मत्स्यासन से दूर करें आंखों की थकान, गले की जकड़न और पीठ दर्द — आयुष मंत्रालय की सलाह
सारांश
मुख्य बातें
आयुष मंत्रालय ने विश्व योग दिवस 2025 से पूर्व मत्स्यासन (फिश पोज़) को आंखों की थकान, गले की जकड़न और पीठ की अकड़न से राहत पाने के लिए एक प्रभावी योगाभ्यास के रूप में अनुशंसित किया है। मंत्रालय के अनुसार, लगातार स्क्रीन के सामने बैठकर काम करने वाले लोगों में ये शारीरिक समस्याएं तेज़ी से बढ़ रही हैं और नियमित योग अभ्यास इनसे निपटने में सहायक हो सकता है।
क्यों बढ़ रही हैं ये समस्याएं
आजकल की जीवनशैली में कंप्यूटर, मोबाइल और लैपटॉप पर घंटों बिताना आम हो गया है। लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहने से आंखों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, गर्दन और गले की मांसपेशियां कड़ी हो जाती हैं और रीढ़ की हड्डी पर तनाव बढ़ता है। मंत्रालय का कहना है कि शरीर इन्हीं संकेतों के ज़रिए यह बताता है कि उसे अतिरिक्त देखभाल की ज़रूरत है।
मत्स्यासन के प्रमुख लाभ
योग विशेषज्ञों के अनुसार, मत्स्यासन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है और छाती को खोलता है, जिससे सांस लेने की क्षमता बेहतर होती है। कंधों व गर्दन का तनाव कम होता है और आंखों की थकान में राहत मिलती है। नियमित अभ्यास से गर्दन, गले और पीठ की मांसपेशियां मज़बूत होती हैं। इसके अतिरिक्त, यह आसन थायरॉइड ग्रंथि को स्वस्थ रखने में भी सहायक माना जाता है और शरीर में ऊर्जा का संचार बढ़ाता है।
मत्स्यासन की सही विधि
आयुष मंत्रालय द्वारा साझा की गई विधि के अनुसार, सबसे पहले मैट पर पीठ के बल लेट जाएं। हथेलियों को शरीर के नीचे रखें और कोहनियां ज़मीन पर टिकाएं। इसके बाद सांस भरते हुए छाती को ऊपर उठाएं और सिर को पीछे की ओर ले जाएं, जब तक सिर का ऊपरी हिस्सा ज़मीन को न छू ले। कुछ सेकंड इस मुद्रा में रहें, फिर सामान्य स्थिति में लौट आएं।
किन्हें सावधानी बरतनी चाहिए
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि शुरुआत में किसी योग विशेषज्ञ की देखरेख में ही अभ्यास करें। गंभीर बीमारी से ग्रस्त व्यक्तियों और गर्भवती महिलाओं को किसी विशेषज्ञ की सलाह लेने के बाद ही इस आसन का अभ्यास शुरू करना चाहिए।
आयुष मंत्रालय की व्यापक पहल
विश्व योग दिवस के निकट आते ही भारत सरकार का आयुष मंत्रालय आमजन तक योग के महत्व को पहुंचाने के लिए लगातार जानकारियां साझा कर रहा है। मंत्रालय का मानना है कि रोज़ाना कुछ मिनटों का सचेत योग अभ्यास जीवनशैली में बड़ा सकारात्मक बदलाव ला सकता है। आने वाले दिनों में मंत्रालय की ओर से अन्य योगासनों पर भी मार्गदर्शन जारी किए जाने की संभावना है।