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दिल्ली शराब नीति: CBI की पुनर्विचार याचिका और अवमानना मामले के लिए दिल्ली हाईकोर्ट ने बनाई दो अलग बेंच

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दिल्ली शराब नीति: CBI की पुनर्विचार याचिका और अवमानना मामले के लिए दिल्ली हाईकोर्ट ने बनाई दो अलग बेंच

सारांश

दिल्ली आबकारी नीति मामले में हाईकोर्ट ने दो अलग बेंच गठित कीं — CBI की पुनर्विचार याचिका जस्टिस मनोज जैन सुनेंगे, जबकि केजरीवाल-सिसोदिया समेत AAP नेताओं के खिलाफ अवमानना मामला जस्टिस चावला-डुडेजा पीठ के पास जाएगा। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के मामले से हटने के बाद यह पुनर्गठन हुआ।

मुख्य बातें

दिल्ली हाईकोर्ट ने 18 मई 2025 को आबकारी नीति CBI मामले के लिए दो अलग-अलग खंडपीठें गठित कीं।
CBI की पुनर्विचार याचिका — केजरीवाल और अन्य की बरी पर चुनौती — अब जस्टिस मनोज जैन की पीठ सुनेगी।
आपराधिक अवमानना मामला जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की खंडपीठ के पास भेजा गया।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने 14 मई को सोशल मीडिया पर न्यायपालिका विरोधी अभियान का हवाला देते हुए मामले से खुद को अलग किया।
ट्रायल कोर्ट ने 1,100 से अधिक पैराग्राफ के फैसले में सभी आरोपियों को बरी किया था; CBI उस फैसले को चुनौती दे रही है।
दोनों मामलों पर मंगलवार को सुनवाई निर्धारित।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 18 मई 2025 को दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के मामले में दो अलग-अलग खंडपीठों का गठन किया — एक CBI की पुनर्विचार याचिका के लिए और दूसरी आपराधिक अवमानना मामले की सुनवाई के लिए। इस कदम से पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित आम आदमी पार्टी (AAP) के कई नेताओं से जुड़े इस बहुचर्चित मामले में न्यायिक प्रक्रिया नए सिरे से आगे बढ़ेगी।

नई बेंचों का गठन क्यों हुआ

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने 14 मई को एक विस्तृत आदेश जारी करते हुए खुद को CBI की पुनर्विचार याचिका की सुनवाई से अलग कर लिया। अपने आदेश में उन्होंने कहा कि जब उन्होंने मामले से हटने से इनकार किया, तो उनके विरुद्ध सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो और सार्वजनिक बयानों की झड़ी लग गई, जो उनके अनुसार निष्पक्ष आलोचना और आपराधिक अवमानना की सीमा को पार कर गए।

जस्टिस शर्मा ने अपने आदेश में यह भी कहा कि अवमानना करने वालों ने केवल उनके खिलाफ नहीं, बल्कि समूची न्यायपालिका के विरुद्ध बदनामी का अभियान चलाया। इस पृष्ठभूमि में हाईकोर्ट ने दोनों मामलों के लिए अलग-अलग बेंच गठित करने का निर्णय लिया।

किस बेंच में होगी किस मामले की सुनवाई

CBI की पुनर्विचार याचिका — जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है — अब जस्टिस मनोज जैन की एकल पीठ के समक्ष सुनी जाएगी।

वहीं, केजरीवाल, सिसोदिया, संजय सिंह और सौरभ भारद्वाज समेत अन्य AAP नेताओं के खिलाफ दायर आपराधिक अवमानना मामले की सुनवाई जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की खंडपीठ करेगी। दोनों मामलों पर मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई निर्धारित बताई जा रही है।

ट्रायल कोर्ट का फैसला क्या था

गौरतलब है कि निचली अदालत ने 1,100 से अधिक पैराग्राफ के अपने विस्तृत फैसले में केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। ट्रायल कोर्ट ने माना था कि अभिलेख पर उपलब्ध साक्ष्यों से स्पष्ट होता है कि अब रद्द हो चुकी आबकारी नीति एक विचार-विमर्श और परामर्श आधारित प्रक्रिया का परिणाम थी, तथा अभियोजन पक्ष किसी बड़ी आपराधिक साजिश को प्रमाणित करने में असफल रहा।

CBI का पक्ष

दिल्ली हाईकोर्ट में दायर अपनी पुनर्विचार याचिका में CBI ने आरोप लगाया है कि तत्कालीन AAP सरकार द्वारा तैयार की गई आबकारी नीति में कुछ चुनिंदा शराब व्यापारियों को लाभ पहुँचाने के लिए जानबूझकर हेरफेर किया गया था और इसके बदले रिश्वत ली गई थी। CBI इस आधार पर बरी करने के फैसले को उलटवाना चाहती है।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली आबकारी नीति मामला राजनीतिक और न्यायिक दोनों मोर्चों पर चर्चा के केंद्र में बना हुआ है। दोनों नई बेंचों की पहली सुनवाई मंगलवार को होने की उम्मीद है, जिसके बाद आगे की कार्यवाही की दिशा स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

ट्रायल कोर्ट के 1,100 पैराग्राफ के विस्तृत फैसले को CBI की चुनौती यह सवाल उठाती है कि क्या अभियोजन के पास वास्तव में नए तथ्य हैं, या यह केवल राजनीतिक रूप से संवेदनशील फैसले को उलटने का प्रयास है — इसका उत्तर जस्टिस मनोज जैन की पीठ को देना होगा।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली हाईकोर्ट ने आबकारी नीति मामले में दो नई बेंच क्यों गठित कीं?
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा द्वारा 14 मई को मामले से खुद को अलग करने के बाद हाईकोर्ट ने CBI की पुनर्विचार याचिका और आपराधिक अवमानना मामले के लिए अलग-अलग बेंच बनाना आवश्यक समझा। जस्टिस शर्मा ने कहा था कि उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर चलाया गया अभियान आपराधिक अवमानना की श्रेणी में आता है।
CBI की पुनर्विचार याचिका में क्या माँग की गई है?
CBI ने हाईकोर्ट से ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को पलटने की माँग की है जिसमें केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य सभी आरोपियों को बरी किया गया था। CBI का आरोप है कि आबकारी नीति में चुनिंदा शराब व्यापारियों को लाभ पहुँचाने के लिए हेरफेर की गई और इसके बदले रिश्वत ली गई।
अवमानना मामले में किन AAP नेताओं के नाम हैं?
आपराधिक अवमानना मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और सौरभ भारद्वाज समेत अन्य AAP नेताओं के नाम हैं। इस मामले की सुनवाई अब जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की खंडपीठ करेगी।
ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल और अन्य को बरी क्यों किया था?
ट्रायल कोर्ट ने 1,100 से अधिक पैराग्राफ के अपने फैसले में कहा था कि उपलब्ध साक्ष्यों से स्पष्ट है कि आबकारी नीति एक विधिवत परामर्श प्रक्रिया का नतीजा थी और अभियोजन पक्ष किसी बड़ी आपराधिक साजिश को साबित करने में विफल रहा।
दोनों मामलों पर अगली सुनवाई कब होगी?
दोनों नई बेंचों के समक्ष पहली सुनवाई मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट में होने की उम्मीद है। इसके बाद आगे की कार्यवाही की तारीखें तय होंगी।
राष्ट्र प्रेस
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