राजभर का राहुल-अखिलेश पर हमला: 'विदेश जाकर भारत को कटघरे में खड़ा करते हैं'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने 18 मई 2026 को लखनऊ में कई अहम मुद्दों पर विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखे प्रहार करते हुए कहा कि ये नेता देश के बाहर जाकर भारत की छवि को नुकसान पहुँचाते हैं और चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर भी सवाल उठाते हैं।
मोदी को स्वीडन सम्मान पर राजभर की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्वीडन का सर्वोच्च सम्मान मिलने पर राजभर ने कहा कि मोदी जब भी किसी देश में जाते हैं, वे शांति का संदेश लेकर जाते हैं। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री का प्रयास रहता है कि द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत कर आयात-निर्यात की प्रक्रिया को सुचारु बनाया जाए।
राहुल गांधी पर सीधा निशाना
नीट परीक्षा रद्द होने पर राहुल गांधी के बयान को लेकर राजभर ने कहा कि राहुल गांधी की बातों को कोई गंभीरता से नहीं लेता। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी विदेश दौरों पर भारत को ही कठघरे में खड़ा करते हैं और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगाते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष लगातार चुनावी प्रक्रिया को लेकर सरकार पर दबाव बनाए हुए है।
लाउडस्पीकर विवाद पर स्पष्टीकरण
मंत्री जयवीर सिंह के लाउडस्पीकर संबंधी बयान पर राजभर ने सरकार का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने धीमी आवाज़ में लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति दी है। उनके अनुसार, भोर में चार बजे नमाज़ के वक्त लोग नींद में होते हैं, इसलिए तेज़ आवाज़ उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अज़ान पर कोई रोक नहीं है और धीमी आवाज़ में लाउडस्पीकर बजाने पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
मंत्रिमंडल विस्तार पर विपक्ष को करारा जवाब
यूपी में मंत्रियों के विभागों के बँटवारे पर राजभर ने कहा कि संविधान के अनुसार 60 मंत्री होने चाहिए थे और सरकार ने यह संख्या पूरी कर सभी को विभाग भी आवंटित कर दिए। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज़ में कहा कि विपक्ष को अब चिंता से मुक्त कर दिया गया है — वे आराम से सो सकते हैं, सुबह देर से उठकर ट्वीट करें और दोपहर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर लें।
अखिलेश यादव पर कटाक्ष
राजभर ने अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा और कहा कि उनकी सरकार में जिन मंत्रियों को ये विभाग दिए गए थे, वे भी 'फ्रीज़' थे — यानी उनके कार्यकाल में भी इन विभागों में कोई उल्लेखनीय काम नहीं हुआ। गौरतलब है कि यूपी में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद से विपक्ष लगातार विभाग आवंटन की प्रासंगिकता पर सवाल उठा रहा है।