दिल्ली शराब घोटाला: केजरीवाल और सिसोदिया को मिली बड़ी राहत, कोर्ट ने किया बरी

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दिल्ली शराब घोटाला: केजरीवाल और सिसोदिया को मिली बड़ी राहत, कोर्ट ने किया बरी

सारांश

दिल्ली शराब घोटाले के सीबीआई मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को राऊज एवेन्यू कोर्ट ने बरी कर दिया। जानिए इस मामले की पूरी कहानी और कोर्ट के फैसले की मुख्य बातें।

Key Takeaways

  • अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को राऊज एवेन्यू कोर्ट ने बरी किया।
  • कोर्ट ने सीबीआई की चार्जशीट में गंभीर कमियों के लिए फटकार लगाई।
  • यह मामला दिल्ली की आबकारी नीति से संबंधित है।
  • सीबीआई ने महज अनुमान के आधार पर साजिश की कहानी गढ़ने की कोशिश की।
  • दिल्ली सरकार की नीति में कोई गंभीर भ्रष्टाचार नहीं पाया गया।

नई दिल्ली, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली की आबकारी नीति से जुड़े सीबीआई मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को एक महत्वपूर्ण राहत मिली है। शुक्रवार को दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के इन दोनों प्रमुख नेताओं को बरी कर दिया।

कोर्ट की सुनवाई के दौरान अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया अदालत में उपस्थित हुए, जबकि अन्य आरोपी जैसे कविता, अमनदीप ढल और कई अन्य ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी दी। इस अवसर पर, जज ने सभी वकीलों का आभार व्यक्त किया और अपना निर्णय सुनाया।

राऊज एवेन्यू कोर्ट ने अपने फैसले में बताया कि कथित शराब घोटाले से जुड़े सीबीआई केस में सभी 23 आरोपियों को बरी किया गया। कोर्ट ने सीबीआई को जांच में कमियों के लिए सख्त शब्दों में फटकार लगाई और कहा कि आबकारी नीति में कोई गंभीर साजिश या आपराधिक इरादा नहीं था।

कोर्ट ने सीबीआई की चार्जशीट पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें कई कमियां हैं, जिनका किसी गवाह या बयान से कोई प्रमाण नहीं है। अदालत ने यह भी बताया कि अभियोजन पक्ष का मामला न्यायिक जांच में खड़ा नहीं हो सका, क्योंकि सीबीआई ने केवल अनुमान के आधार पर साजिश की कहानी गढ़ने का प्रयास किया।

सीबीआई की तरफ से कंफेशनल स्टेटमेंट की कॉपी जमा नहीं करने पर जज जीतेंद्र सिंह ने अपनी नाराजगी व्यक्त की। चार्जशीट में 'साउथ लॉबी' शब्द के उपयोग पर भी अदालत ने आपत्ति की।

यह मामला दिल्ली सरकार की 2021-22 की आबकारी (शराब) नीति से संबंधित है, जिसमें भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे। दिल्ली के मुख्य सचिव रहे नरेश कुमार की रिपोर्ट के बाद उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी।

बाद में सीबीआई ने मुकदमा दर्ज करते हुए जांच आरंभ की। 26 फरवरी 2023 को सीबीआई ने मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया। 21 मार्च 2024 को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने लंबी पूछताछ के बाद अरविंद केजरीवाल को हिरासत में लिया। इसके बाद 26 जून को सीबीआई ने उन्हें जेल से ही अपनी हिरासत में ले लिया।

Point of View

यह निर्णय न केवल आम आदमी पार्टी के लिए राहत का कारण है, बल्कि यह न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता का भी संकेत है। सीबीआई की जांच पर उठाए गए सवालों ने यह दर्शाया कि राजनीतिक और कानूनी प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है।
NationPress
28/02/2026

Frequently Asked Questions

अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को क्यों बरी किया गया?
कोर्ट ने कहा कि सीबीआई की चार्जशीट में कई कमियां हैं और अभियोजन पक्ष का मामला न्यायिक जांच में टिक नहीं पाया।
यह मामला किस नीति से संबंधित है?
यह मामला दिल्ली सरकार की 2021-22 की आबकारी नीति से संबंधित है, जिसमें भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे।
सीबीआई को किस बात के लिए फटकार लगाई गई?
कोर्ट ने सीबीआई को जांच में कमियों के लिए सख्त शब्दों में फटकार लगाई और कहा कि कोई गंभीर साजिश या आपराधिक इरादा नहीं था।
इस मामले में कितने आरोपी थे?
इस मामले में कुल 23 आरोपी थे, जिन्हें कोर्ट ने बरी किया।
सीबीआई की कार्रवाई कब शुरू हुई?
सीबीआई ने मामले में 2023 में जांच शुरू की थी, जिसके बाद मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया गया।
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