मुकुल चौधरी: 'जन्म से पहले क्रिकेटर बनने का सपना', झुंझुनू से आईपीएल का सफर कठिन रहा
सारांश
Key Takeaways
- मुकुल चौधरी ने आईपीएल में शानदार प्रदर्शन किया।
- उनके पिता का सपना था कि उनका बेटा क्रिकेट खेले।
- मुकुल ने 27 गेंदों पर 54 रन बनाकर टीम को जीत दिलाई।
- मुकुल का आदर्श महेंद्र सिंह धोनी हैं।
- उन्होंने कड़ी मेहनत और अभ्यास के जरिए अपनी पावर-हिटिंग क्षमता को निखारा।
नई दिल्ली, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) एक ऐसा मंच है जो प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ियों को रातों-रात वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने का अवसर प्रदान करता है। प्रत्येक सीजन में कई युवा खिलाड़ी आईपीएल के माध्यम से अपनी अद्वितीय प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं। हाल ही में कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) और लखनऊ सुपर जायंट्स (एलएसजी) के बीच हुए मैच में 21 वर्षीय मुकुल चौधरी ने एक अद्भुत प्रदर्शन किया।
एलएसजी ने 182 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए 12.5 ओवर में 104 रन पर 5 विकेट खो दिए थे। इस समय मुकुल चौधरी सातवें बल्लेबाज के रूप में बल्लेबाजी करने आए। टीम को जीत के लिए 43 गेंदों में 78 रन की आवश्यकता थी। 16 ओवर के अंत में स्कोर 7 विकेट पर 128 रन था। अंतिम 24 गेंदों में एलएसजी को 54 रन चाहिए थे और क्रीज पर मुकुल चौधरी के साथ आवेश खान थे।
मुकुल चौधरी की यह केवल दूसरी पारी थी और उनके साथी सभी खिलाड़ी गेंदबाज थे, जिससे एलएसजी की जीत की संभावना कम लग रही थी। लेकिन मुकुल ने यहाँ से खेल का रुख पलट दिया और अपनी असाधारण क्षमता का प्रदर्शन किया।
6 गेंदों पर 2 रन बनाकर खेल रहे मुकुल चौधरी ने 17वें ओवर में 11 रन बनाये, जिसमें 1 छक्का और 1 चौका शामिल था। आखिरी 3 ओवर में एलएसजी को जीत के लिए 43 रन चाहिए थे। 18वें ओवर में मुकुल ने कार्तिक त्यागी के खिलाफ 2 छक्कों सहित 13 रन बनाये और स्ट्राइक अपने पास रखी। 19वें ओवर में ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज कैमरन ग्रीन के ओवर में उन्होंने 2 छक्के और 1 चौका सहित 16 रन बनाये।
आखिरी ओवर में एलएसजी को 14 रन की आवश्यकता थी। आवेश खान ने पहली गेंद पर मुकुल को सिंगल दिया। इसके बाद मुकुल ने वैभव की दूसरी और पांचवीं गेंद पर छक्का मारा। अंत में, मुकुल और आवेश ने सिंगल लेकर टीम को जीत दिलाई। 16वें ओवर के अंत में 6 गेंदों पर 2 रन बनाकर खेल रहे मुकुल ने अगली 21 गेंदों पर 7 छक्के और 1 चौका लगाया। उन्होंने 27 गेंदों में 54 रन की नाबाद पारी खेलकर टीम को 3 विकेट से जीत दिलाई। एलएसजी ने जीत हासिल की और भारतीय क्रिकेट को एक और प्रतिभाशाली क्रिकेटर मिला।
मुकुल की इस बहादुर पारी की क्रिकेट दिग्गजों ने प्रशंसा की।
मैच के बाद मुकुल ने अपनी कहानी साझा करते हुए बताया कि क्रिकेटर बनना उनके पिता का सपना था। उन्होंने कहा, "मेरा सफर तब शुरू हुआ जब मेरे पिता की शादी भी नहीं हुई थी, उनका सपना था कि उनका बेटा क्रिकेट खेले।"
महेंद्र सिंह धोनी को अपना आदर्श मानने वाले मुकुल ने कहा कि उन्हें बचपन से छक्के लगाना पसंद है। उन्होंने कहा कि वे जमीनी शॉट खेलना कम पसंद करते हैं। उनकी बल्लेबाजी में धोनी जैसा आत्मविश्वास और धैर्य दिखता है, और उन्होंने मैच भी धोनी की तरह ही समाप्त किया। उनके हेलीकॉप्टर शॉट ने भी धोनी की झलक दिखाई। मुकुल रोजाना 100-150 छक्के लगाने का अभ्यास करते हैं, जिससे उनकी पावर-हिटिंग क्षमता निखरी है।
दाएं हाथ के इस बल्लेबाज के क्रिकेट करियर में उनके पिता का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। उनके पिता दलीप चौधरी ने उन्हें क्रिकेटर बनाने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी और आर्थिक जोखिम उठाए। उनकी मां सुनीता ने भी हर संभव समर्थन दिया।
मुकुल की क्रिकेट यात्रा आसान नहीं रही है। राजस्थान के लिए घरेलू क्रिकेट खेलने वाले इस खिलाड़ी ने पहले मध्यम गति के तेज गेंदबाज के रूप में सिक्किम में खेलना शुरू किया था, जहां सुविधाएं सीमित थीं। बाद में, उन्होंने विकेटकीपिंग और आक्रामक बल्लेबाजी पर ध्यान केंद्रित किया और दिल्ली और गुरुग्राम जाकर अपने खेल में सुधार किया। उन्होंने 2023 में राजस्थान के लिए प्रथम श्रेणी और टी20 में डेब्यू किया।
2025-26 सीजन में सीके नायडू ट्रॉफी में 617 रन बनाकर उन्होंने खुद को साबित किया। इसके बाद सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन ने उन्हें आईपीएल तक पहुंचा दिया। सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में उन्होंने 198.85 की स्ट्राइक रेट से रन बनाए। इसी कारण आईपीएल 2026 की नीलामी में लखनऊ सुपर जायंट्स ने उन्हें 2.6 करोड़ रुपये में खरीदा।
6 अगस्त 2024 को झुंझुनू (राजस्थान) में जन्मे मुकुल चौधरी के बारे में उनके साथी अर्जुन तेंदुलकर ने कहा था कि आने वाले दिनों में वह बड़े सितारे बन सकते हैं। मुकुल ने केकेआर के खिलाफ मैच में अपनी क्षमता को साबित कर दिया। आगामी मैचों में उनके प्रदर्शन पर फैंस की नजर रहेगी।