18 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल भेजा, विपक्ष ने कहा — 'तानाशाही और गुंडागर्दी'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल भेजा, विपक्ष ने कहा — 'तानाशाही और गुंडागर्दी'

सारांश

20 दिनों की भूख हड़ताल के बाद दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से उठाकर सफदरजंग अस्पताल भेज दिया। विपक्ष ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया — और यह पहली बार नहीं है जब जंतर-मंतर के किसी बड़े आंदोलन का यही अंत हुआ हो।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस ने 18 जुलाई की सुबह सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया।
वांगचुक 20-21 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे; उनके साथियों को कथित तौर पर हिरासत में लिया गया।
AAP नेता संजय सिंह , SP सांसद डिंपल यादव , पुष्पेंद्र सरोज , अनुराग भदौरिया और भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने एक्स पर कार्रवाई की कड़ी निंदा की।
आलोचकों ने इसकी तुलना वन रैंक वन पेंशन आंदोलन और महिला पहलवानों के धरने को बलपूर्वक हटाए जाने से की।
सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है; विपक्ष इस मुद्दे को संसद में उठाने की तैयारी में है।

दिल्ली पुलिस ने शनिवार, 18 जुलाई की सुबह जंतर-मंतर पर 20 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया। पुलिस के इस कदम पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे लोकतंत्र पर हमला और 'तानाशाही' की संज्ञा दी है।

मुख्य घटनाक्रम

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सादे कपड़ों में पहुँचे पुलिसकर्मियों ने वांगचुक को सफेद चादर से ढककर बैरिकेड्स हटाते हुए जबरन अस्पताल ले गए। उनके साथियों को भी कथित तौर पर मारपीट कर हिरासत में लिया गया। यह कार्रवाई तब हुई जब वांगचुक अपनी माँगों को लेकर 21 दिनों से आमरण अनशन पर थे और उनके समर्थन में बड़ी संख्या में लोग जुटे हुए थे।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता संजय सिंह ने एक्स पर लिखा, 'ये क्या गुंडागर्दी चल रही है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ये सत्ता का अहंकार लंबे समय तक नहीं चलता। जिस युवा पर लठ्ठ चला रहे हो, यही आपका तख्त उखाड़ेगा। एक शख्स सोनम वांगचुक जो पिछले 21 दिनों से आमरण अनशन पर है, उनकी मांगें सुनने के बजाय उसको जबरन गिरफ्तार कर हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया गया।'

समाजवादी पार्टी (SP) की सांसद डिंपल यादव ने एक्स पर पोस्ट किया, 'सोनम वांगचुक को जबरन हटाना सिर्फ एक कार्रवाई नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान को कुचलना है। भाजपा सरकार को अब शांतिपूर्ण विरोध भी बर्दाश्त नहीं। यह तानाशाही है।' एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा, 'जब शांतिपूर्ण आवाजों को दबाया जाता है तो संविधान और लोकतंत्र भी आहत होते हैं। सोनम वांगचुक जैसे लोगों की आवाज दबाना देश की आत्मा को दबाना है।'

भीम आर्मी के प्रमुख और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने एक्स पर लिखा, 'लोकतंत्र एक बार फिर शर्मसार! सादा कपड़ों में पहुँचे पुलिसकर्मियों द्वारा जबरन अस्पताल ले जाना तथा उनके साथियों के साथ मारपीट कर उन्हें हिरासत में लेना अत्यंत निंदनीय और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा प्रहार है।'

आजाद ने यह भी याद दिलाया कि इससे पहले वन रैंक वन पेंशन की माँग पर धरने पर बैठे पूर्व सैनिकों और महिला पहलवानों के शांतिपूर्ण आंदोलन को भी इसी तरह बलपूर्वक हटाया गया था।

सांसद पुष्पेंद्र सरोज का बयान

समाजवादी पार्टी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने कहा, 'यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। जो व्यक्ति 20 दिनों से भूख हड़ताल पर है, उसके समर्थन में बड़ी संख्या में लोग जमा हुए थे, लेकिन सरकार उनकी बात नहीं सुन रही है। आज उन्हें चादर से ढका गया, बैरिकेड्स हटाए गए और सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया।' उन्होंने एक्स पर यह भी सवाल उठाया, 'क्या लोकतंत्र में अपनी मांगों के लिए शांतिपूर्ण अनशन करना भी अब आसान नहीं रहा?'

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अनुराग भदौरिया ने एक्स पर लिखा, 'ये कौन सा तरीका है शांतिपूर्ण प्रदर्शन खत्म करने का। सफेद कपड़ा लाकर 20 दिनों की हड़ताल के बाद सोनम वांगचुक को अस्पताल उठा ले गई पुलिस।'

व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब जंतर-मंतर पर चल रहे किसी बड़े आंदोलन को इस तरह समाप्त किया गया हो। आलोचकों का कहना है कि वन रैंक वन पेंशन आंदोलन और महिला पहलवानों के धरने के दौरान भी यही पैटर्न देखने को मिला था। यह ऐसे समय में आया है जब वांगचुक की माँगें — जो लद्दाख के संवैधानिक दर्जे और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी बताई जाती हैं — अभी तक सरकार द्वारा सार्वजनिक रूप से संबोधित नहीं की गई हैं।

आगे की स्थिति

फिलहाल सोनम वांगचुक सफदरजंग अस्पताल में हैं और उनकी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। विपक्षी दल इस मामले को संसद में उठाने की तैयारी में बताए जा रहे हैं। सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सफेद चादर, बैरिकेड्स — एक परिचित पटकथा है जो वन रैंक वन पेंशन और महिला पहलवान आंदोलनों में भी दोहराई गई थी। असली सवाल यह नहीं है कि विपक्ष ने क्या कहा, बल्कि यह है कि सरकार ने 21 दिनों में संवाद का एक भी प्रयास क्यों नहीं किया। जब संवाद की जगह अस्पताल लेने लगे, तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है — और मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस पैटर्न की पुनरावृत्ति को नज़रअंदाज़ कर देती है।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनम वांगचुक को अस्पताल क्यों ले जाया गया?
दिल्ली पुलिस ने 18 जुलाई की सुबह जंतर-मंतर पर 20-21 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया। पुलिस की ओर से आधिकारिक कारण अभी तक स्पष्ट नहीं किया गया है।
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल किस मुद्दे पर थी?
सोनम वांगचुक कथित तौर पर लद्दाख के संवैधानिक दर्जे और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी माँगों को लेकर जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठे थे। उनकी माँगें सरकार द्वारा अब तक सार्वजनिक रूप से संबोधित नहीं की गई हैं।
विपक्ष ने इस कार्रवाई पर क्या कहा?
AAP नेता संजय सिंह ने इसे 'गुंडागर्दी' कहा, SP सांसद डिंपल यादव ने 'तानाशाही' करार दिया, और भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने इसे 'लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा प्रहार' बताया। सभी ने एक्स पर अपनी प्रतिक्रियाएँ दर्ज कीं।
क्या पहले भी ऐसी घटनाएँ हुई हैं?
आलोचकों के अनुसार, वन रैंक वन पेंशन की माँग पर धरने पर बैठे पूर्व सैनिकों और महिला पहलवानों के शांतिपूर्ण आंदोलन को भी इसी तरह बलपूर्वक हटाया गया था। चंद्रशेखर आजाद ने एक्स पर यही तुलना की।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 2 घंटे पहले
  3. 2 घंटे पहले
  4. 4 घंटे पहले
  5. 21 घंटे पहले
  6. कल
  7. कल
  8. 3 दिन पहले