मत्स्यासन: जानें इसके सही अभ्यास और स्वास्थ्य लाभ
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। इनमें से एक महत्वपूर्ण आसन है मत्स्यासन, जो पेट की चर्बी को घटाने और रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने में सहायक है।
मत्स्यासन दो शब्दों से मिलकर बना है: 'मत्स्य', जिसका अर्थ है 'मछली', और 'आसन', जिसका अर्थ है 'मुद्रा'। यह एक विशेष आसन है जिसमें शरीर का आकार मछली के समान दिखता है, इसलिए इसे मत्स्यासन कहा जाता है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इसे महत्वपूर्ण योगासन के रूप में मान्यता दी है। मंत्रालय के अनुसार, यह आसन छाती, गर्दन, और पेट के स्वास्थ्य के लिए विशेष लाभकारी होता है। यह फेफड़ों की कार्यक्षमता को बढ़ाता है और रीढ़ की हड्डी में लचीलापन लाता है।
शुरुआती अभ्यासकर्ता इसे किसी विशेषज्ञ की देखरेख में ही करें। इसे करने के लिए सबसे पहले पीठ के बल लेटें। पैर सीधे रखें और अपने हाथों को कूल्हों के नीचे रखें, हथेलियां नीचे की ओर। कोहनियों का सहारा लेकर, सांस लेते हुए छाती और सिर को ऊपर उठाएं। सिर के पिछले हिस्से को जमीन पर टिकाएं, लेकिन वजन कोहनियों पर रखें (गर्दन पर दबाव न डालें)। अपनी क्षमता के अनुसार कुछ सेकंड तक इसी मुद्रा में रहें और गहरी सांस लें। सामान्य स्थिति में लौटें। शुरुआत में इसे 3-5 बार दोहराएं।
शुरुआत में इसे 10-15 सेकंड तक करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं, जिससे शरीर को आराम मिलेगा। मत्स्यासन को सूर्य नमस्कार या अन्य आसनों के साथ मिलाकर अभ्यास करने से इसके लाभ कई गुना बढ़ते हैं। सुबह के समय खाली पेट इस आसन का अभ्यास करना सबसे उत्तम माना जाता है। यदि आप रोजाना सिर्फ 5-10 मिनट भी मत्स्यासन का अभ्यास करेंगे, तो आपका शरीर स्वस्थ, लचीला, और ऊर्जावान होगा।
गर्दन या पीठ की गंभीर समस्याओं वाले लोग बिना डॉक्टर या योग गुरु की सलाह के यह आसन न करें। हाई ब्लड प्रेशर या हृदय रोग से पीड़ित व्यक्तियों को सावधानी बरतनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं को इस आसन से बचना चाहिए।