सोना ₹1,52,887 के उच्चतम स्तर पर, चांदी में 0.91% उछाल — डॉलर की कमजोरी और वैश्विक अस्थिरता से तेजी
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई, 7 मई 2025: मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर गुरुवार के शुरुआती कारोबार में सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई, जिसमें चांदी 0.91 प्रतिशत तक उछली। विशेषज्ञों के अनुसार, डॉलर इंडेक्स के 98 के नीचे बने रहने और अमेरिका-ईरान के बीच जारी कूटनीतिक तनाव ने कीमती धातुओं की माँग को हवा दी है।
MCX पर सोने और चांदी का हाल
सुबह 10:30 बजे IST तक MCX पर 5 जून 2025 के सोने के कॉन्ट्रैक्ट में 0.24 प्रतिशत यानी ₹368 की बढ़त के साथ भाव ₹1,52,500 प्रति 10 ग्राम पर पहुँच गया। इस सत्र में सोने ने ₹1,52,419 का न्यूनतम और ₹1,52,887 का उच्चतम स्तर छुआ।
वहीं, 3 जुलाई 2026 के चांदी के कॉन्ट्रैक्ट में 0.91 प्रतिशत यानी ₹2,293 की तेजी के साथ भाव ₹2,55,558 प्रति किलोग्राम पर था। चांदी ने इस सत्र में ₹2,54,722 का न्यूनतम और ₹2,57,055 का उच्चतम स्तर बनाया।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भी मजबूती
वैश्विक स्तर पर भी कीमती धातुओं में तेजी का रुख बना रहा। COMEX पर सोना 0.21 प्रतिशत की बढ़त के साथ 4,703 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था, जबकि चांदी 1.12 प्रतिशत की मजबूती के साथ 78.17 डॉलर प्रति औंस पर थी। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
तेजी की मुख्य वजहें
कारोबारियों और विश्लेषकों के अनुसार, सोने-चांदी में मजबूती के पीछे दो प्रमुख कारण हैं। पहला, डॉलर इंडेक्स फिलहाल 98 के नीचे बना हुआ है। यह इंडेक्स अमेरिकी डॉलर की यूरो, जापानी येन, पाउंड स्टर्लिंग, कैनेडियन डॉलर, स्वीडिश क्रोना और स्विस फ्रैंक — इन छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले स्थिति को मापता है। डॉलर के कमजोर होने पर सोना-चांदी आमतौर पर महँगे होते हैं।
दूसरा कारण वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता है। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने को लेकर बातचीत जारी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ईरान से अपने परमाणु कार्यक्रम को बंद करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने की माँग कर रहा है।
अमेरिका-ईरान वार्ता और बाज़ार पर असर
ईरान की समाचार एजेंसी ISNA के अनुसार, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि तेहरान अपनी प्रतिक्रिया देगा। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि ईरान एक समझौता चाहता है। गौरतलब है कि इस तरह की भू-राजनीतिक अनिश्चितता के दौर में सोना पारंपरिक रूप से 'सेफ हेवन' यानी सुरक्षित निवेश के रूप में उभरता है।
आगे चलकर बाज़ार की नज़र अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की नीतिगत बैठक और ईरान वार्ता के परिणाम पर रहेगी, जो कीमती धातुओं की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएँगे।