एआई की आंधी में 23,000 नौकरियां खतरे में, मेटा-माइक्रोसॉफ्ट का बड़ा छंटनी प्लान
सारांश
Key Takeaways
- मेटा अपनी वर्कफोर्स में 10 प्रतिशत यानी लगभग 8,000 नौकरियों में कटौती करेगा, जो 20 मई 2025 से शुरू होगी।
- माइक्रोसॉफ्ट अमेरिका में 7 प्रतिशत कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का प्रस्ताव दे रहा है, जिससे करीब 8,750 कर्मचारी प्रभावित होंगे।
- मेटा ने 6,000 रिक्त पद न भरने का भी फैसला किया है, जो व्यापक पुनर्गठन अभियान का हिस्सा है।
- दोनों कंपनियां एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर अरबों डॉलर निवेश कर रही हैं और जापान, ऑस्ट्रेलिया में डेटा सेंटर विस्तार कर रही हैं।
- केपीएमजी अमेरिका भी ऑडिट पार्टनर पदों में 10 प्रतिशत कटौती करने जा रहा है।
- दोनों कंपनियां अप्रैल 2025 के अंत में अपनी तिमाही आय रिपोर्ट जारी करेंगी, जिसमें आगे की रणनीति स्पष्ट होगी।
नई दिल्ली, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की बढ़ती ताकत के सामने दुनिया की दो सबसे बड़ी टेक कंपनियां — मेटा और माइक्रोसॉफ्ट — अपने कार्यबल में भारी कटौती करने जा रही हैं। विभिन्न रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों कंपनियां मिलकर करीब 23,000 से अधिक कर्मचारियों की छंटनी या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की प्रक्रिया शुरू करने वाली हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब दोनों कंपनियां एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर अरबों डॉलर झोंक रही हैं।
मेटा का पुनर्गठन — 8,000 नौकरियां जाएंगी
मार्क जुकरबर्ग के नेतृत्व वाली मेटा ने अपने आंतरिक मेमो में खुलासा किया है कि कंपनी अपनी कुल वर्कफोर्स में से लगभग 10 प्रतिशत यानी करीब 8,000 पदों पर कटौती करेगी। यह प्रक्रिया 20 मई 2025 से शुरू होगी।
इसके अलावा, मेटा ने लगभग 6,000 रिक्त पदों को न भरने का भी निर्णय लिया है, जो कंपनी के व्यापक पुनर्गठन अभियान का हिस्सा है। मेटा की मुख्य मानव संसाधन अधिकारी जेनेल गेल द्वारा जारी मेमो में इस कदम को दक्षता और निवेश संतुलन से जोड़ा गया है।
जेनेल गेल के हवाले से कहा गया, "हम कंपनी को अधिक कुशलता से चलाने और अपने अन्य निवेशों की भरपाई करने के निरंतर प्रयासों के तहत यह कदम उठा रहे हैं।"
माइक्रोसॉफ्ट का कदम — 8,750 कर्मचारियों पर असर
माइक्रोसॉफ्ट ने अमेरिका में अपने कर्मचारियों के एक वर्ग को स्वैच्छिक शीघ्र सेवानिवृत्ति का प्रस्ताव दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका में कार्यरत लगभग 7 प्रतिशत कर्मचारी इस कार्यक्रम के लिए पात्र हैं, जिससे करीब 8,750 कर्मचारी प्रभावित हो सकते हैं।
माइक्रोसॉफ्ट की मुख्य मानव संसाधन अधिकारी एमी कोलमैन ने कर्मचारियों को भेजे मेमो में कहा, "इस गति को बनाए रखने के लिए हमें उत्कृष्ट कार्य करने, प्रबंधकों पर भरोसा करने और प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर ध्यान केंद्रित करना होगा।"
माइक्रोसॉफ्ट इस समय अपने वैश्विक डेटा सेंटर नेटवर्क का विस्तार कर रहा है और जापान तथा ऑस्ट्रेलिया जैसे बाजारों में एआई संबंधित निवेश की घोषणाएं कर चुका है।
एआई में निवेश बनाम नौकरी — विरोधाभास की असली तस्वीर
यह स्थिति एक गहरे विरोधाभास को उजागर करती है — एक तरफ ये कंपनियां एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड खर्च कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्हीं लोगों की नौकरियां जा रही हैं जिन्होंने इन कंपनियों को यहां तक पहुंचाया। मेटा ने इस वर्ष रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय का अनुमान लगाया है और हाल के महीनों में एआई भागीदारों के साथ कई अरबों डॉलर के सौदे किए हैं।
गौरतलब है कि दोनों कंपनियों ने पिछले दो वर्षों में कई चरणों में छंटनी की है। 2023 में मेटा ने करीब 21,000 और माइक्रोसॉफ्ट ने 10,000 से अधिक कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया था। यह उसी सिलसिले की नई कड़ी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एआई टूल्स अब वे काम करने में सक्षम हो गए हैं जो पहले दर्जनों इंजीनियर करते थे — यही कारण है कि कंपनियां मानव श्रम की जगह एल्गोरिदम को तरजीह दे रही हैं।
केपीएमजी भी पीछे नहीं — ऑडिट सेक्टर में भी कटौती
इसी बीच, एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार केपीएमजी अमेरिका भी स्वैच्छिक शीघ्र सेवानिवृत्ति को प्रोत्साहित करने के अपने दीर्घकालिक प्रयास के तहत अपने ऑडिट पार्टनर पदों में लगभग 10 प्रतिशत की कटौती कर रहा है। यह दर्शाता है कि एआई का असर केवल टेक सेक्टर तक सीमित नहीं रहा — पेशेवर सेवाओं तक भी इसकी पहुंच हो चुकी है।
भारतीय आईटी कर्मचारियों पर असर
भारत में लाखों आईटी पेशेवर इन बहुराष्ट्रीय कंपनियों में कार्यरत हैं या उनके लिए सेवाएं देने वाली कंपनियों से जुड़े हैं। टीसीएस, इन्फोसिस, विप्रो जैसी भारतीय आईटी दिग्गज कंपनियां भी पहले से ही हायरिंग में कमी कर रही हैं। अगर मेटा और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां एआई के जरिए अपनी जरूरतें पूरी करने लगें, तो भारतीय आईटी आउटसोर्सिंग बाजार पर भी गहरा असर पड़ सकता है।
मेटा और माइक्रोसॉफ्ट दोनों अप्रैल के अंत में अपनी तिमाही आय रिपोर्ट जारी करने वाले हैं, जिसमें इन फैसलों की वित्तीय वजहें और भविष्य की रणनीति और स्पष्ट होगी। आने वाले महीनों में यह देखना होगा कि क्या एआई का यह तूफान और कंपनियों को भी अपनी चपेट में लेता है।