फैंटम स्ट्रीक नेबुला: ईएसए ने हबल से कैद की बूढ़े तारे की अंतिम चमक, 7,000 प्रकाश वर्ष दूर है NGC 6741
सारांश
मुख्य बातें
यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) ने 18 मई 2026 को हबल स्पेस टेलीस्कोप से ली गई एक असाधारण तस्वीर सार्वजनिक की है, जिसमें एक बूढ़े होते तारे के अंतिम जीवन-चरण की झलक मिलती है। इस तस्वीर में NGC 6741 — जिसे 'फैंटम स्ट्रीक नेबुला' भी कहा जाता है — को दर्शाया गया है, जहाँ तारे की बाहरी गैसीय परतें अंतरिक्ष में बिखर कर तीव्र अल्ट्रावॉयलेट विकिरण में दमक रही हैं। यह नेबुला पृथ्वी से लगभग 7,000 प्रकाश वर्ष की दूरी पर एक्विला (चील) तारामंडल में स्थित है।
क्या है फैंटम स्ट्रीक नेबुला
ईएसए ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया चैनल पर इस तस्वीर को साझा करते हुए बताया कि NGC 6741 एक प्लैनेटरी नेबुला है। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि इस नाम से भ्रमित न हों — इसमें कोई ग्रह नहीं होता। दरअसल, 18वीं शताब्दी में खगोलविदों को दूरबीन में ये गैस के गोलाकार बादल हमारे सौर मंडल के ग्रहों जैसे दिखते थे, इसलिए इन्हें 'प्लैनेटरी नेबुला' नाम दिया गया। इस नेबुला की खोज सबसे पहले 1882 में खगोलविद एडवर्ड चार्ल्स पिकरिंग ने की थी।
तारे का जीवन चक्र: रेड जायंट से सफेद बौने तक
सूर्य जैसे मध्यम आकार के तारे जब अपना हाइड्रोजन ईंधन समाप्त करने लगते हैं, तो वे 'रेड जायंट' यानी लाल विशाल तारे में परिवर्तित हो जाते हैं। इस अवस्था में तारा फैलता है और अपनी बाहरी गैसीय परतें अंतरिक्ष में उत्सर्जित करने लगता है। तारे के केंद्र में शेष बचा गर्म और सघन पिंड तीव्र अल्ट्रावॉयलेट किरणें छोड़ता है, जो इन बिखरी गैसों को प्रकाशमान कर देती हैं — इसी दृश्य अवस्था को प्लैनेटरी नेबुला कहा जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार ये नेबुला आमतौर पर लगभग 10,000 वर्षों तक चमकते रहते हैं, जिसके बाद गैस धीरे-धीरे बिखर जाती है और पीछे केवल एक ठंडा, धुंधला सफेद बौना तारा शेष रह जाता है।
NGC 6741 की अनोखी आयताकार संरचना
NGC 6741 अधिकांश गोलाकार नेबुलाओं से भिन्न है — इसकी आकृति आयताकार है, जो एक चमकते तकिए जैसी दिखाई देती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस असामान्य आकार के पीछे एक बाइनरी स्टार (द्विआधारी तारा) की उपस्थिति हो सकती है, जिसके गुरुत्वाकर्षण प्रभाव ने नेबुला को यह विशिष्ट रूप दिया। सामान्यतः प्लैनेटरी नेबुला छल्ले, तश्तरी या नली जैसी आकृतियों में दिखते हैं, और उनकी संरचना चुंबकीय क्षेत्र तथा निकटवर्ती तारों के प्रभाव से निर्धारित होती है।
हबल की भूमिका और वैज्ञानिक महत्व
यह काफी चमकीला नेबुला है, किंतु सामान्य दूरबीन से यह अत्यंत छोटा प्रतीत होता है। हबल स्पेस टेलीस्कोप की उच्च-विभेदन क्षमता ने इसकी आंतरिक संरचना को पहले से कहीं अधिक स्पष्टता से सामने रखा है। गौरतलब है कि प्लैनेटरी नेबुला के अध्ययन से वैज्ञानिकों को तारकीय विकास, अंतरतारकीय माध्यम में तत्वों के वितरण और ब्रह्मांड की रासायनिक संरचना को समझने में महत्वपूर्ण सुराग मिलते हैं। हमारा सूर्य भी अरबों वर्षों बाद इसी प्रक्रिया से गुज़रेगा।