ताहिर फजल को भारतीय सेना की भावभीनी अंतिम विदाई, 'ऑपरेशन सर्प विनाश' के थे नायक
सारांश
Key Takeaways
- ताहिर फजल का 22 अप्रैल 2025 को उत्तराखंड में 62 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
- वे पुंछ जिले के सुरनकोट के मुर्राह गांव के निवासी और 2003 के ऑपरेशन सर्प विनाश के नायक थे।
- उन्होंने हिल काका और सुरनकोट में आतंकवाद-विरोधी अभियान में भारतीय सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया।
- सुरनकोट क्षेत्र में पहली ग्राम रक्षा समिति (वीडीसी) की स्थापना में उनकी अग्रणी भूमिका रही।
- भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कोर ने एक्स पर भावभीनी श्रद्धांजलि दी और परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं।
- सेना के जवानों ने पार्थिव शरीर को कंधा देकर पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार संपन्न कराया।
पुंछ, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। ऑपरेशन सर्प विनाश के साहसी नायक ताहिर फजल को भारतीय सेना ने पूरे सैनिक सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी। पुंछ जिले के सुरनकोट क्षेत्र के मुर्राह गांव के निवासी ताहिर फजल का 22 अप्रैल 2025 को उत्तराखंड में 62 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे वर्ष 2003 में चलाए गए ऐतिहासिक ऑपरेशन सर्प विनाश से जुड़े एक प्रमुख स्तंभ थे, जिन्होंने आतंकवाद के विरुद्ध भारतीय सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष किया।
ऑपरेशन सर्प विनाश में ताहिर फजल की भूमिका
ताहिर फजल ने हिल काका और सुरनकोट इलाकों में आतंकवाद-विरोधी अभियानों में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान दिया था। वे उन साहसी नागरिकों में से एक थे जिन्होंने उस दौर में अपनी जान की परवाह किए बिना सुरक्षा बलों का साथ दिया।
उनकी सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि थी इस क्षेत्र में पहली ग्राम रक्षा समिति (वीडीसी) की स्थापना में उनकी अग्रणी भूमिका। इस समिति ने स्थानीय नागरिकों को संगठित कर आतंकी गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद की।
व्हाइट नाइट कोर की श्रद्धांजलि
भारतीय सेना की प्रतिष्ठित व्हाइट नाइट कोर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक भावपूर्ण पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि गहरे दुख और अपार कृतज्ञता के साथ भारतीय सेना ने ताहिर फजल को एक भावभीनी विदाई दी।
सेना ने आगे कहा कि वह एक वीर सपूत थे जो 2003 में ऑपरेशन सर्प विनाश के दौरान सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे। उनकी साहसी भावना, अटल साहस और भारतीय सेना के साथ उनका गहरा जुड़ाव उनके उत्कृष्ट चरित्र का प्रमाण है।
पैतृक गांव में अंतिम संस्कार और जनसैलाब
ताहिर फजल का पार्थिव शरीर उत्तराखंड से सड़क मार्ग द्वारा उनके पैतृक गांव मुर्राह, सुरनकोट, पुंछ लाया गया। उनके अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण, स्थानीय नागरिक और सेना के जवान एकत्रित हुए।
भारतीय सेना के जवानों ने पूरे आदर और गरिमा के साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में सहयोग दिया। सैनिकों ने पार्थिव शरीर को कंधा दिया, जो राष्ट्रीय उद्देश्य के लिए समर्पित हर नागरिक के प्रति सेना की एकजुटता का प्रतीक था।
ऐतिहासिक संदर्भ: ऑपरेशन सर्प विनाश क्या था?
ऑपरेशन सर्प विनाश वर्ष 2003 में जम्मू-कश्मीर के पुंछ-राजौरी क्षेत्र में भारतीय सेना द्वारा चलाया गया एक बड़ा आतंकवाद-विरोधी अभियान था। यह अभियान सुरनकोट और हिल काका जैसे दुर्गम पहाड़ी इलाकों में छिपे आतंकियों के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए चलाया गया था।
उस दौर में इस इलाके में आतंकी घुसपैठ और हिंसा चरम पर थी। ऐसे में स्थानीय नागरिकों का सेना के साथ खड़े होना अत्यंत साहसिक और जोखिम भरा कदम था।
ताहिर फजल की विरासत और नागरिक वीरता
ग्राम रक्षा समितियां (वीडीसी) जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण नागरिक ढाल के रूप में उभरीं। इन समितियों ने स्थानीय स्तर पर सुरक्षा का एक ऐसा तंत्र विकसित किया जिसने सेना को खुफिया जानकारी और जमीनी सहयोग प्रदान किया।
ताहिर फजल का सुरनकोट क्षेत्र में पहली वीडीसी स्थापित करने में योगदान इस बात का प्रमाण है कि राष्ट्र की रक्षा केवल वर्दीधारी सैनिक ही नहीं, बल्कि साहसी नागरिक भी करते हैं। उनके निधन के बाद भारतीय सेना ने जिस सम्मान के साथ उन्हें विदाई दी, वह इस बात का संकेत है कि राष्ट्र अपने नागरिक नायकों को नहीं भूलता।