डॉलर की मजबूती से सोना-चांदी धड़ाम, MCX पर आधे फीसदी तक टूटे भाव
सारांश
Key Takeaways
- MCX पर सोना 0.47 प्रतिशत यानी 718 रुपए टूटकर 1,51,043 रुपए प्रति 10 ग्राम पर आया।
- चांदी 0.35 प्रतिशत यानी 842 रुपए गिरकर 2,40,671 रुपए प्रति किलोग्राम पर रही।
- कॉमेक्स पर सोना 4,684 डॉलर और चांदी 74.81 डॉलर प्रति औंस पर कमजोर रही।
- मोतीलाल ओसवाल के विशेषज्ञ मानव मोदी ने मजबूत डॉलर, बढ़ती यील्ड और बेहतर PMI डेटा को गिरावट का मुख्य कारण बताया।
- कच्चे तेल के 100 डॉलर प्रति बैरल पार जाने से महंगाई का खतरा बढ़ा, जो सोने पर अतिरिक्त दबाव बना रहा है।
- फेडरल रिजर्व की तत्काल ब्याज दर कटौती की उम्मीदें कम होने से सोने की निवेश अपील घटी।
मुंबई, 24 अप्रैल 2026 (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और उम्मीद से बेहतर पीएमआई आंकड़ों के चलते शुक्रवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने और चांदी की कीमतों में करीब आधे प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में बिकवाली का दबाव साफ नजर आया।
MCX पर सोने-चांदी के ताजा भाव
MCX पर सोने का कारोबार पिछले सत्र के बंद स्तर 1,51,761 रुपए के मुकाबले 1,51,167 रुपए पर खुला। सुबह 9:40 बजे तक 05 जून 2026 का सोने का कॉन्ट्रैक्ट 0.47 प्रतिशत यानी 718 रुपए की कमजोरी के साथ 1,51,043 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था।
कारोबार के दौरान सोने ने 1,51,039 रुपए का न्यूनतम और 1,51,457 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ। वहीं चांदी का 5 मई 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 0.35 प्रतिशत यानी 842 रुपए टूटकर 2,40,671 रुपए प्रति किलोग्राम पर आ गया। चांदी ने सत्र में 2,39,200 रुपए का निचला और 2,41,382 रुपए का ऊपरी स्तर बनाया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दबाव
वैश्विक स्तर पर भी कीमती धातुओं पर बिकवाली का असर दिखा। कॉमेक्स पर सोना 0.83 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,684 डॉलर प्रति औंस पर था, जबकि चांदी 0.92 प्रतिशत कमजोर होकर 74.81 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी।
विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर इंडेक्स की मजबूती और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल ने सोने की चमक फीकी कर दी है।
विशेषज्ञ विश्लेषण: गिरावट के पीछे तीन बड़े कारण
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के कमोडिटी एनालिस्ट मानव मोदी ने बताया कि अमेरिकी डॉलर की मजबूती, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक अनिश्चितता — ये तीन प्रमुख कारण सोने-चांदी पर दबाव बना रहे हैं।
मानव मोदी ने यह भी कहा कि कच्चे तेल की कीमतें दोबारा 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकलने से महंगाई बढ़ने का खतरा उत्पन्न हुआ है, जो परोक्ष रूप से सोने पर नकारात्मक असर डाल रहा है। इसके अलावा, अमेरिका के प्रारंभिक PMI डेटा के उम्मीद से बेहतर रहने से अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती की पुष्टि हुई, जिससे फेडरल रिजर्व द्वारा तत्काल ब्याज दर कटौती की संभावनाएं और कम हो गईं।
गहरा संदर्भ: सोने की रैली और अब करेक्शन
गौरतलब है कि बीते कुछ महीनों में सोने ने ऐतिहासिक ऊंचाइयां छुई थीं और MCX पर यह 1,55,000 रुपए के स्तर के करीब पहुंचा था। यह करेक्शन उस तेज रैली के बाद मुनाफावसूली और बदलते वैश्विक आर्थिक संकेतों का स्वाभाविक परिणाम माना जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि जब तक फेड की ब्याज दर नीति में नरमी के स्पष्ट संकेत नहीं मिलते, सोने पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि, दीर्घकालिक दृष्टि से भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी सोने को सपोर्ट प्रदान करती रहेगी।
आगे क्या?
बाजार की नजर अब अमेरिका के आगामी PCE मुद्रास्फीति डेटा और फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के बयानों पर टिकी है। इन आंकड़ों के आधार पर सोने और चांदी में अगली बड़ी दिशा तय होगी। घरेलू निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय दीर्घकालिक रणनीति अपनाएं।