उष्ट्रासन से दूर होगी दिनभर की सुस्ती और थकान, आयुष मंत्रालय ने बताई सही विधि

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उष्ट्रासन से दूर होगी दिनभर की सुस्ती और थकान, आयुष मंत्रालय ने बताई सही विधि

सारांश

दिनभर की सुस्ती और जल्दी थकान से परेशान हैं? आयुष मंत्रालय का जवाब है — उष्ट्रासन। विश्व योग दिवस से पहले चलाए जा रहे अभियान में मंत्रालय ने इस आसन की विधि, लाभ और सावधानियाँ साझा की हैं, जो रीढ़, थायरॉइड और पाचन तंत्र को एक साथ लाभ पहुँचाता है।

मुख्य बातें

आयुष मंत्रालय ने उष्ट्रासन को दिनभर की सुस्ती, थकान और पीठ-कंधों की अकड़न का प्रभावी समाधान बताया है।
विश्व योग दिवस (21 जून) से पहले मंत्रालय प्रतिदिन एक नए योगासन की जानकारी साझा कर रहा है।
उष्ट्रासन रीढ़ की लचीलापन , थायरॉइड ग्रंथि की सक्रियता और पाचन तंत्र को मजबूत करता है।
शुरुआत में 10 से 20 सेकंड अभ्यास करने की सलाह दी गई है, बाद में समय बढ़ाएँ।
पीठ, गर्दन या घुटनों में गंभीर चोट, उच्च/निम्न रक्तचाप और गर्भावस्था में विशेषज्ञ सलाह अनिवार्य।

आयुष मंत्रालय ने 18 मई 2026 को उष्ट्रासन को दिनभर छाई रहने वाली सुस्ती, जल्दी थकान और पीठ-कंधों की अकड़न से राहत पाने का प्रभावी उपाय बताया है। विश्व योग दिवस की तैयारी के तहत चलाए जा रहे जागरूकता अभियान के अंतर्गत मंत्रालय प्रतिदिन एक नए योगासन की विधि, लाभ और सावधानियाँ साझा कर रहा है।

क्यों ज़रूरी है उष्ट्रासन

आधुनिक जीवनशैली में घंटों एक ही मुद्रा में बैठे रहने से रीढ़ की हड्डी में अकड़न, कंधों में दर्द और ऊर्जा की कमी आम शिकायतें बन चुकी हैं। आयुष मंत्रालय के अनुसार, उष्ट्रासन इन्हीं समस्याओं को लक्षित करता है — यह रीढ़ को लचीला बनाता है, छाती को खोलता है और पीठ की माँसपेशियों को मजबूती देता है। योग विशेषज्ञों का कहना है कि रोज़ाना कुछ मिनट के नियमित अभ्यास से थकान और मानसिक तनाव में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।

उष्ट्रासन के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ

उष्ट्रासन के नियमित अभ्यास से पाचन तंत्र सुदृढ़ होता है और थायरॉइड ग्रंथि सक्रिय बनी रहती है। अस्थमा जैसी श्वसन संबंधी समस्याओं में भी इससे राहत मिलती है। इसके साथ ही यह आसन शारीरिक मुद्रा (पोस्चर) में सुधार कर आत्मविश्वास और मानसिक शांति को भी बढ़ावा देता है।

अभ्यास की सही विधि

घुटनों के बल बैठ जाएँ और पैरों के अंगूठे पीछे की ओर रखें। घुटनों को कूल्हे की चौड़ाई के बराबर अलग रखें। दोनों हाथों को कमर पर रखकर धीरे-धीरे पीछे की ओर झुकें, फिर हाथों को एड़ियों पर टिकाएँ। छाती को आगे और ऊपर की ओर उठाएँ तथा गर्दन को पीछे झुकाकर छत की ओर देखें। इस मुद्रा में 10 से 20 सेकंड रुकें, फिर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौटें। अभ्यास के साथ समय धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है।

किन्हें बरतनी चाहिए सावधानी

पीठ, गर्दन, घुटनों या कंधों में गंभीर चोट होने पर यह आसन न करें। उच्च या निम्न रक्तचाप से पीड़ित व्यक्ति इसे केवल चिकित्सक की सलाह के बाद ही करें। गर्भवती महिलाएँ और गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोग किसी योग विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में ही अभ्यास करें। सांस को सामान्य रखें और जबरदस्ती झुकने से बचें।

विश्व योग दिवस अभियान का हिस्सा

विश्व योग दिवस प्रतिवर्ष 21 जून को मनाया जाता है। इस वर्ष आयुष मंत्रालय दिवस से पहले के हफ्तों में प्रतिदिन एक योगासन की जानकारी साझा कर रहा है, ताकि आम नागरिक योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना सकें। उष्ट्रासन इसी श्रृंखला की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जो विशेष रूप से डेस्क पर काम करने वाले लोगों के लिए उपयोगी बताई गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन डिजिटल माध्यम से दी जाने वाली योग सलाह की एक सीमा है — हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति अलग होती है। उष्ट्रासन जैसे बैकबेंड आसन उन लोगों के लिए जोखिम भरे हो सकते हैं जिन्हें स्पॉन्डिलाइटिस या डिस्क की समस्या है, और इसका स्पष्ट उल्लेख ज़रूरी है। मंत्रालय को सामान्यीकृत सलाह के साथ-साथ 'पहले किसी प्रशिक्षित योग शिक्षक से मिलें' जैसी स्पष्ट चेतावनी भी प्रमुखता से देनी चाहिए, ताकि उत्साह में किया गया अभ्यास लाभ की जगह नुकसान न पहुँचाए।
RashtraPress
18 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उष्ट्रासन क्या है और इसे कैसे करते हैं?
उष्ट्रासन एक पीछे की ओर झुकने वाला योगासन है जिसमें घुटनों के बल बैठकर हाथों को एड़ियों पर टिकाया जाता है और छाती को ऊपर उठाया जाता है। शुरुआत में इसे 10 से 20 सेकंड तक करने की सलाह दी जाती है और धीरे-धीरे समय बढ़ाया जाता है।
उष्ट्रासन से कौन-कौन सी स्वास्थ्य समस्याएँ दूर होती हैं?
आयुष मंत्रालय के अनुसार उष्ट्रासन से पीठ और कंधों की अकड़न, थकान, तनाव और कम ऊर्जा की समस्या दूर होती है। इसके अलावा यह थायरॉइड ग्रंथि को सक्रिय रखता है, पाचन तंत्र को मजबूत करता है और अस्थमा जैसी श्वसन समस्याओं में राहत देता है।
उष्ट्रासन किन लोगों को नहीं करना चाहिए?
पीठ, गर्दन, घुटनों या कंधों में गंभीर चोट या दर्द होने पर उष्ट्रासन से बचना चाहिए। उच्च या निम्न रक्तचाप के मरीज़ इसे केवल डॉक्टर की सलाह से करें, और गर्भवती महिलाएँ तथा गंभीर बीमारी से पीड़ित लोग किसी योग विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में ही अभ्यास करें।
आयुष मंत्रालय का योग अभियान क्यों चलाया जा रहा है?
विश्व योग दिवस (21 जून) से पहले आयुष मंत्रालय जागरूकता अभियान के तहत प्रतिदिन एक योगासन की विधि, लाभ और सावधानियाँ साझा कर रहा है। इसका उद्देश्य आम नागरिकों को योग को अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल करने के लिए प्रेरित करना है।
उष्ट्रासन का अभ्यास कितने समय तक करना चाहिए?
शुरुआत में उष्ट्रासन को केवल 10 से 20 सेकंड तक करने की सलाह दी जाती है। नियमित अभ्यास के साथ धीरे-धीरे समय बढ़ाया जा सकता है। किसी भी स्थिति में सांस को जबरदस्ती रोकें नहीं और शरीर पर अनावश्यक दबाव न डालें।
राष्ट्र प्रेस
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