नी मूवमेंट योग : रोज़ाना कुछ मिनट का यह अभ्यास घुटनों और जॉइंट्स को बनाएगा मजबूत
सारांश
Key Takeaways
- नी मूवमेंट (समस्थिति) योग की एक आधारभूत मुद्रा है जिसे आयुष मंत्रालय ने घुटनों और जोड़ों की मजबूती के लिए अनुशंसित किया है।
- इस अभ्यास से घुटनों और कूल्हों के जोड़ मजबूत होते हैं और निचले शरीर की स्थिरता बढ़ती है।
- रोज़ाना कुछ मिनट के इस अभ्यास से शारीरिक संतुलन, मांसपेशियों की ताकत और मानसिक एकाग्रता में सुधार होता है।
- यह अभ्यास विशेष रूप से लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों के लिए फायदेमंद है।
- गंभीर आर्थराइटिस या जोड़ों में सूजन वाले लोगों को इसे करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
- इस आसन के लिए किसी उपकरण की ज़रूरत नहीं — इसे घर पर बिना किसी खर्च के किया जा सकता है।
नई दिल्ली, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आधुनिक जीवनशैली और अव्यवस्थित खान-पान के कारण घुटनों और कूल्हों के जोड़ों में दर्द व कमजोरी की शिकायत अब हर उम्र के लोगों में देखी जा रही है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने योग के एक सरल और प्रभावी अभ्यास 'नी मूवमेंट' (जिसे 'समस्थिति' भी कहा जाता है) को इन समस्याओं के समाधान के रूप में अनुशंसित किया है। विशेषज्ञों के अनुसार रोज़ाना कुछ मिनट के इस अभ्यास से शरीर और मन दोनों को उल्लेखनीय लाभ मिलते हैं।
नी मूवमेंट क्या है और आयुष मंत्रालय ने क्यों अनुशंसित किया
आयुष मंत्रालय के अनुसार, नी मूवमेंट योग की एक आधारभूत मुद्रा है जो विशेष रूप से घुटनों और हिप जॉइंट्स को सक्रिय और मजबूत बनाती है। यह अभ्यास निचले शरीर की स्थिरता को बेहतर करता है और दैनिक जीवन में संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है।
यह मुद्रा केवल शारीरिक व्यायाम तक सीमित नहीं है — इसके नियमित अभ्यास से मानसिक एकाग्रता भी बढ़ती है और तनाव का स्तर घटता है। यही कारण है कि आयुष मंत्रालय इसे समग्र स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त मानता है।
नी मूवमेंट करने की सही विधि
योग विशेषज्ञों के अनुसार इस अभ्यास को करने के लिए सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं और दोनों पैरों को आपस में मिला लें। हाथों को शरीर के दोनों तरफ सीधा रखें और दृष्टि सामने की ओर स्थिर करें।
इसके बाद पूरे शरीर का संतुलन बनाए रखते हुए हवा में बैठने की मुद्रा अपनाएं — जैसे कि किसी अदृश्य कुर्सी पर बैठ रहे हों। इस अवस्था में कुछ मिनट तक स्थिर रहें। शरीर को पूरी तरह सतर्क और संतुलित रखना इस अभ्यास की मुख्य शर्त है। इसे घर पर बिना किसी उपकरण के आसानी से किया जा सकता है।
नियमित अभ्यास के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ
नी मूवमेंट के नियमित अभ्यास से घुटनों और कूल्हे के जोड़ों में मजबूती आती है। निचले शरीर की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं और उनमें ताकत बढ़ती है। लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों में जो जोड़ों की जकड़न और कमजोरी उत्पन्न होती है, वह इस अभ्यास से दूर होती है।
इसके अलावा, जोड़ों पर अनावश्यक दबाव कम होता है और दैनिक गतिविधियों में बेहतर संतुलन मिलता है। मानसिक स्तर पर यह मुद्रा फोकस सुधारती है और तनाव घटाने में सहायक होती है। योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभ्यास शरीर की नींव को मजबूत करता है।
सावधानियां और किन्हें बचना चाहिए
हालांकि यह आसन बेहद सरल और सुरक्षित है, लेकिन गंभीर आर्थराइटिस से पीड़ित लोगों या जिनके जोड़ों में सूजन हो, उन्हें इस अभ्यास से बचना चाहिए। ऐसे व्यक्तियों को डॉक्टर या प्रमाणित योग विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही कोई भी योगाभ्यास शुरू करना चाहिए।
स्वस्थ व्यक्ति इसे बिना किसी जोखिम के प्रतिदिन कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि व्यस्त दिनचर्या में भी यदि कुछ मिनट इस मुद्रा को दिए जाएं, तो दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ निश्चित हैं।
व्यापक परिप्रेक्ष्य : बढ़ती जोड़ों की समस्या और योग का महत्व
गौरतलब है कि भारत में जोड़ों के दर्द और ऑस्टियोआर्थराइटिस के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार, आर्थराइटिस दुनिया भर में विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है। भारत में ४० वर्ष से अधिक आयु के लोगों में घुटने के दर्द की व्यापकता चिंताजनक स्तर पर है।
ऐसे में आयुष मंत्रालय द्वारा सरल योगाभ्यासों को बढ़ावा देना न केवल निवारक स्वास्थ्य की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, बल्कि यह महंगे उपचारों पर निर्भरता भी घटाता है। आने वाले समय में आयुष मंत्रालय ऐसे और अभ्यासों को लोकप्रिय बनाने की दिशा में प्रयास जारी रखेगा।