पटना-सीवान एनकाउंटर पर सत्तापक्ष सख्त: 'अपराधी अपराध छोड़ें या बिहार छोड़ें'
सारांश
मुख्य बातें
बिहार में पटना और सीवान में हुए एनकाउंटर के बाद 18 मई को सत्तापक्ष के नेताओं ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि अपराधियों के पास दो ही विकल्प हैं — या तो अपराध छोड़ें, या बिहार। पटना में एक शिक्षक को गोली मारने के मामले में पुलिस ने एनकाउंटर के बाद दो आरोपियों को गिरफ्तार किया, जबकि सीवान में एनकाउंटर के दौरान एक अपराधी को घायल अवस्था में पकड़ा गया।
मंत्री और नेताओं की प्रतिक्रिया
मंत्री संतोष सुमन ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'बिहार में कानून का राज है। जो भी शांति व्यवस्था को भंग करेगा और दुस्साहस करेगा, उसे दंडित किया जाएगा।' उन्होंने यह भी कहा कि अपराधियों का मनोबल कमज़ोर होने से ही राज्य में शांति स्थापित होगी और सरकार अपना काम कर रही है।
सुमन ने आगे कहा, 'अपराधी कानून व्यवस्था को नहीं मानते। वे पुलिसकर्मियों पर भी गोली चला देते हैं। ऐसे में जवाबी कार्रवाई निश्चित है। इस तरह की कार्रवाई ही अपराधियों के लिए सबक बनेगी।'
भाजपा और सहयोगी दलों का रुख
बिहार भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा, 'बिहार में पुलिस को खुली छूट दी जा चुकी है। अपराधियों को किसी भी हालत में नहीं छोड़ा जाएगा। अगर कोई अपराध होता है, तो पुलिस को कार्रवाई की बिल्कुल खुली छूट है।'
एलजेपी (रामविलास) के सांसद अरुण भारती ने कहा, 'अपराधी अगर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने के बजाय फायरिंग करेंगे, तो पुलिसकर्मी भी अटैक मोड में रहेंगे। पुलिस अपनी उचित कानूनी कार्रवाई कर रही है।'
जदयू का स्पष्ट संदेश
जनता दल (यूनाइटेड) के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री ने पुलिस को अपराधियों पर कार्रवाई का स्पष्ट निर्देश दिया है। उन्होंने एक अहम बात जोड़ी — 'जो लोग पुलिस पर हमला करेंगे या पुलिस की गोली का शिकार बनेंगे, वे यह न समझें कि उन्हें दिव्यांग पेंशन मिल जाएगी। अपराधियों के लिए यह सुविधा प्राप्त नहीं होगी।'
एनकाउंटर की पृष्ठभूमि
पटना में एक शिक्षक पर हुए जानलेवा हमले के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एनकाउंटर में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। इससे पहले सीवान में भी पुलिस ने एनकाउंटर किया, जिसमें एक कथित अपराधी को घायल अवस्था में पकड़ा गया। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ है।
आगे क्या होगा
सत्तापक्ष के इस एकजुट बयान से संकेत मिलता है कि राज्य सरकार निकट भविष्य में पुलिस कार्रवाई पर और सख्ती बरत सकती है। विपक्ष की प्रतिक्रिया और न्यायिक निगरानी की माँग अब इस बहस का अगला पड़ाव होगी।