क्या 'फांसी घर' विवाद पर विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट में केजरीवाल समेत चार 'आप' नेताओं पर अवमानना का आरोप लगा है?
सारांश
Key Takeaways
- विशेषाधिकार समिति ने चार नेताओं को अवमानना का दोषी ठहराया।
- समिति ने अनुशासन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
- विपक्षी दलों का विरोध और आरोप महत्वपूर्ण हैं।
- राजनीति में पारदर्शिता की आवश्यकता।
- फांसी घर विवाद ने राजनीतिक तनाव को बढ़ाया।
नई दिल्ली, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व स्पीकर राम निवास गोयल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और पूर्व डिप्टी स्पीकर राखी बिड़लान को एक औपचारिक पत्र जारी किया है। ये पत्र विधानसभा की विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट पर आधारित हैं, जिसमें चारों नेताओं को समिति की अवमानना का दोषी ठहराया गया है।
पत्रों में यह स्पष्ट किया गया है कि समिति ने गहन जांच के बाद निष्कर्ष निकाला कि बार-बार नोटिस जारी करने, पर्याप्त अवसर प्रदान करने और किसी न्यायालय से रोक या निर्देश न होने के बावजूद ये नेता जानबूझकर समिति के सामने पेश नहीं हुए। यह आचरण सदन और समिति की अवमानना माना गया है।
समिति ने सिफारिश की है कि सदन द्वारा इनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। पत्रों में संबंधित व्यक्तियों से समिति की पहली रिपोर्ट में दिए गए निष्कर्षों और सिफारिशों पर ध्यान देने का आग्रह किया गया है।
यह मामला 'फांसी घर' विवाद से संबंधित है। नवंबर 2025 में दिल्ली विधानसभा परिसर में कथित 'फांसी घर' का उद्घाटन करने का आरोप लगा था। पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, राम निवास गोयल और राखी बिड़लान ने इसकी शुरुआत में भाग लिया था। विपक्षी दलों, खासकर भाजपा ने इसे 'झूठा' और 'फर्जी' बताया, साथ ही विधानसभा पर 1.4 करोड़ रुपए खर्च होने का दावा किया। विशेषाधिकार समिति ने इसकी जांच की और पाया कि ऐसा कोई 'फांसी घर' अस्तित्व में नहीं है।
समिति ने 13 नवंबर 2025 और 20 नवंबर 2025 को बुलाई गई बैठकों में इन नेताओं की अनुपस्थिति को 'जानबूझकर' और 'बिना उचित कारण' माना। 6 जनवरी 2026 को विधानसभा ने समिति की पहली रिपोर्ट को अपनाया और एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें इन चारों को समिति के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होने, अनुपस्थिति का कारण बताने और 'फांसी घर' से जुड़ी कोई जानकारी या दस्तावेज देने का निर्देश दिया गया। प्रस्ताव में कहा गया कि यदि वे पेश नहीं होते, तो स्पीकर आवश्यक कदम उठा सकते हैं।
जारी पत्र इस प्रस्ताव के अनुपालन में हैं। विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट के अनुसार, कोई भी रोक न होने के बावजूद अनुपस्थिति को गंभीर उल्लंघन माना गया।