झारखंड में 'ईडी बनाम पुलिस' विवाद पर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय, सीबीआई जांच का आदेश

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झारखंड में 'ईडी बनाम पुलिस' विवाद पर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय, सीबीआई जांच का आदेश

सारांश

झारखंड में ईडी और पुलिस के बीच चल रहे कानूनी विवाद पर हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश दिया है। यह निर्णय मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी संतोष कुमार की शिकायत पर आधारित है। जानिए इस मामले के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में।

Key Takeaways

  • हाईकोर्ट का निर्णय: ईडी और पुलिस के विवाद पर सीबीआई जांच का आदेश।
  • संतोष कुमार का आरोप: ईडी अधिकारियों पर मारपीट और मानसिक प्रताड़ना का आरोप।
  • राज्य पुलिस की कार्रवाई: एफआईआर दर्ज करने और छापेमारी करने का कदम।
  • कानूनी स्वतंत्रता: केंद्रीय एजेंसियों के कार्यों पर रोक नहीं लगाई जा सकती।
  • सुरक्षा का आदेश: ईडी कार्यालय की सुरक्षा की जिम्मेदारी सीआईएसएफ को।

रांची, 11 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड में केंद्रीय जांच एजेंसी (ईडी) और राज्य पुलिस के बीच चल रहे कानूनी विवाद पर बुधवार को झारखंड उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी संतोष कुमार की शिकायत पर ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज की गई प्राथमिकी और संबंधित सभी मामलों की जांच अब सीबीआई द्वारा की जाएगी।

जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपने सुरक्षित फैसले में इस मामले को सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया है। यह आदेश राज्य सरकार और रांची पुलिस के लिए एक बड़ा झटका मना जा रहा है। ईडी ने अपने अधिकारियों के खिलाफ एयरपोर्ट थाने में दर्ज की गई एफआईआर को गलत बताते हुए इसे निरस्त करने और पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी।

इस कानूनी लड़ाई की शुरुआत संतोष कुमार की एक शिकायत से हुई थी, जो पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कर्मचारी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले का आरोपी है। संतोष ने आरोप लगाया था कि 12 जनवरी को रांची स्थित ईडी कार्यालय में पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने उसके साथ मारपीट, दुर्व्यवहार और मानसिक प्रताड़ना की। इस शिकायत के आधार पर रांची पुलिस ने न केवल प्राथमिकी दर्ज की, बल्कि ईडी कार्यालय में छापेमारी जैसी कार्रवाई भी की थी।

पुलिस की इस सक्रियता के बाद राज्य पुलिस और ईडी के बीच तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। प्रवर्तन निदेशालय ने पुलिस की इस कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की थी। इससे पहले 16 जनवरी को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने रांची पुलिस की जांच पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी। कोर्ट ने उस समय यह टिप्पणी करते हुए कहा था कि किसी भी केंद्रीय एजेंसी के कार्यों को प्रभावित नहीं किया जा सकता।

अदालत ने ईडी कार्यालय की सुरक्षा की जिम्मेदारी सीआईएसएफ, बीएसएफ या अन्य अर्धसैनिक बलों को सौंपने का निर्देश दिया और सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने का आदेश दिया था। इस मामले में सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया एसवी राजू, अधिवक्ता एके दास और अधिवक्ता सौरभ कुमार ने पक्ष रखा, वहीं राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एस नागामुथु, महाधिवक्ता राजीव रंजन और अधिवक्ता दीपांकर ने दलील पेश की। सूचक की ओर से अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया ने पक्ष रखा।

Point of View

बल्कि यह सभी केंद्रीय एजेंसियों के कार्यों की स्वतंत्रता को भी सुनिश्चित करता है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता की आवश्यकता होती है।
NationPress
11/03/2026

Frequently Asked Questions

यह मामला किससे संबंधित है?
यह मामला झारखंड में ईडी और राज्य पुलिस के बीच कानूनी विवाद से संबंधित है, जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है।
हाईकोर्ट का निर्णय क्या है?
हाईकोर्ट ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर की जांच का आदेश सीबीआई को दिया है।
क्यों हुआ यह कानूनी विवाद?
यह विवाद संतोष कुमार की शिकायत से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने ईडी अधिकारियों पर मारपीट और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था।
इस मामले में अगला कदम क्या होगा?
सीबीआई अब इस मामले की जांच करेगी और सभी तथ्य और साक्ष्य एकत्र करेगी।
क्या इस मामले की जांच पारदर्शी होगी?
हां, सीबीआई की जांच पारदर्शी और निष्पक्ष होगी, जो कि कानून के अनुसार होगी।
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