वीडी सतीशन केरल के 13वें मुख्यमंत्री, तिरुवनंतपुरम में आज शपथ ग्रहण समारोह
सारांश
मुख्य बातें
केरल में कांग्रेस की अगुवाई वाली संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार का शपथ ग्रहण समारोह सोमवार, 18 मई को तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में आयोजित होगा, जहाँ वीडी सतीशन राज्य के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करेंगे। यह समारोह विधानसभा चुनाव में यूडीएफ की निर्णायक जीत के बाद एक दशक में पहली बार गठबंधन की सत्ता में वापसी का प्रतीक बनेगा।
मुख्य घटनाक्रम
शपथ ग्रहण से एक दिन पूर्व रविवार को सतीशन ने著名 धर्मगुरु कार्डिनल मोरन मोर बेसेलियोस क्लीमिस — जिन्हें क्लीमिस बावा के नाम से भी जाना जाता है — से मुलाकात की। कार्डिनल वर्तमान में सिरो-मलंकारा कैथोलिक चर्च के मेजर आर्कबिशप-कैथोलिकोस और त्रिवेंद्रम के मेजर आर्कबिशप के रूप में सेवाएँ दे रहे हैं। यह मुलाकात केरल की विविध धार्मिक-सामाजिक संरचना में नई सरकार की समावेशी पहल के रूप में देखी जा रही है।
कैबिनेट की संभावित संरचना
नई सरकार 21 सदस्यीय कैबिनेट के साथ कार्यभार संभालेगी, जिसमें मुख्यमंत्री का पद भी शामिल है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस को 11 मंत्री पद मिलने की संभावना है, जबकि गठबंधन सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) को 5 मंत्री पद मिल सकते हैं।
आईयूएमएल कोटे में जिन नामों पर प्राथमिकता से विचार हो रहा है, उनमें पीके कुन्हालीकुट्टी, केएम शाजी, एन शमसुद्दीन और परक्कल अब्दुल्ला शामिल हैं। हालाँकि, खबरों के अनुसार पीके बशीर को कैबिनेट में शामिल किए जाने को लेकर पार्टी के भीतर मतभेद सामने आए हैं और एक धड़ा उनकी पदोन्नति पर आपत्ति जता रहा है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति
इस ऐतिहासिक समारोह में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना है। इसके अतिरिक्त, कांग्रेस-शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की भी उपस्थिति अपेक्षित है, जो इस अवसर को राष्ट्रीय विपक्षी एकता के प्रदर्शन के रूप में भी महत्त्वपूर्ण बनाता है।
एक दशक बाद यूडीएफ की वापसी
गौरतलब है कि केरल में पिछले करीब दस वर्षों से वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) की सरकार थी। यूडीएफ की इस जीत को केरल की राजनीति में एक महत्त्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दल सत्ता में अपनी पकड़ मज़बूत करने की कोशिश में हैं।
आगे क्या
शपथ ग्रहण समारोह के साथ ही कैबिनेट की अंतिम संरचना स्पष्ट हो जाएगी, जिससे यूडीएफ के भीतर सत्ता-साझेदारी की व्यवस्था की पूरी तस्वीर सामने आएगी। नई सरकार के सामने केरल के विकास एजेंडे को आगे बढ़ाने के साथ-साथ गठबंधन की आंतरिक एकजुटता बनाए रखने की चुनौती भी होगी।