नासा के आर्टेमिस II मिशन से मिली पृथ्वी की अद्भुत छवियाँ, 'ब्लू मार्बल' पर ऑरोरा लाइट्स नजर आईं
सारांश
Key Takeaways
- नासा ने आर्टेमिस II मिशन से अद्भुत तस्वीरें जारी कीं।
- 'ब्लू मार्बल' पर ऑरोरा लाइट्स का नज़ारा प्रदर्शित हुआ।
- यह मिशन 1972 के बाद पहले मानव चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगाने वाले मिशन का हिस्सा है।
- क्रू ओरियन कैप्सूल में बैठकर चंद्रमा के दूर की तरफ से गुजरेगा।
- पृथ्वी से 90,000 मील दूर बढ़ते हुए तस्वीरें ली गईं।
नई दिल्ली, 4 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अपने ऐतिहासिक आर्टेमिस II चंद्रमा मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा कैद की गई पृथ्वी की पहली अद्भुत तस्वीरें जारी की हैं। इन तस्वीरों में 'ब्लू मार्बल' यानी हमारी पृथ्वी बहुत खूबसूरत नज़र आ रही है।
नासा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इन तस्वीरों को साझा करते हुए कहा, “पिछले 54 वर्षों में हमने बहुत लंबा सफर तय किया है, लेकिन एक बात स्थिर रही है, और वो है अंतरिक्ष से हमारा घर यानी पृथ्वी, जो अद्भुत दिखाई देती है।”
नासा ने दो तुलनात्मक तस्वीरें साझा की हैं। बाईं ओर की तस्वीर 1972 में 'अपोलो-17' मिशन के चालक दल द्वारा ली गई थी, जबकि दाईं ओर की तस्वीर आर्टेमिस-II के अंतरिक्ष यात्रियों ने हाल ही में खींची है। ये तस्वीरें स्पेसक्राफ्ट के भीतर से ली गई पहली छवियाँ हैं। आर्टेमिस II मिशन के कमांडर और नासा के अनुभवी एस्ट्रोनॉट रीड वाइजमैन ने ट्रांसलूनर इंजेक्शन बर्न पूरा करने के बाद ओरियन अंतरिक्ष यान की खिड़की से ये तस्वीरें लीं। एक तस्वीर में पृथ्वी सूर्य को ढकती हुई नजर आ रही है, जिससे उत्तर और दक्षिण ध्रुवों पर दो 'ऑरोरा' (ध्रुवीय ज्योति) की चमक स्पष्ट दिखाई दे रही है। साथ ही, दाईं ओर नीचे की ओर 'जोडिएकल लाइट' भी स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है।
दूसरी तस्वीर में पृथ्वी घने बादलों के बीच दिखाई दे रही है। जैसे-जैसे स्पेसक्राफ्ट आगे बढ़ता है, पृथ्वी धीरे-धीरे दूर होती जाती है। इस समय क्रू पृथ्वी से लगभग 90,000 मील (लगभग 1.45 लाख किलोमीटर) की दूरी पर है और चंद्रमा की ओर बढ़ रहा है।
आर्टेमिस II मिशन में चार एस्ट्रोनॉट्स शामिल हैं, जिनमें तीन अमेरिकी (रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर और क्रिस्टीना कोच) और एक कनाडाई (जेरेमी हैनसन) शामिल हैं। यह मिशन 1972 के बाद पहला ऐसा मिशन है जिसमें मानव चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगाएंगे, लेकिन चंद्रमा की सतह पर नहीं उतरेंगे। क्रू ओरियन कैप्सूल में बैठकर चंद्रमा के दूर की तरफ से गुजरेगा और फिर पृथ्वी पर वापस लौट आएगा।