दिल्ली शराब नीति: जज स्वर्णकांता शर्मा ने कहा— अपमानजनक सोशल मीडिया पोस्टों पर होगी अवमानना कार्यवाही
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने 14 मई 2026 को खुली अदालत में घोषणा की कि वे उन लोगों के विरुद्ध अवमानना कार्यवाही शुरू करेंगी, जिन्होंने दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति मामले की सुनवाई के संदर्भ में उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित तौर पर 'अत्यंत अपमानजनक और मानहानिकारक' सामग्री प्रसारित की। यह मामला आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं — पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और नेता दुर्गेश पाठक सहित कुल 23 आरोपियों के बरी होने को चुनौती देने वाली केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की पुनरीक्षण याचिका से जुड़ा है।
न्यायाधीश ने क्या कहा
न्यायमूर्ति शर्मा ने अदालत में स्पष्ट शब्दों में कहा, 'आज मुझे एमिकस क्यूरी की घोषणा करनी थी… कुछ वरिष्ठ न्यायाधीशों ने सहर्ष स्वीकार कर लिया था। हालांकि, कुछ प्रतिवादियों ने मेरे खिलाफ अत्यंत अपमानजनक और मानहानिकारक सामग्री पोस्ट की है। मैं चुप नहीं रह सकती।' उन्होंने यह भी कहा कि वे शाम 5 बजे इस विषय में विस्तृत आदेश पारित करेंगी।
न्यायाधीश ने यह भी स्पष्ट किया कि अवमानना कार्यवाही पर विचार केवल आरोपियों तक सीमित नहीं रहेगा — सोशल मीडिया पर अपमानजनक सामग्री प्रसारित करने में कथित रूप से शामिल अन्य व्यक्तियों को भी इसके दायरे में लिया जाएगा।
मामले की पृष्ठभूमि
निचली अदालत ने 1,100 से अधिक पैराग्राफ के विस्तृत फैसले में सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि रिकॉर्ड से स्पष्ट होता है कि अब रद्द की जा चुकी उत्पाद शुल्क नीति एक परामर्श और विचार-विमर्श प्रक्रिया का परिणाम थी, और अभियोजन पक्ष के व्यापक षड्यंत्र के आरोप को खारिज कर दिया था।
CBI ने दिल्ली उच्च न्यायालय में अपनी पुनरीक्षण याचिका में आरोप लगाया है कि तत्कालीन दिल्ली सरकार द्वारा लागू की गई उत्पाद शुल्क नीति में रिश्वत के बदले चुनिंदा शराब व्यापारियों के पक्ष में हेरफेर किया गया था। न्यायमूर्ति शर्मा ने 9 मार्च को इस याचिका पर प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया था।
AAP नेताओं का रुख और एमिकस क्यूरी विवाद
AAP नेताओं ने न्यायमूर्ति शर्मा से मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने की मांग वाली याचिकाएं दायर की थीं, जिन्हें अदालत ने खारिज कर दिया। इसके बाद केजरीवाल, सिसोदिया और पाठक ने कार्यवाही से स्वयं को अलग कर लिया।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने पहले संकेत दिया था कि वह इन तीनों नेताओं के लिए वरिष्ठ अधिवक्ताओं को एमिकस क्यूरी के रूप में नियुक्त करेगा। पिछले सप्ताह कुछ वरिष्ठ अधिवक्ताओं की सहमति की प्रतीक्षा में सुनवाई स्थगित भी की गई थी।
निचली अदालत की टिप्पणियों पर रोक
दिल्ली उच्च न्यायालय ने CBI के खिलाफ निचली अदालत द्वारा की गई प्रतिकूल टिप्पणियों और एक CBI अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश पर पहले ही रोक लगा दी थी। यह ऐसे समय में आया है जब उच्च न्यायालय इस संवेदनशील मामले में CBI की अपील पर व्यापक सुनवाई कर रहा है।
आगे क्या होगा
न्यायमूर्ति शर्मा के विस्तृत आदेश के बाद यह स्पष्ट होगा कि अवमानना नोटिस किन-किन व्यक्तियों को जारी किए जाएंगे। गौरतलब है कि न्यायिक अवमानना कार्यवाही अदालत की गरिमा और न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए एक असाधारण कदम है, और इसका दायरा आरोपियों से परे आम नागरिकों तक भी विस्तारित हो सकता है।