ष्य घटाकर 3.44 लाख एकड़ किया — 2025 के 6.31 लाख एकड़ से आधे से भी कम।
निर्धारित लक्ष्य क्षेत्र का केवल 35% हिस्सा अब तक खेती के दायरे में; किसान भूजल और बोरवेल पर निर्भर।
कावेरी जल बँटवारे में तमिलनाडु का हक़ दिलाने की माँग तेज़ हो रही है।

तमिलनाडु के मेट्टूर डैम में जलस्तर 18 मई 2026 को घटकर 79 फीट पर आ गया — जो पिछले वर्ष इसी अवधि के 108 फीट से 29 फीट कम है। इस भारी गिरावट ने कावेरी डेल्टा क्षेत्र में 'कुरुवाई' धान की खेती को लेकर किसानों और कृषि विशेषज्ञों की चिंताएँ तेज़ कर दी हैं। आशंका जताई जा रही है कि परंपरागत रूप से 12 जून को होने वाला बाँध से पानी का छोड़ा जाना इस बार संभव नहीं हो पाएगा।

जलभंडारण में भारी कमी

जलाशय में पानी का भंडारण घटकर 41.035 टीएमसी (हज़ार मिलियन घन फीट) रह गया है, जबकि 2025 की इसी अवधि में यह 76.031 टीएमसी था — यानी लगभग आधा। परंपरा के अनुसार, कुरुवाई खेती के लिए मेट्टूर डैम से पानी तभी छोड़ा जाता है जब जलस्तर 100 फीट से अधिक हो। मौजूदा स्तर इस न्यूनतम सीमा से काफ़ी नीचे है, जिससे समय पर बाँध खोले जाने की संभावना अनिश्चित हो गई है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पीने के पानी की आपूर्ति की प्राथमिकता के कारण जून की शुरुआत तक जलस्तर और भी नीचे जा सकता है, जिससे सिंचाई की योजना बनाना और कठिन हो जाएगा।

सरकार ने घटाया खेती का लक्ष्य

बिगड़ती स्थिति को देखते हुए तमिलनाडु सरकार ने इस वर्ष कुरुवाई खेती का लक्ष्य घटाकर 3.44 लाख एकड़ कर दिया है, जबकि 2025 में यह 6.31 लाख एकड़ था। ज़िलेवार लक्ष्य इस प्रकार हैं: तंजावुर में 1.57 लाख एकड़, तिरुवरूर में 97,000 एकड़, मयिलादुथुराई में 87,000 एकड़ और नागपट्टिनम में 59,000 एकड़

गौरतलब है कि 2020 से 2025 के बीच मेट्टूर से पानी आमतौर पर समय पर छोड़ा गया, जिसके परिणामस्वरूप बंपर फसलें हुईं और कुरुवाई खेती ने कई वर्षों तक अपने निर्धारित लक्ष्य पार किए। 'सांबा' खेती भी उस दौरान काफ़ी अच्छी रही।

किसानों की स्थिति और भूजल पर निर्भरता

पूरे डेल्टा क्षेत्र में कृषि गतिविधियाँ अत्यंत धीमी गति से आगे बढ़ रही हैं। बताया जा रहा है कि अब तक निर्धारित लक्ष्य क्षेत्र का केवल 35 प्रतिशत हिस्सा ही खेती के दायरे में आ पाया है। जिन किसानों ने खेती शुरू कर दी है, वे मुख्य रूप से भूजल और बोरवेल पर निर्भर हैं, और अनुकूल दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

पानी की अनिश्चितता के बीच यह आशंका भी बढ़ रही है कि किसान जोखिम कम करने के लिए इस सीज़न में 'एक सांबा फसल' की रणनीति पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं, जिससे कुरुवाई उत्पादन और प्रभावित होगा।

कावेरी जल बँटवारे की माँग तेज़

इस संकट के बीच कावेरी नदी के पानी में तमिलनाडु के निर्धारित हिस्से की माँग भी ज़ोर पकड़ रही है। जल बँटवारे के तय नियमों के अनुसार राज्य को उसका हक़ दिलाने की अपील राजनीतिक और किसान संगठनों के स्तर पर उठाई जा रही है।

यह संकट ऐसे समय में आया है जब दक्षिण भारत के कई जलाशयों में पूर्व-मानसून भंडारण औसत से नीचे है। आने वाले हफ्तों में मानसून की दस्तक और कावेरी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में वर्षा ही यह तय करेगी कि इस वर्ष कुरुवाई खेती को कितना पानी मिल पाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी वह आधा लक्ष्य भी 35% पर अटका है, जो बताता है कि ज़मीनी संकट आधिकारिक अनुमानों से कहीं गहरा है। असली सवाल यह है कि जल बँटवारे के अंतरराज्यीय विवाद और पूर्व-मानसून भंडारण की कमी के बीच राज्य सरकार के पास किसानों को भूजल-दोहन के दुष्चक्र से बाहर निकालने की कोई ठोस योजना है या नहीं — क्योंकि बोरवेल पर निर्भरता दीर्घकालिक रूप से भूजल स्तर को और नीचे ले जाएगी।
RashtraPress
18 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेट्टूर डैम में अभी कितना पानी है और पिछले साल से कितना कम है?
18 मई 2026 को मेट्टूर डैम का जलस्तर 79 फीट और भंडारण 41.035 टीएमसी दर्ज किया गया। पिछले वर्ष इसी अवधि में जलस्तर 108 फीट और भंडारण 76.031 टीएमसी था — यानी इस साल लगभग आधा पानी उपलब्ध है।
कुरुवाई खेती के लिए मेट्टूर डैम का जलस्तर कितना होना चाहिए?
परंपरा के अनुसार कुरुवाई धान की खेती के लिए मेट्टूर डैम से 12 जून को पानी छोड़ा जाता है, लेकिन इसके लिए जलस्तर कम से कम 100 फीट होना ज़रूरी है। फ़िलहाल जलस्तर 79 फीट है, जो इस सीमा से काफ़ी नीचे है।
इस साल कुरुवाई खेती का लक्ष्य कितना घटाया गया है?
तमिलनाडु सरकार ने 2026 में कुरुवाई खेती का लक्ष्य घटाकर 3.44 लाख एकड़ कर दिया है, जबकि 2025 में यह 6.31 लाख एकड़ था। तंजावुर, तिरुवरूर, मयिलादुथुराई और नागपट्टिनम जिलों में अलग-अलग लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
कावेरी डेल्टा के किसान अभी किस पर निर्भर हैं?
जो किसान खेती शुरू कर चुके हैं, वे मुख्य रूप से भूजल और बोरवेल पर निर्भर हैं। साथ ही वे अनुकूल दक्षिण-पश्चिम मानसून की उम्मीद लगाए बैठे हैं, क्योंकि डैम से सिंचाई जल की उपलब्धता अनिश्चित बनी हुई है।
क्या इस संकट का असर सांबा फसल पर भी पड़ेगा?
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार पानी की अनिश्चितता के कारण किसान इस सीज़न में 'एक सांबा फसल' की रणनीति अपना सकते हैं, जिससे कुरुवाई उत्पादन और सिकुड़ेगा। 2020-2025 के बीच समय पर पानी मिलने से सांबा खेती भी अच्छी रही थी, लेकिन इस बार दोनों फसलों पर दबाव है।
राष्ट्र प्रेस
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