झारखंड टेंडर घोटाला: रिटायर्ड इंजीनियरों ने अदालत में किया आत्मसमर्पण, मिली जमानत

Click to start listening
झारखंड टेंडर घोटाला: रिटायर्ड इंजीनियरों ने अदालत में किया आत्मसमर्पण, मिली जमानत

सारांश

झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग में हुए करोड़ों रुपये के टेंडर घोटाले के आरोप में रिटायर्ड इंजीनियरों ने अदालत में आत्मसमर्पण किया। उन्हें सशर्त जमानत मिली, लेकिन उनके पासपोर्ट जमा करने का आदेश दिया गया। जानिए इस मामले की पूरी कहानी।

Key Takeaways

  • रिटायर्ड इंजीनियरों का आत्मसमर्पण
  • सशर्त जमानत का आदेश
  • ईडी की जांच में संगठित सिंडिकेट का खुलासा
  • घोटाले में 90 करोड़ रुपये की अवैध उगाही
  • सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

रांची, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग में हुए करोड़ों रुपये के टेंडर कमीशन घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में आरोपी रिटायर्ड इंजीनियर इन चीफ राजीव लोचन और रिटायर्ड एक्जीक्यूटिव इंजीनियर अनिल कुमार ने बुधवार को रांची स्थित पीएमएलए की विशेष अदालत में आत्मसमर्पण किया।

इसके बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को एक-एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर सशर्त जमानत प्रदान की है। अदालत ने जमानत मंजूर करते हुए निर्देश दिया कि दोनों आरोपी अपना पासपोर्ट जमा करेंगे और बिना अनुमति के देश नहीं छोड़ेंगे।

गौरतलब है कि ईडी ने हाल ही में इस घोटाले में 14 आरोपियों के खिलाफ पूरक आरोप पत्र दाखिल किया था, जिस पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने सभी को समन जारी किया था। इस मामले के मुख्य आरोपी और पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम एवं उनके निजी सचिव संजीव लाल की मुश्किलें बरकरार हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं।

जस्टिस एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन कोटेश्वर सिंह की पीठ ने ट्रायल कोर्ट को चार सप्ताह के भीतर प्रमुख गवाहों के बयान दर्ज करने और सुनवाई में तेजी लाने का निर्देश दिया है। ईडी की जांच में ग्रामीण विकास विभाग में कमीशन के एक संगठित सिंडिकेट का खुलासा हुआ है।

आरोप है कि विभाग में टेंडर आवंटन के बदले ठेकेदारों से कुल मूल्य का लगभग 3 प्रतिशत कमीशन वसूला जाता था। इस अवैध कमाई में से 1.35 प्रतिशत हिस्सा कथित तौर पर मंत्री तक पहुंचता था, जबकि शेष राशि सचिव और विभिन्न स्तर के इंजीनियरों के बीच बांटी जाती थी। जांच एजेंसी के अनुसार, लगभग 3,048 करोड़ रुपये के टेंडर आवंटन के मुकाबले 90 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध उगाही की गई है।

यह मामला वर्ष 2024 के मई में उस वक्त चर्चा में आया था जब ईडी ने तत्कालीन मंत्री के निजी संजीव लाल के करीबी जहांगीर आलम के ठिकानों पर छापेमारी कर 32.20 करोड़ रुपये नकद बरामद किए थे।

Point of View

बल्कि न्यायालय की भूमिका और ईडी की जांच की प्रगति पर भी सवाल उठाता है।
NationPress
10/04/2026

Frequently Asked Questions

क्या इस घोटाले में और भी आरोपी शामिल हैं?
जी हां, ईडी ने इस घोटाले में 14 अन्य आरोपियों के खिलाफ भी पूरक आरोप पत्र दाखिल किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों की जमानत याचिका क्यों खारिज की?
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए आरोपियों की स्थिति को गंभीर मानते हुए निर्णय लिया।
क्या आरोपियों को कोर्ट से कोई निर्देश मिले हैं?
हाँ, कोर्ट ने आरोपियों को अपना पासपोर्ट जमा करने और बिना अनुमति के देश छोड़ने पर रोक लगाई है।
इस घोटाले में ईडी की जांच में क्या खुलासा हुआ है?
जांच में ग्रामीण विकास विभाग में कमीशन के एक संगठित सिंडिकेट का खुलासा हुआ है, जहां ठेकेदारों से 3%25 कमीशन लिया जाता था।
क्या घोटाले की राशि का कोई आंकड़ा है?
जांच एजेंसी के अनुसार, लगभग 90 करोड़ रुपये की अवैध उगाही की गई है।
Nation Press